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पुनीत गुप्ता की पीएचडी पर भी फर्जीवाड़े का शक, डीएमई से की गई शिकायत

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 07:26 AM IST

Raipur News - दाऊ कल्याण सिंह डीकेएस के पूर्व अधीक्षक डॉ. पुनीत गुप्ता की पीएचडी डिग्री भी जांच के घेरे में है। उनके गाइड और...

Raipur News - chhattisgarh news punit gupta39s phd even on suspicion of fraud complaint from dme
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दाऊ कल्याण सिंह डीकेएस के पूर्व अधीक्षक डॉ. पुनीत गुप्ता की पीएचडी डिग्री भी जांच के घेरे में है। उनके गाइड और मेडिकल कॉलेज के जिम्मेदार पदों पर पदस्थ अफसरों की भूमिका भी सवालों के दायरे में आ गई है। इस बारे में अब नए सिरे से चिकित्सा शिक्षा संचालक से शिकायत की गई है। डा. गुप्ता के प्रमोशन और पोस्टिंग को लेकर भी जांच चालू हो चुकी है। हालांकि उनसे संबंधित कई दस्तावेज गायब होने का पता चला है।

पूर्व अधीक्षक गुप्ता फिलहाल गायब हैं। उन पर डीकेएस अस्पताल भवन के रिनोवेशन और मशीनों की खरीदी के दौरान 50 करोड़ के फर्जीवाड़ा का आरोप है। अब उनकी पीएचडी डिग्री पर सवाल उठ रहे हैं। पं. रविवि से उन्हें बायो टेक्नोलॉजी विषय पर मिली पीएचडी भी सवालों के घेरे में है। इस संबंध में की गई शिकायत में कहा गया है कि उन्होंने रविवि में पीएचडी के दौरान 240 दिन की उपस्थिति भी नहीं दी। यानी उन्होंने बिना छुट्‌टी रिसर्च वर्क कर लिया और डिग्री भी मिल गई। जानकार सवाल उठा रहे हैं कि डीएम नेफ्रोलॉजी करने वाले आखिर किडनी के डॉक्टर ने बायोटेक्नोलॉजी पर पीएचडी क्यों की? उनके गाइड डॉ. केएल तिवारी थे। बताया जाता है कि वे गुप्ता के करीबी रहे हैं। इसलिए उन्होंने रिसर्च कोर्स तिवारी के नेतृत्व में किया। डॉ. जीबी गुप्ता आयुष विवि के कुलपति थे, तब तिवारी विवि के कुलसचिव थे। विवि से रिटायर के बाद उन्हें संविदा में कुलसचिव बनाया गया गुप्ता ने 3 अक्टूबर 2009 को रविवि में पीएचडी के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया था।



यूजीसी की गाइड लाइन के अनुसार रजिस्ट्रेशन के छह माह पहले कोर्स वर्क करना अनिवार्य होता है। उन्होंने ऐसा नहीं किया। शिकायत में कहा गया है कि रिसर्च पेपर गुप्ता के बजाय किसी और ने तैयार किया होगा। इसी प्रकार सरगुजा विवि अंबिकापुर से डॉक्टर आफ साइंस के लिए रविवि से मिली पीएचडी की डिग्री का इस्तेमाल किया। जबकि सरगुजा विवि में मेडिकल विषयों की पढ़ाई ही नहीं होती। हालांकि विवि के कुलपति ने 8 सितंबर 2018 को उनका आवेदन खारिज कर दिया था। इसके बाद मंत्रालय के अधिकारियों के माध्यम से कुलपति पर दबाव बनाया गया। डीएससी के लिए विवि के परिक्षेत्र में एक साल निवास करने का प्रमाणपत्र पेश करना अनिवार्य होता है, जो गुप्ता नहीं कर पाए।

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