डीकेएस काे 64 करोड़ का लोन देने के मामले में पीएनबी का एजीएम दिल्ली में गिरफ्तार

Raipur News - रायपुर | डीकेएस सुपर स्पेशलिटी घोटाले में पुलिस ने गुरुवार को दिल्ली में छापा मारकर पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के...

Bhaskar News Network

May 17, 2019, 07:40 AM IST
Raipur News - chhattisgarh news pnb39s agm arrested in delhi for giving loan of 64 crores for dks
रायपुर | डीकेएस सुपर स्पेशलिटी घोटाले में पुलिस ने गुरुवार को दिल्ली में छापा मारकर पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के एजीएम सुनील अग्रवाल को गिरफ्तार कर िलया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने एजीएम को 30 हजारी स्थित कोर्ट में मेट्रो पाॅलिटन मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर ट्रांजिट रिमांड मांगी। पुलिस ने आरोपी एजीएम को ट्रांजिट रिमांड नहीं देते हुए उसकी ट्रांजिट बेल मंजूर कर ली है। अग्रवाल को अब 20 मई को रायपुर न्यायालय में पेश होना पड़ेगा। शेष|पेज 10







इसी शर्त पर ट्रांजिट बेल मिली है। एजीएम के पेश होने पर रायपुर पुलिस अदालत में रिमांड की अर्जी लगाने वाली है। उसकी जमानत का फैसला भी रायपुर की ही अदालत करेगी।

रायपुर पुलिस ने गुरुवार को सुबह एजीएम सुनील अग्रवाल को गिरफ्तार करने के बाद ट्रांजिट रिमांड लेने के लिए कोर्ट में पेश किया। गिरफ्तारी की खबर सुनकर कई प्रभावशाली लोग पहुंचे। आनन-फानन में उसके वकील भी आ गए। कोर्ट में पुलिस की गिरफ्तारी और ट्रांजिट रिमांड का विरोध किया गया। पुलिस की ओर से भी तर्क रखे गए। एजीएम के वकीलों ने बताया कि इस केस को लेकर अब तक कोई नोटिस नहीं मिला। यह खबर भी नहीं थी कि एजीएम का नाम एफआईआर में है। उसके बाद कोर्ट ने एजीएम को 20 मई को रायपुर कोर्ट में पेश होने की शर्त पर जमानत दी गई। उसके वकीलों ने कोर्ट में शपथपत्र दिया कि निर्धारित तारीख को कोर्ट में हाजिर हो जाएंगे।

एजीएम है महत्वपूर्ण गवाह

इस केस की जांच कर रही एसआईटी के चीफ नसर सिद्दीकी ने बताया कि रायपुर कोर्ट में अग्रवाल को रिमांड पर लेने की अर्जी लगाई जाएगी। गौरतलब है कि डीकेएस घोटाले में सुनील अग्रवाल को बेहद महत्वपूर्ण गवाह माना जा रहा है। बैंक में फर्जी ऑडिट रिपोर्ट के साथ कई अधूरे दस्तावेज जमा किए गए हैं। उसके बावजूद 65 करोड़ का लोन स्वीकृत हो गया। इस वजह से भी तत्कालीन बैंक प्रबंधन जांच के घेरे में आया। इस मामले में सुनील अग्रवाल की पहली गिरफ्तारी हुई, उसे भी कोर्ट ने ट्रांजिट बेल दे दी।

