सिर पर डाला गया जलता कोयला, फिर भी नहीं छोड़ी साधना सुकुमाल बने पहले महापुरुष जिन्हें 1 दिन में मिला केवल ज्ञान

Raipur News - कम्युनिटी रिपोर्टर | रायपुर महावीर महाेत्सव के 14वें दिन श्रीमद् राजचंद्र डिवाइन टच ने जैन दादाबाड़ी में...

Bhaskar News Network

Apr 16, 2019, 07:25 AM IST
Raipur News - chhattisgarh news the burning of coal was burnt on the head but still the sadhana did not leave the first great man who got the knowledge in 1 day only
कम्युनिटी रिपोर्टर | रायपुर

महावीर महाेत्सव के 14वें दिन श्रीमद् राजचंद्र डिवाइन टच ने जैन दादाबाड़ी में गजसुकुमाल चारित्र नाटक का मंचन किया। रात 10.30 बजे शुरू हुए डेढ़ घंटे के इस नाटक के इर्द-गिर्द उस गजसुकुमाल के जीवन की कहानी घूमती है जो दिन में राजा बनकर राजगद्दी संभालते हैं और दोपहर में वैराग्य अपना लेते हैं।

नाटक में बताया गया कि जैन समाज में कुल 7 महापुरुष हुए। गजसुकुमाल काे छोड़कर बाकी सभी को केवल ज्ञान हासिल करने में 20 वर्ष तक लग गए, लेकिन सुकुमाल ने महज एक दिन में केवल ज्ञान प्राप्त कर लिया। नाटक में दिखाया जाता है कि दोपहर में दीक्षा लेने के बाद रात को सुकुमाल प्रतिमा साधना के लिए श्मशान चले जाते हैं। जब वे प्रतिमा साधना कर रहे हाेते हैं तो वहां से उनके ससुर सोमिल ब्राह्मण जा रहे होते हैं। सोमिल ब्राह्मण को लगता है कि कि श्मशान में बैठकर कोई संत तपस्या कर रहे हैं। चलकर उनसे आशीर्वाद लिया जाए। जब सोमिल ब्राह्मण श्मशान पहुंचते हैं तो वहां गजसुकुमाल को देखकर भड़क उठते हैं। उन्हें लगता है कि मेरी पुत्री को छोड़कर यह साधना कर रहा है और उनके सर पर जलता कोयला डाल देते हैं। इसके बावजूद गजसुकुमाल की साधना नहीं टूटती। उनकी इसी कठोर तपस्या की वजह से उन्हें महज एक दिन में केवल ज्ञान की प्राप्ति हुई। नाटक के जरिए समाज को संदेश दिया गया कि अगर आप कुछ अच्छा कर रहे हैं तो उस काम में जी-जान लगाकर भीड़ जाएं। उद्देश्य जरूर पूरा होगा।

सोमवार रात एमजी रोड स्थित जैन दादाबाड़ी में हुए नाटक गजसुकुमाल चारित्र का एक सीन।

छत्तीसगढ़ में जैन धर्म के इतिहास और धार्मिक स्थलों की प्रदर्शनी अभिदर्शन शुरू

छत्तीसगढ़ में जैन धर्म के इतिहास पर जैन युवा मोर्चा की ओर से दादाबाड़ी में सोमवार से सचित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। प्रदर्शनी में प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर विराजित जिनेश्वर परमात्माओं की प्रतिमाओं और जैन संस्कृति की समृद्ध धार्मिक परंपरा को चित्रों के जरिए प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी बुधवार तक शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक रहेगी।

सदरबाजार में आज सुबह प्रभात फेरी का समापन, शाम को दादाबाड़ी में टैलेेंट हंट

मंगलवार शाम 7.30 बजे दादाबाड़ी में जैन टैलेंट हंट का आयोजन किया गया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना है। वहीं, 14 दिन पहले शुरू की गई प्रभात फेरी का समापन भी मंगलवार को ही होगा। मंगलवार को प्रभात फेरी को सुबह 6.30 बजे दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, मालवीय रोड से निकलेगी। जिसका समापन सदरबाजार में होगा।

कल निकलेगी शोभायात्रा, जिनालयों में

दिनभर भगवान महावीर की होगी पूजा

जन्म कल्याणक दिवस पर बुधवार सुबह 7.30 बजे भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। जो मालवीय रोड जैन मंदिर से निकलकर श्री ऋषभदेव जैन मंदिर सदर बाजार, सत्ती बाजार, तात्यापारा, बढ़ईपारा, रामसागर पारा से गुरूनानक चौक होते हुए एमजी रोड स्थित दादाबाड़ी एम.जी. रोड पहुंचेगा। वहीं, शहर के सभी जिनालयों में दिनभर भगवान महावीर की पूजा और अनुष्ठान होंगे।

आज 2618 सामायिक, देश में पहली बारी ऐसी आराधना

जैन दादाबाड़ी में मंगलवार को सामायिक की सामूहिक आराधना की जाएगी। भगवान महावीर की 2618वीं जयंती के मौके पर जैन समाज 2618 सामयिक करेगा। देश में इतनी बड़ी संख्या में यह आराधना पहली बार होने जा रही है। इसमें सकल जैन समाज के लोग भाग लेंगे। महोत्सव समिति के अध्यक्ष अशोक बरड़िया, महासचिव कन्हैया लुणावत और कोषाध्यक्ष सीए आलोक ओस्तवाल ने बताया कि आत्मा को मोक्ष के द्वार तक ले जाने के साक्षात 48 मिनट की यह आराधना सुबह 7.45 से 9.45 के बीच की जाएगी।

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