ब्लड डोनेट कर आशीष 34 और गौतम बचा चुके हैं 13 जिंदगियां पहले सुई से लगता था डर, अब दूसरों को भी कर रहे हैं प्रेरित

Raipur News - आज वर्ल्ड ब्लड डोनर डे है। बहुत कम लोग ये बात जानते हैं कि दुनिया में हर दो सेकेंड में एक व्यक्ति को ब्लड की जरूरत...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 07:35 AM IST
Raipur News - chhattisgarh news blood donate tax ashish 34 and gautam have saved 13 lives before the needle seemed afraid now others are also motivated
आज वर्ल्ड ब्लड डोनर डे है। बहुत कम लोग ये बात जानते हैं कि दुनिया में हर दो सेकेंड में एक व्यक्ति को ब्लड की जरूरत पड़ती है। इस जरूरत को पूरा करने और दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए शहर में ऐसे भी लोग हैं जो ब्लड डोनर्स ग्रुप से जुड़कर बिना स्वार्थ लोगों की मदद कर रहे हैं। इमरजेंसी के वक्त एक कॉल पर हॉस्पिटल पहुंचने वाले इन सुपर हीरो की कहानी भी राेचक है। किसी ने अपनी फैमिली मेंबर्स से छिपकर पेशेंट को नया जीवन दिया तो कोई अब तक दर्जनों बार ब्लड डोनेट कर चुका है। शहर में बने ब्लड डोनर्स ग्रुप जरूरत पड़ने पर लोगों को ब्लड अवेलेबल कराने के साथ ही ब्लड डोनेशन के लिए अवेयर भी कर रहे हैं। पढ़िए ऐसे ब्लड डोनर्स की कहानी, जो दूसरों के लिए नजीर पेश कर रहे हैं।

वर्ल्ड ब्लड डोनर डे आज- पढ़िए ऐसे ब्लड डोनर्स की कहानी जो दूसरों को दे रहे हैं नया जीवन

डर पर काबू पाकर शुरू किया ब्लड डोनेशन, अपनी कहानी से करते हैं प्रेरित

एम. आशीष कुमार को ब्लड डोनेट करने की प्रेरणा पिता वासुदेव से मिली। बचपन से उन्हें जरूरतमंदों की मदद करते देखकर आशीष भी ब्लड डोनेट तो करना चाहते थे लेकिन सुई का डर उन्हें हर बार ये करने से रोक देता था। उन्होंने बताया- जब भी ब्लड डोनेशन कैंप लगता तो मैं तुरंत वहां पहुंच जाता था। लेकिन सुई के डर के कारण लौट आता। ऐसा कई बार हुआ। एक दिन घर से ये ठानकर निकला कि आज ब्लड डोनेट जरूर करूंगा। इसके बाद मन से सुई का डर निकल गया। अब तक 34 बार ब्लड डोनेट कर चुका हूं। इसके अलावा उन लोगों को ब्लड डोनेशन के लिए अवेयर करता हूं, जो मेरी तरह सुई से डरते हैं। उन्हें ये भी बताता हूं कि ब्लड डोनेट करने से किसी तरह की शारीरिक कमजोरी नहीं होती है।

ए निगेटिव है गौतम का ब्लड ग्रुप, पैरेंट्स के मना करने के बावजूद छिपकर किया डोनेशन

गौतम रावत अब तक 13 बार ब्लड डोनेट कर चुके हैं। इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे गौतम का ब्लड ग्रुप ए निगेटिव है, जो काफी रेयर ग्रुप माना जाता है। गौतम ने जब ब्लड डोनेट करने की बात कही तो रेयर ब्लड ग्रुप होने की वजह से फैमिली वालों ने उन्हें ब्लड डोनेट करने से मना कर दिया। जब समझाने के बाद भी फैमिली मेंबर्स नहीं माने तो गौतम ने परिवार से छिपकर ब्लड डोनेट करना शुरू कर दिया। उन्हांेने बताया- कॉलेज में फर्स्ट ईयर के दौरान बिना किसी को बताए एक दोस्त को पहली बार ब्लड डोनेट किया था। इसके बाद ये सिलसिला चल पड़ा। फिर चाहे ब्लड पहचान वाले को देना हो या किसी अंजान व्यक्ति को, जरूरत पर मैं पहुंच जाता हूं। जब पहली बार फैमिली में इस बारे में बताया तो वे नाराज हुए लेकिन मुझे पूरी तरह सही सलामत देखने के बाद बाद उन्होंने फिर कभी ब्लड डोनेट करने से नहीं रोका। डेंगू के एक पेशेंट को अपना ब्लड डोनेट कर उसकी जान बचाना मेरे लिए सबसे सुकूनभरा पल था।

जानिए क्यों मनाते हैं ये खास दिन

डिफरेंट ब्लड ग्रुप की पहचान करने वाले आॅस्ट्रेलिया के कार्ल लेंडस्टाइनर के बर्थडे 14 जून को ब्लड डोनर डे मनाते हैं। उन्हें 1930 में नोबल अवॉर्ड मिला था। ब्लड डोनेशन के लिए लोगों को अवेयर करने की जरूरत को देखते हुए वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने ये शुरुआत की थी।

नहीं आती कोई शारीरिक कमजोरी

कई लोगों का मानना है कि रक्तदान करने के बाद सुई का दर्द लंबे समय तक रहता है, लेकिन डॉक्टर्स का कहना है कि दर्द कुछ देर में खत्म हो जाता है। ब्लड डोनेट करने से किसी तरह की शारीरिक कमजोरी भी नहीं आती।

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