इसलिए एजीएम की गिरफ्तारी

डीकेएस घोटाले की अब तक की जांच में पता चला है कि तत्कालीन अस्पताल प्रबंधन से सांठगांठ के कारण ही सुनील ने लोन स्वीकृत करते समय दस्तावेजों का परीक्षण नहीं कराया और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोन दे दिया। छत्तीसगढ़ में डीकेएस का फर्जीवाड़ा फूटने के पहले ही सुनील का ट्रांसफर दिल्ली हो गया था। डीकेएस के दस्तावेजों की जांच के दौरान पुलिस को फर्जी ऑडिट रिपोर्ट मिली। लोन से संबंधित कई दस्तावेजों का परीक्षण भी नहीं कराया गया था। उस आधार पर सुनील अग्रवाल की भूमिका की जांच की गई। जांच के दौरान लोन के फर्जीवाड़े में पीएनबी बैंक के तत्कालीन एजीएम सुनील अग्रवाल की भूमिका संदिग्ध पाई गई। ये भी पता चला कि सुनील की संलिप्तता के कारण ही अस्पताल प्रबंधन को फर्जी और अधूरे दस्तावेजों के आधार पर 65 करोड़ का लोन मिल गया। जांच में प्रमाणित होने के बाद एजीएम के खिलाफ केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया गया।

लोन देने से पहले दस्तावेज की जांच नहीं करने का आरोप

डा. पुनीत से दूसरी बार पूछताछ, फिर कहा- मेरे पास दस्तावेज नहीं

डीकेएस में मशीनों के फर्जीवाड़े और जाली ऑडिट रिपोर्ट पेश करने के मामले में फंसे पूर्व अधीक्षक डा. पुनीत गुप्ता गुरुवार को दूसरी बार पुलिस के सामने पेश हुए। वकील के साथ पहुंचे पुनीत से पुलिस ने करीब पौने दो घंटे पूछताछ की। पिछली बार की तरह उन्होंने ज्यादातर सवालों के जवाब में कह दिया- अभी मेरे पास कोई दस्तावेज नहीं है। मैं दस्तावेज देखकर ही जवाब दे सकूंगा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उन्होंने सारे दस्तावेज सूचना के अधिकार के तहत मांगे हैं। शेष|पेज 10





दस्तावेज आने के बाद ही वे जवाब दे सकेंगे। उनका कहना था कि उन्होंने कई काम किए हैं। इस वजह से उन्हें दस्तावेजों के बारे में ज्यादा कुछ याद नहीं है।

अग्रिम जमानत अर्जी खारिज करने की याचिका पर चार हफ्ते में देना है जवाब : डीकेएस घोटाले में फंसे डा. पुनीत की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज करने की याचिका पर पूर्व अधीक्षक को चार हफ्ते के भीतर सुप्रीम कोर्ट में जवाब देना है। डा. पुनीत को हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत दी है। उसे खारिज करने के लिए सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। पिछले हफ्ते इस पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने डा. गुप्ता को तात्कालिक राहत देते 4 हफ्ते के भीतर उनसे जवाब मांगा है। डा. गुप्ता के खिलाफ पुलिस ने तर्क दिया है कि वे जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और न ही दस्तावेज उपलब्ध करवा रहे हैं। इस तर्क के आधार पर ही सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की याचिका स्वीकार करते हुए डा. गुप्ता को चार हफ्ते का समय दिया।

फर्जी ऑडिट रिपोर्ट में गुप्ता के हस्ताक्षर तो नहीं? हस्ताक्षर का नमूना भी लिया मिलान के लिए : डीकेएस की 94 करोड़ की ऑडिट िरपोर्ट जांच के घेरे में है। ऑडिट रिपोर्ट में जिस चार्टड अकाउंटेंट के हस्ताक्षर हैं, उसने पुलिस के सामने अपने हस्ताक्षर होने से इनकार कर दिया है। पुलिस अब ये पता लगा रही है कि आखिर ऑडिट रिपोर्ट में चार्टड अकाउंटेंट के फर्जी हस्ताक्षर किसने किए? इसी शक के आधार पर गुरुवार को डा. पुनीत के हस्ताक्षर का नमूना लिया गया। हैंड राइटिंग एक्सपर्ट से मिलान किया जाएगा। इसके जरिये ये पता लगाया जाएगा कि ये हस्ताक्षर कहीं पूर्व अधीक्षक डा. गुप्ता ने तो नहीं किए हैं।

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