गर्मी में आंगनबाड़ी में 5 से 10 बच्चे ही, फिर भी 50 के लिए दूध की सप्लाई

Raipur News - राजधानी में चल रहे 300 से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्मी के कारण पांच से दस बच्चे ही आ रहे हैं, लेकिन 50 बच्चों के...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 07:25 AM IST
Raipur News - chhattisgarh news in summer 5 to 10 children in anganwadi yet supply of milk for 50
राजधानी में चल रहे 300 से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्मी के कारण पांच से दस बच्चे ही आ रहे हैं, लेकिन 50 बच्चों के हिसाब से दूध की सप्लाई की जा रही है। सप्ताह में एक दिन बुधवार को बच्चों को 100 मिली लीटर दूध देने का प्रावधान भी है। जब बच्चे आ ही नहीं रहे हैं तो इतनी ज्यादा मात्रा में दूध की सप्लाई आखिर किसके लिए की जा रही है? आंगनबाड़ी केंद्रों में भोजन व्यवस्था का जिम्मा स्व-सहायता समूह के जरिए किया जाता है। हर महीने इसके बिल लगाकर शासन की ओर से स्व-सहायता समूह या इस काम की जिम्मेदारी संभाल रही संस्थाओं को पैसा दिया जाता है। भास्कर पड़ताल में पता चला है कि शहर के हर आंगनबाड़ी केंद्र में औसतन दो बच्चे गंभीर कुपोषित श्रेणी में हैं। इन्हें इस केटेगरी से बाहर निकालने के लिए रेडी टू ईट फूड दिया जाता है। इसमें पोषक तत्वों की अतिरिक्त खुराक बच्चों को दी जाती है। कुपोषित बच्चों की मॉनिटरिंग का प्रावधान भी है। हालांकि गर्मी के कारण गंभीर कुपोषित बच्चे भी आंगनबाड़ी केंद्रों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।

कमरे का मुआयना और भौतिक आकलन का दावा : विभाग का दावा है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में सतत रूप से सुपरवाइजर जाकर केंद्र की मॉनिटरिंग करते हैं। जिला टीम के अधिकारी औचक निरीक्षण भी करते हैं। इसमें भवनों के भौतिक सत्यापन व उससे जुड़े खतरे आदि की सतत पड़ताल का दावा भी किया जाता है, लेकिन जमीनी स्थिति इसके उलट है। अगर निरीक्षण हो रहा है तो जर्जर कमरों में आंगनवाड़ी केंद्र कैसे चलाए जा रहे हैं।

जिले में इतने बच्चों को दिया जा रहा भोजन

पिछले वित्तीय वर्ष में 3-6 साल के बच्चों में कुपोषण

सामान्य गंभीर

58,809 989

(इस साल मार्च की स्थिति)

74,637 598

(मार्च की स्थिति में)

शिशुवती मां गर्भवती महिलाएं

13,068 10, 434

खाने पर ऐसे खर्च हो रहे करोड़ों रुपए

20-22

करोड़ सालाना

14.58

करोड़ इस वित्तीय वर्ष में पहली किश्त अप्रैल में मिली

05

करोड़ पिछले साल के बजट के अभी नहीं मिले हैं

एक सुपरवाइजर के जिम्मे 20 से ज्यादा स्कूल

रायपुर को विभाग ने अपनी सुविधा से दो सेक्टरों में बांटा है। इसमें सेक्टर वन में 116 और सेक्टर टू में 200 आंगनवाड़ी केंद्र हैं। एक सुपरवाइजर 20 से ज्यादा केंद्रों का निरीक्षण करता है। चूंकि केंद्रों की संख्या ज्यादा होती है, इसलिए सुपरवाइजर अपनी सुविधा से दिनों का चयन कर लेता है। शहर में कई जगह सुपरवाइजर नियमित रूप से पहुंच भी नहीं पाते हैं। तो कई बार रजिस्टर घर में ही बुलवा लेते हैं।

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