एनजीजीबी नहीं... अफसरों को नरवा गरुवा घुरवा बारी ही कहना और लिखना होगा, आयोग सिखाएगा छत्तीसगढ़ी

Raipur News - मंत्रालय-संचालनालय के अधिकारियों-कर्मचारियों को अब एनजीजीबी नहीं, बल्कि नरवा गरुवा घुरवा और बारी ही लिखना और...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:30 AM IST
Raipur News - chhattisgarh news ngos do not officers should say narva garuwa ghurwa and say and write commission will teach chhattisgarh
मंत्रालय-संचालनालय के अधिकारियों-कर्मचारियों को अब एनजीजीबी नहीं, बल्कि नरवा गरुवा घुरवा और बारी ही लिखना और कहना होगा। इसके लिए राजभाषा आयोग के एक्सपर्ट नियमित रूप से छत्तीसगढ़ी बोलने और लिखने की ट्रेनिंग देंगे। कोई भी व्यक्ति छत्तीसगढ़ी में आवेदन करेगा तो कलेक्टोरेट, मंत्रालय या किसी भी स्तर के सरकारी दफ्तर से छत्तीसगढ़ी में ही जवाब भी दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग की ओर से सभी दफ्तरों में छत्तीसगढ़ी में ही आदेश व नोटशीट लिखने के लिए भी कोशिश की जाएगी। राज्य बनने के सात साल बाद छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा दिया गया, लेकिन आज भी यह सरकारी कामकाज की भाषा नहीं बन पाई है। यही वजह है कि राज्य सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट नरवा गरुवा घुरवा बारी के क्रियान्वयन की जब बात आई तो अधिकारी-कर्मचारी सही ढंग से ये नाम बोल भी नहीं पाते थे। इस योजना का नाम शॉर्ट फॉर्म में एनजीजीबी कर दिया गया है। राजभाषा आयोग की ओर से अब नियमित रूप से छत्तीसगढ़ी ट्रेनिंग सेशन शुरू करने की तैयारी है, जिससे नोटशीट से लेकर बोलचाल भी छत्तीसगढ़ी में हो। इस महीने 25 व 27 मई को महानदी भवन में छत्तीसगढ़ी की ट्रेनिंग का समय तय किया गया है।

दूसरे राज्यों में अनिवार्य

गैर हिंदी भाषी राज्यों में आईएएस और आईपीएस के लिए स्थानीय भाषा और बोली जानना अनिवार्य है। पड़ोसी राज्य ओडिशा में मुख्य सचिव से लेकर डीजीपी तक ओड़िया में ही लोगों से संवाद करते हैं। कामकाज की भाषा भी ओड़िया है। नए आईएएस-आईपीएस को ओड़िया की ट्रेनिंग दी जाती है। इसके विपरीत राजभाषा आयोग समेत अन्य संस्थाओं की मांग के बावजूद छत्तीसगढ़ी को महत्व नहीं दिया जा रहा। राज्य सेवा के अधिकारी भी लोगों से हिंदी में ही संवाद करते हैं।

अब नई सरकार से छत्तीसगढ़ी को आस

राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद अब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समेत मंत्री भी लोगों से छत्तीसगढ़ी में ही संवाद कर रहे हैं। यही वजह है कि अब कामकाज में भी छत्तीसगढ़ी को महत्व मिलने की उम्मीद है। राजभाषा आयोग के सचिव जेआर भगत का कहना है, वे सरकार से आग्रह करेंगे कि छत्तीसगढ़ी को ज्यादा से ज्यादा कामकाज में शामिल करें, जिससे दूसरे राज्यों की तरह यहां भी राजभाषा को महत्व मिले। इसके अलावा स्थानीय बोलियों को भी प्रमोट करने की पहल करेंगे।

प्रशासनिक शब्दकोश भी तैयार

प्रशासनिक कामकाज में छत्तीसगढ़ी को इस्तेमाल हो, इसलिए पहले ही प्रशासनिक शब्दकोष तैयार किया जा चुका है। इसमें विभागीय कामकाज के दौरान उपयोग में आने वाले हिंदी, अंग्रेजी के शब्दों को छत्तीसगढ़ी में किस तरह बोला और लिखा जाएगा, इसका संकलन किया गया है। प्रशासनिक शब्दावली होने से अफसरों और कर्मचारियों को नोटशीट और सरकारी दस्तावेज में छत्तीसगढ़ी का इस्तेमाल करने में कोई दिक्कत नहीं होगी।

डॉक्टरी और ड्राइविंग लाइसेंस में छत्तीसगढ़ी

ड्राइविंग लाइसेंस के लिए जो सवाल पूछे जाते हैं, उन्हें छत्तीसगढ़ी में पूछा जा सकता है। दिल्ली में हिंदी, इंग्लिश के साथ पंजाबी में सवाल पूछे जाते हैं। इधर, मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया के निर्देश के बाद डॉक्टरों को छत्तीसगढ़ी सिखाने की तैयारी है। इसमें उन्हें सिखाया जाएगा कि किस तरह की तकलीफ को क्या कहेंगे। इसका उद्देश्य डॉक्टर व मरीज के बीच बातचीत को आसान बनाना है, जिससे वे सही ढंग से समझकर उपचार कर सकें।

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