मनुष्य अपने दुखों से जितना दुखी नहीं, उससे कहीं ज्यादा दूसरों की खुशी को देखकर दुखी: आचार्य

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Bhaskar News Network

Feb 14, 2019, 03:30 AM IST
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मनुष्य की सबसे बड़ी कमजोरी दूसरे की निंदा करना है

भास्कर न्यूज | सिल‍यारी

मनुष्य की सबसे बड़ी कमजोरी दूसरे की निंदा करना है। निंदा इंसान को कमजोर बना देती है। आज मनुष्य अपने दुखों से जितना दुखी नहीं है उससे कहीं ज्यादा दूसरों की खुशी को देखकर दुखी है। उन्होंने कहा कि क्रोध और अभिमान मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। आज ज्यादातर लोग दूसरे मनुष्य को पीछे खींचने में लगे हुए हैं। संसार में लालच और हिंसा इतनी बढ़ चुकी है कि लोग अपने रिश्तों को भी हानि पहुंचाने में पीछे नहीं हटते हैं। मनुष्य पूरी तरह स्वार्थी होते जा रहा है। जब तक स्वार्थ पूरा नहीं होता है तब तक अपनापन और रिश्ता निभाते रहता है। और स्वार्थ के पूरा होते ही सब कुछ भूल जाता है। ये बातें ग्राम निनवां (तरपोंगी) में चल रही भागवत कथा में आचार्य पं. संजय शर्मा ने कही। आचार्य ने कहा, मनुष्य केवल अपनी भलाई के बारे मे सोचता है, उन्हे दूसरो के दुख और तकलीफ से कोई मतलब नहीं रहता है। रिश्ता चाहे कोई भी जो मुसीबत में साथ दे वही सच्चा रिश्ता है। सुख में तो सभी साथ देते हैं परंतु दुख की घड़ी में जो साथ निभाए वही सच्चा साथी होता है। आज मनुष्य स्वाभिमान के बजाय अभिमान की राह में चलने लगा है। अभिमान इंसान को पतन की राह पर ले जाता है। उन्होंने बताया, इंद्रदेव को गोकुलवासियों द्वारा अपनी पूजा कराते-कराते अभिमान हो गया था इसलिए भगवान कृष्ण ने इंद्र की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा कराकर इंद्र के अभिमान को दूर किया। पं. शर्मा ने कहा, पद प्रतिष्ठा मान सम्मान पाना अच्छी बात है परंतु उनका अभिमान करना अच्छी बात नहीं है। भगवत कथा और सद्गुरु के चरणों में जाने से ही इंसान को सच्चा ज्ञान प्राप्त होता है और उन्ही ज्ञान के सहारे मनुष्य अपने अंदर के विकारों को दूर कर सकता है और अपने जीवन में सुख शांति के साथ सफलता प्राप्त कर सकता है।

मानव जीवन में विवाह भी एक महत्वपूर्ण संस्कार

आचार्य ने श्रीकृष्ण-रुखमणी विवाह प्रसंग में कहा कि भगवान कृष्ण ने माया को आदर देते हुए प्रथम रुखमणी से विवाह किए और आगे चलकर भगवान की सोलह हजार एक सौ आठ रानी-पटरानियां हुई। उन्होंने बताया, मानव जीवन में विवाह भी एक महत्वपूर्ण संस्‍कार होता है जो कि मनुष्य को समयानुसार पूर्ण रूपेण निर्वाह करना चाहिए। विवाह एक ऐसा संस्‍कार होता है जिसमें वर-वधु के साथ साथ दो परिवारों की बीच संबंध स्थापित होता है। उन्होंने कहा, किसी को माया से दूर भागने की जरूरत नहीं है। घर परिवार माया में रहकर समय निकालकार उस मायापति भगवान का भजन करें और सत्संग करते रहें। धूमधाम के साथ कृष्ण रुखमणी विवाह उत्सव मनाया गया।

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