गरियाबंद व सूरजपुर प्रदेश में एेसे जिले जहां एक भी पुरुष ने नहीं कराई नसबंदी

Raipur News - प्रदेश के गरियाबंद व सूरजपुर जिले में पिछले वर्ष किसी भी पुरुष ने नसबंदी नहीं कराई। यह चौंकाने वाली रिपोर्ट...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:25 AM IST
Raipur News - chhattisgarh news districts in suratgarh and surajpur where no single man has not sterilized
प्रदेश के गरियाबंद व सूरजपुर जिले में पिछले वर्ष किसी भी पुरुष ने नसबंदी नहीं कराई। यह चौंकाने वाली रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग की है। वहीं कोंडागांव व कांकेर पुरूष नसबंदी के मामले में टॉप पर है। रायपुर जैसे शहरी जिले में भी अच्छी स्थिति है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पहले की तुलना में कुछ जागरुकता तो आई है, लेकिन पुरुष अभी भी नसबंदी के लिए आसानी से तैयार नहीं होते। महिलाएं इसमें अभी भी आगे है। सालभर में 61119 महिलाओं की तुलना में केवल 5371 पुरूषों ने नसबंदी कराई है। यह महिलाओं की तुलना में 11 फीसदी ही है। 11 जुलाई से प्रदेश में जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा मनाया जा रहा है। इसमें स्वास्थ्य विभाग महिला व पुरुषों को छोटे परिवार के महत्व को बताते हुए नसबंदी पर भी फोकस किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि नसबंदी के मामले में महिलाओं के रिकार्ड को तोड़ा नहीं जा सकता। जहां एक भी पुरूष ने नसबंदी नहीं कराई है, उनमें गरियाबंद में दो लाख 95 हजार 851 तथा सूरजपुर में तीन लाख 98 हजार 381 पुरुष हैं। इन्हीं जिलों नसबंदी कराने वाली महिलाओं की संख्या क्रमश: 55 व 2012 है। यानी गरियाबंद में नसबंदी कराने वाली महिलाओं की संख्या भी सबसे कम है। इसके बाद नारायणपुर का नंबर आता है। वहां 2018-19 में केवल 77 महिलाओं ने नसबंदी कराई। पुरूषों में नसबंदी कराने में पहले स्थान पर कोंडागांव जिला है, जहां 764 लोगों ने नसबंदी कराई। वहीं कांकेर दूसरे नंबर पर है। वहां 631 लोगों ने नसबंदी कराई।

रायपुर में घनी आबादी के कारण 9720 महिलाओं ने नसबंदी कराई

हम दो हमारे दो का स्लाेगन फेल

हम दो हमारे दो, छोटा परिवार सुखी परिवार को स्लोगन फेल हो गया है। दरअसल प्रदेश में नसबंदी कराने वालों में ऐसे लोगों की संख्या ज्यादा है, जिनके तीन या चार बच्चे हों। एक या दो बच्चे वाले परिवार गिनती के हैं। परिवार कल्याण से जुड़े अधिकारियों के अनुसार लोगों को जागरूक किया जा रहा है। इसमें कुछ बदलाव हो रहा है। इसके नतीजे आने वाले दिनों में आएंगे।

अंतरा से ज्यादा छाया पर भरोसा महिलाओं का

परिवार नियोजन के लिए महिलाएं अंतरा के बजाय छाया पर ज्यादाभरोसा कर रही हैं। बच्चे पैदा होने के बीच पर्याप्त गैप हो, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग महिलाओं को अंतरा नामक इंजेक्शन लगा रहा है। पिछले साल 9129 महिलाओं ने अंतरा इंजेक्शन का इस्तेमाल किया। जबकि छाया टेबलेट का उपयोग करने वाली महिलाओं की संख्या 33291 है। एक या दो बच्चों के बाद जन्म में अंतर रखने के लिए महिला को तीन माह में एक इंजेक्शन लगाया जाता है।

पुरुष नसबंदी में पीछे क्यों?

डॉक्टरों के अनुसार जागरूकता में कमी व नसबंदी को लेकर कई गलतफहमियों के कारण पुरूष नसबंदी में पीछे हैं। डॉक्टरों के अनुसार पुरुषों की नसबंदी बहुत आसान है। केवल एक चीरा लगाने की जरूरत होती है। इसमें पांच से 10 मिनट लगते हैं। महिलाओं की नसबंदी कठिन होती है, क्याेंकि सर्जरी के कुछ साल बाद कमर दर्द की शिकायत रहती है।


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