बीएससी नर्सिंग के मैनेजमेंट कोटे में काउंसिलिंग से एडमिशन, निजी कॉलेज मर्जी से नहीं दे सकेंगे

Raipur News - प्रदेश के निजी नर्सिंग कॉलेजों मैनेजमेंट कोटे में एडमिशन चिकित्सा शिक्षा विभाग की काउंसिलिंग से होगी। निजी...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:25 AM IST
Raipur News - chhattisgarh news admission from counseling can not be given to private colleges by the management quota of bsc nursing
प्रदेश के निजी नर्सिंग कॉलेजों मैनेजमेंट कोटे में एडमिशन चिकित्सा शिक्षा विभाग की काउंसिलिंग से होगी। निजी कॉलेज प्रबंधन अपनी मर्जी से सीधे छात्राओं को एडमिशन नहीं दे सकेंगे। अगर वे सीधे एडमिशन देंगे तो यह अवैध माना जाएगा। नए सत्र के लिए एडमिशन काउंसिलिंग के माध्यम से होगा। ऐसी व्यवस्था 2016 में हुए नर्सिंग घोटाले के बाद लिया गया था। यही नहीं कॉलेजों को एडमिशन हुए एक-एक सीट की जानकारी संचालनालय को भेजनी होगी।

निजी नर्सिंग कॉलेजों में एडमिशन पर सख्ती जारी रहेगी। 2016 में एडमिशन लेने की आखिरी तारीख 11 नवंबर थी। इसके बाद भी काउंसिलिंग अधिकारियों की मिलीभगत से निजी नर्सिंग कॉलेजों ने 1500 से ज्यादा सीटों पर एडमिशन दे दिया गया था। इस मामले में सस्पेंड डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सुमीत त्रिपाठी व आईटी सेल के सदस्य डॉ. आेंकार खंड तीन दिनों पहले ही बहाल हुए हैं। उन्हें दोषी पाया गया है और दोनों डॉक्टरों का दो इंक्रीमेंट रोक दिया गया है। घोटाले के बाद से शासन ने निजी नर्सिंग कॉलेजों को नोटिस जारी कर बीएससी नर्सिंग, एमएससी नर्सिंग, जीएनएम व पोस्ट बेसिक नर्सिंग में उन्हीं छात्राआें को एडमिशन देने को कहा था, जो संचालनालय अथवा संचालनालय द्वारा अधिकृत एजेंसी की परीक्षा में शामिल हुई हैं। निजी नर्सिंग कॉलेज एसोसिएशन की कोई भी परीक्षा मान्य नहीं होगी। निजी कॉलेज अपने स्तर पर कोई परीक्षा नहीं करवा सकते। स्टेट कोटे के साथ मैनेजमेंट कोटे में एडमिशन के लिए प्री टेस्ट शासन करवाएगा। परीक्षा की जिम्मेदारी व्यावसायिक परीक्षा मंडल को दी गई है। नर्सिंग के लिए मंडल की परीक्षा में शामिल होकर क्वालीफाई करना अनिवार्य होगा। परीक्षा में शामिल नहीं होने वाले अभ्यर्थियों को एडमिशन देने पर उसे रद्द कर दिया जाएगा।

लेनदेन व दबाव में एडमिशन दिया

सरकारी व निजी नर्सिंग कॉलेजों में एडमिशन की अंतिम तारीख गुजरने के बाद एडमिशन देने के मामले में बड़े पैमाने पर लेन-देन का खुलासा हुआ था। बाद में एडमिशन लिए छात्राओं ने अपने बयान में अधिकारियों के सामने लेनदेन की पुष्टि की थी। सरकारी नर्सिंग कॉलेजों के प्राचार्यों ने भी अपने बयान में कहा था कि काउंसिलिंग अधिकारियों के दबाव के बाद छात्राओं को एडमिशन दिया गया था।

2016 में घोटाला फूटने के बाद बदली प्रक्रिया अब भी रहेगी जारी

तत्कालीन डीएमई की भूमिका भी संदिग्ध

तीन साल पहले नर्सिंग एडमिशन घोटाले की जांच मंत्रालय स्तर के अधिकारियों से करवाया गया। इसमें नर्सिंग प्रभारी रहे अधिकारियों ने तत्कालीन डीएमई डॉ. एके चंद्राकर के मौखिक आदेश के बाद काउंसिलिंग के लिए वेब पोर्टल खोलने की बात कही थी। इसके बाद शासन ने तत्कालीन डीएमई को नोटिस भेजकर जवाब भी मांगा था। शासन ने जांच के दौरान डीएमई कार्यालय को अलग रखा था। मामले में संविदा में सेवाएं दे रही सबीना बेन की सेवाएं खत्म कर दी गई थी। यही नहीं अंबेडकर अस्पताल के हड्‌डी रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. विनीत जैन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। जबकि तब स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचअिव सुब्रत साहू ने जैन के खिलाफ जांच की बात कही थी। मामले में नर्सिंग कॉलेज के प्राचार्यों के खिलाफ भी कार्रवाई भी होनी थी, लेकिन नहीं हुई।

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