हमन 36: 20 में से 8 बच्चों ने मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में पाई सफलता फिर भी बंद कर रहे योजना

Raipur News - अधिकारियों के अनुसार 2017-18 में चयनित 20 में से 11 मैथ्स और 9 बायो के विद्यार्थियों को निजी संस्थान द्वारा तैयारी कराई गई...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:30 AM IST
Raipur News - chhattisgarh news haman 36 20 out of 20 children are still struggling in the medical and engineering entrance examination
अधिकारियों के अनुसार 2017-18 में चयनित 20 में से 11 मैथ्स और 9 बायो के विद्यार्थियों को निजी संस्थान द्वारा तैयारी कराई गई थी। जिसमें मैथ्स के 11 में से 2 बच्चों का एनआईटी में जबकि दो बच्चों का शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश हो सका। वहीं, बायो ग्रुप के 9 में से 2 बच्चे मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के लिए दूसरी काउंसलिंग का इंतजार कर रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक इन दोनों बच्चों काे प्रदेश के किसी न किसी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश मिलना तय है। इसके बावजूद रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की तरफ से अब तक नए सत्र के लिए कोई रूपरेखा नहीं बनाई गई है। वहीं, डीईओ कार्यालय के अफसरों के अनुसार इस योजना से संबंधित कुछ दस्तावेज मौजूद नहीं है। ऐसे में इस सत्र इस योजना के तहत गरीब बच्चों काे लाभ मिलता नहीं दिखाई दे रहा है।


बीते दो सत्र से जिले में चलाई जा रही हमन 36 की योजना में 12वीं उत्तीर्ण हुए 20 में से 8 विद्यार्थियों के उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश पाने के बावजूद इस सत्र यह योजना खटाई में जाती दिखाई दे रही है। हालात ऐसे हैं कि इसके लिए इस सत्र कोई तैयारी ही नहीं की गई है।

DB star concern

फैक्ट फाइल

20

बच्चों का हुआ था चयन

11

मैथ्स और 9 बायो समूह से

02

एनआईटी और 4 का जीईसी में चयन

02

को मेडिकल की सीट मिलना तय

टेस्ट से किया गया योजना के लिए बच्चों का चयन

इसके लिए राजधानी के सरकारी स्कूलों में टेस्ट का आयोजन किया गया था, जिसके तहत 36 बच्चों के चयन का लक्ष्य रखा गया था। जबकि टेस्ट के बाद सिर्फ 20 बच्चों का ही चयन हो सका था। वहीं, अनुबंधित निजी एजेंसी को इसके लिए प्रतिवर्ष 18 लाख रुपए देना तय किया गया था। जबकि अधिकारी महज 11-12 लाख ही जुटा पाए थे। इसके बावजूद संस्थान ने वर्षभर कार्य किया था।

इस सत्र में विभाग द्वारा नहीं करवाई गई चयन परीक्षा

इस योजना के तहत पहले वर्ष में ग्यारहवीं कक्षा के बच्चों का चयन किया गया, जिन्हें 11वीं और 12वीं की पढ़ाई के दौरान प्रतियाेगी परीक्षाओं के अनुरूप तैयार किया गया। साथ ही इसके अगले वर्ष इस योजना के तहत किसी भी स्कूल में न तो टेस्ट का आयोजन किया गया और न ही बच्चों का चयन किया गया। वहीं, अनुबंधित संस्थान द्वारा प्रशासन से एप्रोच भी नहीं किया गया। ऐसे में गरीब परिवार के बच्चों की सफलता के बावजूद इस सत्र यह योजना बंद होती दिखाई दे रही है।

जीआर चंद्राकर, जिला शिक्षा अधिकारी, रायपुर

जनसहयोग से राशि नहीं मिली इसलिए संचालन पर संशय है


इसके लिए जनसहयोग से राशि भी नहीं मिल रही है और इंस्टीट्यूट ने हमसे संपर्क भी नहीं किया है। ऐसे में इसे चलाने में संशय है।


दो वर्ष पूर्व इसके तहत 11वीं के बच्चों का चयन किया गया और 12वीं तक पढ़ाई कराई गई। इसके अगले वर्ष किसी प्रकार का टेस्ट या चयन नहीं किया गया।


नहीं, कोई खास अच्छा परफॉर्मेंस नहीं रहा था।

जनसहयोग से हुआ था काम


सीधी बात

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