कंफर्ट जोन से बाहर निकलें, क्योंकि बड़ा करना है तो रिस्क लेना ही पड़ेगा

Raipur News - आंत्रप्रेन्योर आॅर्गनाइजेशन की ओर से शनिवार को हाेटल हयात में ‘नो गट्स नो ग्लोरी विथ डॉ. ए. वेलुमणि’ टॉक प्रोग्राम...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:35 AM IST
Raipur News - chhattisgarh news exit the conflict zone because if you want to grow then you have to take risk
आंत्रप्रेन्योर आॅर्गनाइजेशन की ओर से शनिवार को हाेटल हयात में ‘नो गट्स नो ग्लोरी विथ डॉ. ए. वेलुमणि’ टॉक प्रोग्राम रखा गया। यहां साइंटिस्ट, आंत्रप्रेन्योर और मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. ए. वेलुमणि ने यंग आंत्रप्रेन्योर्स को सक्सेस टिप्स दिए। उन्होंने ‘फोकस, लर्न, ग्रो एंड एंजॉय’ से सफलता का मंत्र बताया। उन्होंने कहा- अपने काम में हमेशा फोकस्ड रहें। छोटी-छोटी चीजों से सीखना बंद न करें, खुद को बढ़ाएं और सक्सेस को एंजॉय करें। उन्होंने कहा कि कम्फर्ट जोन से बाहर निकलें क्योंकि बड़ा करना है तो रिस्क लेना ही पड़ेगा। इस दौरान डॉ. वेलुमणि ने अपने अनुभव और गांव से मुंबई तक पहुंचने की जर्नी शेयर की। उन्होंने कहा- गांव ही रियल यूनिवर्सिटी हैं, क्योंकि वहां जीवन व्यावहारिक है। वेलुमनी ने गरीबी और अमीरी में फर्क बताते हुए कहा- जब आपके पास पैसा होता है, तो आपको इसे खोने का डर रहता है। जो फटा हुआ पहनता है वो दरिद्र है और जो कपड़े को फाड़कर पहनता है वो आज धनवान है।

वीटी स्टेशन पर काटी तीन रातें: अपने गांव से मुंबई जाने की जर्नी शेयर करते हुए कहा- एक दिन मुझे घर छोड़ना पड़ा। तब मैं खूब रोया। मुंबई पहुंचा तो जोखिम और अनिश्चितताएं मनोबल गिरा रही थीं। जब गांव से निकल रहा था तो पड़ोसी ने कहा- मुंबई जा रहे हो। बालासाहेब ठाकरे आपको मारेंगे। मैंने उनसे पूछा कि उन्हें कैसे पता कि मैं मुंबई आ रहा हूं। वहां कोई मदद नहीं मिली। वीटी स्टेशन पर तीन रातें काटनी पड़ी।

प|ी को बिना बताए छोड़ दी थी जॉब: भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर से अपने करियर की शुरुआत करने वाले डॉ. वेलुमणि ने बताया- यदि आप वह करते हैं जो आपने अध्ययन किया है, तो आप जीवित रहेंगे। अगर आपने वह अध्ययन किया है जो आप करते हैं, तो आप बेहतर करेंगे। मेरी प|ी एक बैंक अधिकारी थी। मेरे दो बच्चे हैं और तब मेरी उम्र 37 थी। हमारे पास सरकारी नौकरी और परिवार था। यह एक आरामदायक क्षेत्र है, है ना? लेकिन कम्फर्ट जोन खतरनाक जोन हैं। इसलिए मैंने खुद से पूछा क्या मैं यहां जीने के लिए आया हूं या जीतने के लिए? मैंने अपनी प|ी को बताए बिना ही जॉब से रिजाइन दे दिया था। रात में प|ी को बताया तो रात 2 बजे बोलीं- कल से काम में जाना है नहीं तो मैं भी नहीं जाऊंगी। फिर हमनेे साथ में जॉब छोड़ दी। इस मौके पर प्रेसीडेंट अरुण अग्रवाल, प्रशांत धाड़ीवाल, राहुल जैन, नेहा, संदीप गोयल, अमित अग्रवाल सहित अन्य मौजूद रहे।

प्रोग्राम में बातचीत करते डॉ. वेलुमणि

डॉ. वेलुमणि के बिजनेस पंच


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