ट्रेड वॉर के कारण मांग घटने का अंदेशा, इसलिए रिजर्व बैंक ने विकास दर का अनुमान 0.2% घटाया

Raipur News - रिजर्व बैंक ने वैश्विक मांग में सुस्ती के कारण जीडीपी ग्रोथ का अनुमान घटा दिया है। दिसंबर में इसने मौजूदा वित्त...

Bhaskar News Network

Feb 08, 2019, 02:46 AM IST
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रिजर्व बैंक ने वैश्विक मांग में सुस्ती के कारण जीडीपी ग्रोथ का अनुमान घटा दिया है। दिसंबर में इसने मौजूदा वित्त वर्ष में 7.4% ग्रोथ का अनुमान लगाया था, अब इसका अनुमान 7.2% का है। 2019-20 की पहली छमाही के लिए भी विकास के अनुमान को 7.5% से घटाकर 7.2-7.4% किया गया है। पूरे 2019-20 में 7.4% ग्रोथ का अनुमान है। गौरतलब है कि केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने भी इस वर्ष विकास दर 7.2% रहने की बात कही है। अप्रैल-जून 2018 में ग्रोथ रेट 8.2% और जुलाई-सितंबर में 7.1% रही थी।

केंद्रीय बैंक ने कहा कि ग्रोथ काफी हद तक बैंक कर्ज और इंडस्ट्री को नकदी की उपलब्धता पर निर्भर करेगी। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और रुपए में हालिया गिरावट के बावजूद वैश्विक मांग में सुस्ती संकट पैदा कर सकती है। ट्रेड वॉर और उससे जुड़ी अनिश्चितता के कारण वैश्विक विकास की रफ्तार भी धीमी है। गौरतलब है कि आईएमएफ ने 2019 के लिए ग्रोथ का अनुमान 0.2% घटाकर 3.5% कर दिया है। तीन दिन चली बैठक के बाद मौद्रिक नीति समिति ने एक बयान में कहा कि इकोनॉमी में निवेश बढ़ रहा है, लेकिन अब भी ज्यादा निवेश सरकार ही इन्फ्रास्ट्रक्चर में कर रही है। निजी निवेश और खपत, दोनों बढ़ाने की जरूरत है।

एचडीएफसी बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री अभीक बरुआ ने कहा, ग्रोथ एक बार फिर आरबीआई के एजेंडे में ऊपर आ गया है। समीक्षा में घाटा और महंगाई की चिंता को कमतर किया गया है। रिजर्व बैंक के अनुमान को देखते हुए कहा जा सकता है कि आगे भी रेपो रेट में कटौती की गुंजाइश है। आरबीएल बैंक की अर्थशास्त्री रजनी ठाकुर के मुताबिक आरबीआई ने फाइनेंशियल मार्केट में नकदी की स्थिति को देखते हुए यह कदम उठाया है। नोमुरा इंडिया के इकोनॉमिस्ट ऑरोदीप नंदी ने कहा कि हमें आने वाले दिनों में रेट कट की उम्मीद थी, इसलिए अभी रिजर्व बैंक का फैसला चौंकाने वाला है।

डिविडेंड मांगना और उसे खर्च करना सरकार का अधिकार है: आरबीआई गवर्नर

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में।

गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि आरबीआई से अंतरिम डिविडेंड मांगना सरकार का अधिकार है। इस रकम का इस्तेमाल कहां किया जाता है, यह सरकार पर निर्भर करता है। सरकार आरबीआई से 28,000 करोड़ रुपए अंतरिम डिविडेंड चाहती है। आरबीआई बोर्ड 18 फरवरी को इस पर चर्चा करेगा। अंतरिम बजट में छोटे किसानों को इसी वर्ष 20,000 करोड़ रुपए देने की घोषणा की गई है। आरबीआई गवर्नर ने यह भी कहा कि किसी भी सेक्टर में नकदी की कमी नहीं होने दी जाएगी। डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने बताया कि इस वर्ष में केंद्रीय बैंक 2.36 लाख करोड़ की नकदी सिस्टम में डाल चुका है। फरवरी में 37,500 करोड़ रुपए और डालने की योजना है।

महंगाई: रिजर्व बैंक के अनुसार खाने-पीने की चीजों और ईंधन की महंगाई उम्मीद से कम

जनवरी से मार्च 2019 के दौरान खुदरा महंगाई 2.8% रहने का अनुमान

रिजर्व बैंक ने महंगाई का अनुमान घटाया है। इसका कहना है कि जनवरी से मार्च 2019 के दौरान खुदरा महंगाई दर 2.8% रहेगी। नए वित्त वर्ष 2019-20 की पहली छमाही यानी अप्रैल-सितंबर के दौरान इसने 3.2-3.4% महंगाई का अनुमान जताया है। अक्टूबर-दिसंबर के लिए 3.9% का अनुमान है। गौरतलब है कि दिसंबर 2018 में खुदरा महंगाई डेढ़ साल में सबसे कम 2.19% पर थी। आरबीआई का कहना है कि खाद्य महंगाई आश्चर्यजनक रूप से कम रही है। ईंधन की महंगाई भी उम्मीद से कम रही है।

