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शहर के म्यूजियम में है दुर्लभ काष्ठ स्तंभ लेख, लिखे हैं कौटिल्य के अर्थशास्त्र से मिलते-जुलते कई पदनाम

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:35 AM IST

Raipur News - सिटी रिपाेर्टर | रायपुर आज वर्ल्ड म्यूजियम डे है। देश के सबसे पुराने संग्रहालयों में से एक महंत घासीदास स्मारक...

Raipur News - chhattisgarh news the rare mosaic of the city39s museum is written many of the designations similar to the economics of kautilya
सिटी रिपाेर्टर | रायपुर

आज वर्ल्ड म्यूजियम डे है। देश के सबसे पुराने संग्रहालयों में से एक महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में मानव सभ्यता की शुरुआत में इस्तेमाल होने वाले छोटे-बड़े पत्थरों से बने हथियार से लेकर कई दुर्लभ मूर्तियां मौजूद हैं। यहां दुर्लभ काष्ठ स्तंभ लेख भी है। अधिकारियों का दावा है कि ऐसा काष्ठ स्तंभ लेख दुनिया के किसी अन्य संग्रहालय में मिलना असंभव है। यहां रूद्रशिव की दुर्लभ मूर्ति भी है। पढ़िए कुछ दुर्लभ धरोहरों से जुड़ी दिलचस्प जानकारी। अाज म्यूजियम में एंट्री फ्री रहेेगी।

1921 में किरारी गांव के हीराबांध तालाब में मिला था काष्ठ स्तंभ लेख,

बिलासपुर के किरारी गांव के हीराबांध तालाब में मिला काष्ठ स्तंभ लेख म्यूजियम में मौजूद है। 1921 की गर्मी में तालाब सूखने के कारण वहां के किसान खाद के लिए तालाब की खुदाई कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें काष्ठ स्तंभ लेख मिला। जिसे निकालकर उन्होंने धूप में छोड़ दिया। कई दिनों तक धूप में रहने के कारण लेख का ज्यादातर भाग नष्ट हो गया। लेकिन गांव में रहने वाले पं. लक्ष्मी प्रसाद उपाध्याय ने लेख की प्रतिलिपि बना ली थी, जिसे डॉ. हीरानंद शास्त्री ने प्रमाणित मानकर प्रकाशित किया। वास्तविक लेख 320 सेमी ऊंचा था जो अब केवल 112 सेमी बचा है। इसमें 36 सेमी ऊंचा कलश बना हुआ है। यह स्तंभ बीजा साल की लकड़ी से बना है। जानकारों की मानें तो ऐसा काष्ठ लेख किसी संग्रहालय में नहीं है। इसकी लिपि नासिक की गुफाओं से मिले लेखों की लिपि से मिलती-जुलती है। म्यूजियम की रोशनी शर्मा ने बताया कि पं. लक्ष्मीप्रसाद की बनाई प्रतिलिपि से मालूम होता है कि इसमें सदियों पुराने सेनापति, नगररक्षक और गणक जैसे लोगों के पद नाम उल्लेखित हैं। इन पदनामों में से कइयों का उल्लेख कौटिल्य के अर्थशास्त्र में भी मिलता है। इन पदाधिकारियों का नाम एक साथ एक काष्ठ लेख में लिखे होने से ये अनुमान लगाया जा सकता है कि स्तंभ किसी बड़े समारोह पर खड़ा किया गया होगा। उस कार्यक्रम का आयोजक राजा भी मामूली नहीं होगा।

मिट्‌टी के बर्तन और खिलौने

जानकारों के अनुसार पाषाण और ताम्र संस्कृति के दौर में कृषि की शुरुआत हो चुकी थी। इस युग में गोल चक्के वाली गाड़ी, मिट्टी के बर्तन, मिट्टी के घर बनने लगे थे, जिसके अंश संग्रहालय में देखे जा सकते हैं।

देखिए वो पत्थर जिनसे आदिमानव करते थे शिकार

संग्रहालय में आदिमानवों द्वारा इस्तेमाल किए गए छोटे-बड़े आकार के पत्थर देख सकते हैं। जानकारों के अनुसार, आदिमानव नदी में मिलने वाले पत्थरों को नुकीला कर अपनी सुरक्षा और शिकार के लिए औजार बनाते थे। इससे वे कंदमूल काटने-छीलने, गड्‌ढा खोदने और पशुओं का शिकार करने का काम करते थे। इन औजारों की बनावट के आधार पर इसे पूर्व पाषाण युग, मध्य पाषाण युग और नव पाषाण युग में विभाजित किया गया है।

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