परिसीमन भारी पड़ेगा कांग्रेस-भाजपा के गढ़ों पर तीन-चार बार से जीत रहे पार्षदों को होगी दिक्कत

Raipur News - जनसंख्या और भौगोलिक दृष्टकोण तथा मतदाताओं की असमानता वाले रायपुर निगम के वार्डों का परिसीमन इस बार शहर सरकार के...

Bhaskar News Network

May 17, 2019, 07:40 AM IST
Raipur News - chhattisgarh news the delimitation will be heavy the councilors will win the three four times on the congress bjp strongholds
जनसंख्या और भौगोलिक दृष्टकोण तथा मतदाताओं की असमानता वाले रायपुर निगम के वार्डों का परिसीमन इस बार शहर सरकार के कई दिग्गजों की राजनीति को बिगाड़ सकता है। परिसीमन के बाद चुनाव में उम्मीदवारों को दोहरी दिक्कत अाएगी क्योंकि एक तो पहले ही उनके मजबूत किलों में सेंध लग चुकी होगी यानी या तो उनका वोट बैंक दूसरे वार्डों में चला जाएगा, या फिर नए वोटर अा जाएंगे। इससे दोनों ही पार्टी को प्रत्याशियों के विरोध और नाराजगी झेलनी पड़ेगी, क्योंकि परिसीमन के कारण कई प्रत्याशी मतदाता टूटने से वार्ड बदलने की कोशिश करेंगे, तो कुछ आरक्षण में फंसने की वजह से नई जमीन तलाशेंगे।

राज्य शासन ने सभी जिलों के कलेक्टरों को परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दे दिए हैं। रायपुर में परिसीन का काम शुरू भी हो गया है। रायपुर के कुछ वार्डों में जनसंख्या पांच से छह हजार है वहीं कुछ वार्डों की जनसंख्या 35 हजार से अधिक है। परिसीमन में इसी असमानता को दूर दिया जाएगा। वार्डों की औसत जनसंख्या 15 से 17 हजार के बीच रखने की कोशिश होगी। इससे जिन वार्डों की जनसंख्या 35 हजार से अधिक है वहां परिसीमन के बाद आबादी आधी रह जाएगी। उसी तरह जिन वार्डों की जनसंख्या पांच से छह हजार है वहां लगभग 10 हजार जनसंख्या बढ़ जाएगी। ऐसे वार्डों में पूरा समीकरण ही बदल जाएगा। पुराने या दिग्गज पार्षदों को नए सिरे से मेहनत करनी पड़ेगी। सीटिंग पार्षदोें को नए मतदाताओं से ज्यादा खतरा होगा। राजनीति से जुड़े लोगों का कहना है कि नए मतदाता सीटिंग पार्षदों को दोबारा मौका कम ही देते हैं। इस वजह से किसी वार्ड में नए मतदाताओं की संख्या बढ़ेगी तो वहां सीटिंग पार्षदों की दिक्कत सबसे ज्यादा बढ़ जाएगी।

जीत-हार का अंतर बढ़ेगा

छोटे-छोटे वार्डों में जीत-हार का अंतर बहुत ही कम रहता है। 50 से 100 वोटों के अंतर में जीत-हार तय हो जाती है। परिसीमन से यदि एक वार्ड की जनसंख्या 15 से 17 हजार के आसपास होती है तो वहां वोटर 13 से 14 हजार होंगे। मुख्य मुकाबला अगर दो प्रत्याशियों के बीच रहा तो वोटों का अंतर अधिक रहेगा वहीं मुकाबला अगर तीन प्रत्याशियों के बीच चला गया तो वोट अंतर यहां भी कम हो सकता है। अपेक्षाकृत ऐसे वार्डों की जहां मतदाता 30 हजार से अधिक हों।

चार बार के पार्षद भी

प्रफुल्ल विश्वकर्मा (भाजपा)

तात्यापारा वार्ड से प्रफुल्ल विश्वकर्मा 1999, 2004, 2009, 2014 में लगातार चार बार जीते। वे सात बार के पार्षद हैं।

सुनील वांदरे (कांग्रेस)

बाबू जगजीवन राम वार्ड से सुनील वांदरे लगातार तीन बार चुनाव जीते। इस बार अारक्षण के कारण उनकी प|ी यहां पार्षद हैं।









हैट्रिक वाले पार्षद

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