समितियों में बिक रहे ऐसे प्रोडक्ट जिन्हें विभाग ने नहीं दिया लाइसेंस

Raipur News - कृषि विभाग की अनुशंसा और लाइसेंस के बिना सहकारी समितियों में ऐसे प्रोडक्ट बिक रहे हैं, जो खेती में फायदेमंद नहीं...

Jul 14, 2019, 07:25 AM IST
कृषि विभाग की अनुशंसा और लाइसेंस के बिना सहकारी समितियों में ऐसे प्रोडक्ट बिक रहे हैं, जो खेती में फायदेमंद नहीं हैं। कृषि विश्वविद्यालय की जांच में इन प्रोडक्ट्स की रिपोर्ट खराब आई है। इसके बावजूद कई कंपनियों के सी-वीड ग्रेन्यूल और जाइम साख सहकारी समितियों में बिक रहे हैं। कृषि विभाग की जांच में यह बात सामने आने के बाद संचालनालय के अधिकारियों ने कृषि उत्पादन आयुक्त को पत्र लिखा है।

सहकारी समितियों का नियंत्रण जिला सहकारी केंद्रीय बैंक या सहकारिता विभाग के अंतर्गत होता है, इसलिए कृषि संचालनालय ने कृषि उत्पादन आयुक्त केडीपी राव को संबंधित विभाग के माध्यम से आवश्यक कार्यवाही के लिए पत्र लिखा है।

बता दें कि कई कंपनियां किसानों को ज्यादा उपज का लालच देकर ऐसे प्रोडक्ट्स थमा देती हैं, जबकि इसकी कृषि विश्वविद्यालय की ओर से अनुशंसा ही नहीं की जाती। दो अलग-अलग विभागों का मामला होने के कारण अवैध तरीके से बिकने वाले प्रोडक्ट पर रोक नहीं लग पाती, जबकि कंपनियां किसानों से हर साल करोड़ों रुपए लूट लेती हैं।

ऐसे प्रोडक्ट्स के लिए कर्ज नहीं : किसानों को प्रमाणित बीज, हाइब्रिड बीज, खाद, जैविक खाद, कीट या नींदानाशी रसायन, पोषक तत्व आदि की खरीदी के लिए कर्ज मिलता है। सी-वीड से संबंधित ह्यूमिक, एमीनो एसिड या अन्य तरह के जाइम कृषि विभाग से अनुशंसित उत्पादन नहीं हैं, इसलिए किसानों के कर्ज की गणना में शामिल नहीं किए जाते। कंपनियों के दावों में आकर किसान बाहरी लोगों से कर्ज लेकर या अपने पैसे से ऐसे उत्पाद खरीद लेते हैं। बाद में इसका फायदा नहीं मिलता तो उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। इस वजह से कृषि विभाग की ओर से रोक लगाने की मांग की गई है।

लाइसेंस के बिना खाद-बीज का स्टॉक : हफ्तेभर में कृषि विभाग की उड़नदस्ता टीमों ने रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, महासमुंद सहित कई जिलों में छापेमारी की है। कृषि विभाग का मैदानी अमला भी लगातार खाद-बीज के गोदामों व दुकानों की जांच कर रहा है। इसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आई हैं। खाद के लाइसेंस में बीज बेचने और बीज के लिए लाइसेंस लेकर खाद बनाने का भंडाफोड़ हुआ है। कृषि विभाग ने जिस कीटनाशक का लाइसेंस नहीं दिया है, उसके स्टॉक के साथ एक्सपायरी कीटनाशक भी मिले हैं। अधिकारियों को शक है कि ये सभी किसानों को खपाने की तैयारी थी। इस आधार पर स्टॉक जब्त कर बिक्री पर रोक लगा दी गई है।

जिलों के दौरे में सामने आया मामला

कृषि मंत्री रविंद्र चौबे के निर्देश पर मुख्यालय स्तर के अधिकारियों के अलावा जिलों के डिप्टी डायरेक्टर के साथ पूरी टीम दौरे कर रही है। इसमें मुख्यालय स्तर के अधिकारियों के साथ-साथ राजनांदगांव के डिप्टी डायरेक्टर ने इफको द्वारा स्टॉक किए गए सागरिका (सी वीड ग्रेन्यूल) और कई कंपनियों के जाइम सहकारी समितियों में बिकने की शिकायत की है। इन प्रोडक्ट्स की कृषि विश्वविद्यालय में जांच कराई गई, लेकिन फसल उत्पादन में कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा। इस वजह से विश्वविद्यालय या कृषि विभाग ने अनुशंसा नहीं की है।

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