नौकरियों पर खतरा या विकास के लिए जरूरी

Raipur News - भा रतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास ने भारत में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के क्षेत्र में नवोंमेष को बढ़ावा देने के...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:05 AM IST
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भा रतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास ने भारत में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के क्षेत्र में नवोंमेष को बढ़ावा देने के मकसद से ‘एआइ-4भारत’ नामक प्लेटफॉर्म लांच किया है। यह कृषि, स्वास्थ्य देखभाल और अन्य क्षेत्रों की स्थानीय समस्याओं का समाधान करने के लिए एआइ बनाने में मदद करेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बारे में अलग-अलग राय है। कोई इसे डरावना बताता है, तो कोई जटिल। किसी के मुताबिक, इसे जरूरत से ज्यादा महत्व मिला है, तो कोई इसे आश्चर्यजनक बताता है। सैनफ्रांसिस्को स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के शोधार्थी इस साल सोचने और बोलने की क्षमता खो चुके लोगों में ब्रेन मॉनिटर स्थापित कर पाने में सफल हुए। इसका उद्देश्य स्ट्रोक, एएलएस या दौरों के कारण बोलने की क्षमता खो चुके लोगों को बातचीत कर पाने में सक्षम बनाना है। यह एक असाधारण उपलब्धि है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी हैदराबाद के बाद गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय ने भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का कोर्स शुरू कर दिया है। संस्थान के अनुसार, इस तकनीक से यह भी पता लगाया जा सकता है कि किस इंसान को अगले एक या डेढ़ साल बाद हार्ट अटैक आ सकता है या फिर उसे कैंसर का खतरा है।

रोबोट्स और ड्राइवरलैस कार जैसी चीजें चाहे कितनी भी तकनीकी योग्यता को प्रदर्शित करती हों, लेकिन इंसानों के लिए यह एक ऐसा खतरा है, जिसका असर धीरे-धीरे दुनिया के सामने आने लगा है। ऑटोमेशन के इस खतरे को इसी बात से समझा जा सकता है कि चीन में जहां एक फैक्ट्री में 10 हजार लोग काम करते थे, वहां अब 49 रोबोट ने उनकी जगह ले ली है। इस हिसाब से एक रोबोट ने 204 लाेगों को बेरोजगार कर दिया। इसी तरह जर्मनी में 301 और दक्षिण कोरिया में 531 रोबोट्स ने 10 हजार लोगों की नौकरियां समाप्त कर दी है। चीन में एक पंचवर्षीय योजना के तहत वर्ष 2020 तक 10 लाख रोबोट्स बनाए जाने हैं।

केंद्रीय बजट 2019-20 में आर्टिफि‍शि‍यल इंटेलीजेंस, बिग डेटा और रोबोटिक्स जैसे नए क्षेत्रों में युवाओं के कौशल में सुधार करने की योजना प्रस्तावित की गई है। एक ओर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को वैश्विक स्तर पर मूल्यवान बताया जा रहा है, वहीं एक वर्ग ऐसा भी है जो इसे भविष्य के खतरे के रूप में देख रहा है।


मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री

2 रोबोट 10,000 लोगों पर (वैश्विक औसत 69)।

ऑटोमोटिव इंडस्ट्री

68 रोबोट प्रति 10,000 कर्मचारियों पर।

अन्य क्षेत्र में

1 रोबोट काम कर रहा है पूरे 10,000 कर्मचारियों पर।



- स्त्रोत : इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रोबोटिक्स।

क्या है आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, यानी कृत्रिम तरीके से विकसित की गई बुद्धिमता। यह कम्प्यूटर साइंस की एक ब्रांच है जिसका इस्तेमाल इंटेलीजेंट मशीन बनाने के लिए किया जाता है। इसके तहत मशीन को ऐसा बना दिया जाता है कि वो इंसानों की तरह काम और रिएक्ट कर सके। रोबोट सहित इंसान की तरह काम करने वाली सभी मशीनें इस श्रेणी में हैं, लेकिन ये पूरी तरह बुद्धिमान नहीं हो पाई हैं। फैसले करने में अभी उन्हें इंसान की मदद की जरूरत पड़ रही है। वास्तव में एआई कम्प्यूटर और कम्प्यूटर के प्रोग्रामों को उन्हीं तर्कों के आधार पर चलाने का प्रयास करती है जिसके आधार पर इंसान का दिमाग चलता है। एआई का उद्देश्य है कि कम्प्यूटर खुद तय करे कि उसकी अगली गतिविधि क्या होगी। विज्ञान की दुनिया में इसके तीन प्रकार देखने को मिलते हैं।

 वीक एआई

वीक यानी कमजोर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को हम आर्टिफिशियल नैरो इंटेलीजेंस कह सकते हैं। यह कुछ विशेष तरह की डिवाइस में ही काम कर सकती हैं। जैसे कि आपका कम्प्यूटर अगर चेस खेलता है तो वह महज उसी में एक्सपर्ट है।

 स्ट्रांग एआई

यह एक ऐसी स्टेज है जहां मशीन और मानव मस्तिष्क लगभग एक जैसी ही बुद्धि रखते हैं। हर वह काम जो इंसान कर सकता है अगर रोबोट करने लगे तो उसे स्ट्रांग इंटेलीजेंस माना जाएगा। फिलहाल मार्केट में ऐसी तकनीक उतारी नहीं गई है।

 सिंगुलैरिटी

इसे विलक्षण श्रेणी में रखा जाता है। यहां मशीन ही मशीन का निर्माण करने लगती है। इस स्तर को मानव जाति के अंत के तौर पर देखा जा सकता है।

वैश्विक क्वालिटी मेंटेन करना जरूरी



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