जिन शासन की जय-जयकार के स्वरों के साथ निकला वर्षीदान वरघोड़ा, बांटीं चीजें

Raipur News - कम्युनिटी रिपोर्टर | रायपुर सांसारिक जीवन का त्याग कर साधु जीवन में प्रवेश करने जा रहे 45 दीक्षार्थियों का विशाल...

Bhaskar News Network

Jan 14, 2019, 03:22 AM IST
Raipur News - chhattisgarh news the rule which came out with the voices of jay chekar vardhodha shared things
कम्युनिटी रिपोर्टर | रायपुर

सांसारिक जीवन का त्याग कर साधु जीवन में प्रवेश करने जा रहे 45 दीक्षार्थियों का विशाल ऐतिहासिक अनुकम्पा दान (वर्षीदान) वरघोड़ा रविवार सुबह 8.30 बजे जैन मंदिर, सदरबाजार से प्रारंभ हुआ, जो जिन शासन की जय-जयकार और दीक्षार्थी अमर रहे के समवेत स्वरों के साथ अध्यात्म योगी महेन्द्रसागर महाराज साहब के शिष्य मुनिगण ऋषभसागरजी, वर्धमान सागरजी एवं ऋजुप्रज्ञा सागरजी महाराज साहब के सानिध्य में अहिंसा स्तूप-कोतवाली चौक, मालवीय रोड, जयस्तंभ चौक होकर एमजी रोड स्थित श्री जिनकुशल सूरि जैन दादाबाड़ी पहुंचा। इस भव्य ऐतिहासिक वरघोड़े में पूरे छत्तीसगढ़ अंचल से हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल थे। पूरे मार्ग में जनसमूह का अभिवादन करते हुए और सांसारिक जीवन की वस्तुओं, जैसे- रुपया-पैसा, कीमती अलंकार, खाद्यान्न आदि से भरी पोटलियों को श्रद्धालुओं की ओर उछाली गई।

इस दौरान 19 बग्गीयों पर सवार दीक्षार्थी, पूज्य मुनिगण और उनके पीछे दीक्षार्थी अमर रहे के जयकारे लगाते हजारों श्रद्धालु चल रहे थे। वरघोड़ा में लोक संगीत की धुनों व ढोल की थाप पर थिरकते आदिवासी नर्तक दल भी शामिल थे। जिन शासन की महिमा का वाद्य यंत्रों की धुन से गुणगान करते सुज्जित बैंड, ढोल-नगाड़े और वीर प्रभु व संयमी जीवन का वंदनीय गायन करतीं महिला श्रद्धालु इस वरघोड़े के प्रमुख आकर्षण थीं। इस प्रसंग पर दीक्षार्थियों के हाथों से जब कीमती वस्तुओं से भरी पोटलियां छूटतीं तो जनसमूह उन्हें लपकने के लिए उमड़ पड़ते। ऐसी जैन धार्मिक मान्यता है कि संसार का त्याग करने जा रहे दीक्षार्थी वस्तुओं से भरी पोटलियां इसलिए छोड़ते हैं कि अब वे सिर्फ मोक्ष के अभिलाषी हैं, संसार की चीजों का मोह उन्होंने छोड़ दिया है। दीक्षार्थियों के हाथों ये चीजें पाकर श्रद्धालु स्वयं को सौभाग्यशाली महसूस करते हैं। इसे जैन धर्म में अनुकम्पा दान भी कहा गया है।

दीक्षार्थियों के भावों को पढ़कर करें जीवन में बदलाव: मुनि ऋषभसागरजी

धर्मसभा में अपने आशीवर्चनों से कृतार्थ करते हुए पूज्य मुनि ऋषभसागरजी महाराज ने कहा, इस दुर्लभ सभा में मुमुक्षुओं का तिलक कर जिन्होंने बहुमान किया, क्या वास्तव में उन्होंने संयम जीवन के कुछ आंशिक सद्गुणों को अंगीकार करने के लिए किया या केवल औपचारिक तौर पर बहुमान कर दिया, यह हमारे चिंतन का विषय होना चाहिए। उन्होंने कहा, इस सभा में बैठे हजारों लोगों में वे लोग भी धन्य हैं, जिन्होंने अपने स्थान पर बैठे-बैठे ही संयम की अनुमोदना कर अपने जीवन में कोई न कोई पुनीत संकल्प को चरितार्थ करने का नियम ले लिया।

कई श्रीसंघों ने किया बहुमान

इस विशाल वरघोड़े के दादाबाड़ी पहुंचने के बाद वीर प्रभु एवं दादा गुरूदेव प्रतिमाओं के दर्शन-वंदन उपरांत भव्य-ऐतिहासिक धर्मसभा में संयम अनुमोदना उत्सव का आयोजन किया गया। रायपुर में पहली बार एक साथ 45 दीक्षार्थियों के बहुमान का यह दुर्लभ पावन और अभूतपूर्व क्षण था। मंच के समक्ष एक सिरे से नमस्कार मुद्रा में साफा पहने पुरुष व बाल मुमुक्षु और श्रृंगारिक-अलंकारित महिला ममुक्षुओं की पंक्ति को देख हजारों दर्शक अभिभूत थे।

Raipur News - chhattisgarh news the rule which came out with the voices of jay chekar vardhodha shared things
X
Raipur News - chhattisgarh news the rule which came out with the voices of jay chekar vardhodha shared things
Raipur News - chhattisgarh news the rule which came out with the voices of jay chekar vardhodha shared things
COMMENT