सहकारी बैंकों को मजबूत बनाने के लिए केंद्रीय संगठन बनेगा

शहरी सहकारी बैंकों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए रिजर्व बैंक एक केंद्रीय संगठन बनाएगा। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने बैठक के बाद एक बयान में कहा कि शहरी सहकारी बैंक अपने ढांचे, आकार, पूंजी जुटाने के कम अवसर और सीमित जगह में संचालन के कारण असुरक्षित होते हैं। इनके लिए केंद्रीय संगठन का प्रचलन कई देशों में है। यह संगठन इनमें नकदी बढ़ाने के साथ उन्हें पूंजी में भी मदद करता है। संगठन आईटी का ढांचा भी तैयार करेगा ताकि बैंक अपनी सेवाओं का दायरा बढ़ा सकें। यह फंड मैनेजमेंट और परामर्श सेवाएं भी दे सकता है।

विदेश से कर्ज लेकर दिवालिया कंपनी खरीदने की इजाजत

दिवालिया कार्रवाई में भाग लेने वाले किसी कंपनी को खरीदने के लिए विदेश से कर्ज ले सकते हैं। आरबीआई ने गुरुवार को इसकी इजाजत देने का फैसला किया। विदेशी कर्ज भारतीय बैंकों की तुलना में सस्ता पड़ता है। आरबीआई ने कहा कि इस बारे में पूरे दिशानिर्देश फरवरी के अंत तक जारी किए जाएंगे।

बैंक प्रमुखों को अप्रैल में फिर रेपो रेट घटने की उम्मीद

बैंकरों को लगता है कि आरबीआई आगे ब्याज दरों में और कटौती कर सकता है। एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि खुदरा महंगाई लगातार रिजर्व बैंक के लक्ष्य से कम है। इसलिए आगे रेपो रेट में कटौती की पूरी संभावना है। उन्होंने कहा कि पॉलिसी में रेट के अलावा कई नई घोषणाएं की गई हैं। इससे फाइनेंशियल मार्केट को काफी लाभ होगा। आईसीआईसीआई बैंक के अर्थशास्त्री बी. प्रसन्ना के अनुसार अप्रैल में ही दरें घट सकती हैं।

अभी खुदरा मंहगाई 18 माह के निचले स्तर पर

4.17%

3.69%

जुलाई

(जून 2017 में खुदरा महंगाई 1.46% रही थी।)

3.70%

अगस्त

सितंबर

कर्ज को एनपीए मानने वाले नियम में बदलाव से इनकार

रिजर्व बैंक ने कर्ज की किस्त चुकाने में एक दिन की देरी होने पर उसे एनपीए मानने वाले नियम को वापस लेने की संभावना से इनकार कर दिया। केंद्रीय बैंक ने 12 फरवरी 2018 को इस संबंध में सर्कुलर जारी किया था। आरबीआई गवर्नर ने कहा कि फिलहाल इस सर्कुलर को बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

3.38%

2.33%

अक्टूबर

जून और अगस्त में ब्याज दर बढ़ी थी

तारीख रेपो रेट

8 जून 2017
6.25%

2 अगस्त 2017 6.00%

6 जून 2018 6.25%

1 अगस्त 2018 6.50%

7 फरवरी 2018 6.25%

पहले इसने 2018-19 में 7.4% ग्रोथ का अनुमान जताया था, अब इसे घटाकर 7.2% कर दिया

2.19%

नवंबर

दिसंबर

रियल्टी इंडस्ट्री को सस्ते कर्ज से बिक्री बढ़ने की उम्मीद

रेपो रेट में कटौती पर इंडस्ट्री ने खुशी जताई है। रियल्टी कंपनियों का कहना है कि इस चौंकाने वाले फैसले से उद्योग को तेजी मिलेगी। कंसल्टेंसी फर्म नाइट फ्रैंक के सीएमडी शिशिर बैजल ने कहा कि बैंक रेट कट का फायदा ग्राहकों को देंगे तो लोगों के लिए घर खरीदना सस्ता होगा। रियल्टी कंपनियों के संगठन नारेडको के प्रेसिडेंट निरंजन हीरानंदानी के अनुसार इस फैसले से नकदी तो बढ़ेगी ही, इकोनॉमी में निवेश भी बढ़ेगा। जेएलएल इंडिया के सीईओ रमेश नायर के अनुसार वास्तविक खरीदार इस समय घर लेने के मूड में हैं। इस फैसले से उन्हें मदद मिलेगी।

उद्योग चैंबर सीआईआई के प्रेसिडंड राकेश भारती मित्तल ने कहा कि रिजर्व बैंक के इस फैसले से बिजनेस का सेंटिमेंट बढ़ाने में मदद मिलेगी। कर्ज सस्ता होने से खपत और निवेश दोनों बढ़ाने में मदद मिलेगी। उद्योग चैंबर एसोचैम ने कर्ज में डूबी बड़ी कंपनियों के लिए भी रिजर्व बैंक से राहत की मांग की है। चैंबर के प्रेसिडेंट बालकृष्ण गोयनका ने कहा कि बैंकों को 1,000 करोड़ या इससे ज्यादा के कर्ज की एक बार रिस्ट्रक्चरिंग की इजाजत मिलनी चाहिए।

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