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मेडिसिन में 5 डाॅक्टर कम, किसी ने नाैकरी छाेड़ी ताे कुछ छुट्टी पर

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 07:25 AM IST

Raipur News - अंबेडकर अस्पताल के मेडिसिन विभाग में पांच असिस्टेंट प्रोफेसर कम हो गए हैं। एक असिस्टेंट प्रोफेसर ने नौकरी छोड़ दी...

Raipur News - chhattisgarh news in medicine less than 5 doctors someone cheated the nurse on some leave
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अंबेडकर अस्पताल के मेडिसिन विभाग में पांच असिस्टेंट प्रोफेसर कम हो गए हैं। एक असिस्टेंट प्रोफेसर ने नौकरी छोड़ दी है तो एक अन्य महिला डॉक्टर जिला अस्पताल में पोस्टिंग करा ली है। इसके कारण अब ओपीडी प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व जूडो को संभालना पड़ रहा है। अभी ग्रीष्मकालीन अवकाश भी चालू नहीं हुआ है। मई व जून में मरीजों का इलाज और प्रभावित हो सकता है।

मेडिसिन अस्पताल का सबसे बड़ा विभाग है। यहां ओपीडी में प्रतिदिन 400 से 500 मरीजों का इलाज होता है। वहीं इस विभाग के चार वार्ड है। यही नहीं आईसीयू में इस विभाग से संबंधित मरीजों का इलाज होता है। असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अनुरीता सिंह ने अपनी पोस्टिंग जिला अस्पताल में करवा ली है। वे आईएएस की प|ी हैं। उन्होंने तीन साल पहले पीजी की थी। डॉ. स्वर्णा जैन ने नौकरी छोड़ दी है। वहीं डॉ. प्राची दुबे प्रोबेशन पीरियड में है। इसके बावजूद चार माह की छुट्‌टी पर चली गई हैं। उन्होंने ने लीव विदाउट पे के लिए आवेदन किया है।



डॉ. मनीष पाटिल एक महीने से मेडिकल लीव पर चल रहे हैं। विभाग में 11 असिस्टेंट प्रोफेसर का पद है, लेकिन वर्तमान में केवल डॉ. मनीषा खांडे व डॉ. पीएस शर्मा काम कर रहे हैं। इससे पूरा दबाव एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसरों पर आ गया है। विभाग में छह एसोसिएट प्रोफेसर व दो प्रोफेसर हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इनमें एक एसोसिएट प्रोफेसर भी छुट्‌टी पर चल रहे हैं। कुछ डॉक्टरों ने एचओडी को जरूरी काम होने के बाद भी छुट्‌टी नहीं मिलने की शिकायत की है। दरअसल एचओडी स्टाफ कम होने का हवाला देकर ऐसा कर रहे हैं। मेडिसिन विभाग में दो कमरों मंे जूडो बैठते हैं। इसके अलावा पांच कमरों मंे कंसल्टेंट डॉक्टर ओपीडी में इलाज करते हैं। सर्दी, खांसी से लेकर मेडिकल संबंधी इलाज मेडिसिन विभाग में होता है। दो महिला व दो पुरुष वार्ड हैं। यहां वर्तमान में 200 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं। पहले इस विभाग में एचआईवी, हार्ट, टीबी व किडनी के मरीज भी भर्ती रहते थे। अब इनके मरीजों के लिए अलग वार्ड हो गया है। किडनी विभाग डीकेएस में चला गया है।

कार्डियोलॉजी विभाग 15 दिनों

तक सीनयर रेसीडेंट के भरोसे

हाल ही में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. पार्थ स्थापक को नियमित ड्यूटी नहीं आने के कारण उनकी सेवाएं खत्म कर दी गई हैं। वे संविदा में थे। इसके पहले विभाग के एचओडी 15 दिनाें की छुट्‌टी पर विदेश यात्रा पर थे। उनकी अनुपस्थिति में एंजियोप्लास्टी व एंजियोग्राफी समेत हार्ट का इलाज पूरी तरह प्रभावित रहा। ओपीडी में एक सीनियर रेसीडेंट डॉक्टर थे। कंसल्टेंट डॉक्टर से छुट्‌टी से लौटने के बाद अब विभाग फिर पटरी पर आ गया है। कुछ डॉक्टरों ने डॉक्टर नहीं होने के बाद भी लंबी छुट्‌टी देने पर सवाल उठाए हैं।

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