बहिष्कार के हजारों मामले, पर थानों में केस शून्य... क्योंकि रोकने का पुख्ता कानून नहीं

Raipur News - समस्या... हजारों बहिष्कृत व्यक्ति और परिवारों को नहीं मिल पा रहा न्याय गाैरव शर्मा | रायपुर प्रदेशभर में...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 07:25 AM IST
Raipur News - chhattisgarh news thousands of cases of boycott but the cases in the police station are zero because there is no law to stop them
समस्या... हजारों बहिष्कृत व्यक्ति और परिवारों को नहीं मिल पा रहा न्याय

गाैरव शर्मा | रायपुर

प्रदेशभर में सामाजिक बहिष्कार के हजारों मामले हैं, लेकिन थानों में इसके खिलाफ एफआईआर निरंक (शून्य) है। वजह ये कि ऐसे मामलों को रोकने कोई कानून ही नहीं है। 3 साल पहले सरकार ने सामाजिक बहिष्कार प्रतिषेध अधिनियम का मसौदा तैयार कर इस दिशा में पहल की भी, लेकिन लागू नहीं कर पाए। वो इसलिए क्योंकि समाजों की मनमर्जी के खिलाफ कानून पर सरकार ने समाजों से ही दावा-आपत्ति मांगी थी। ज्यादातर सामाजिक संगठनों ने इसका विरोध किया। नतीजतन बहिष्कार कानून का मसौदा पिछले तीन सालों से गृह विभाग में अटका हुआ है।

प्रदेश के बहुत से समाजों में आज भी बहिष्कार प्रथा है। ज्यादातर मामलों मेें बहिष्कार अंतरजातीय विवाह की वजह से किया जाता है। समाज में वापसी के लिए अर्थदंड की सजा दी जाती है। जो जुर्माना नहीं चुका पाते, उनका और पूरे परिवार का समाज-गांव से बहिष्कार कर दिया जाता है। धार्मिक, सामाजिक, यहां तक पारिवारिक कार्यक्रमों में भी आने-जाने पर प्रतिबंध होता है। ऐसे मामले भी सामने आए जहां लोगों को अपने रिश्तेदार के अंतिम संस्कार में तक शामिल नहीं होने दिया गया। मामले की शिकायत के लिए लोग पुलिस के पास पहुंचते ताे है, पर पुलिस इसे अहस्तक्षेप योग्य मामला बताती है। कुछ मामलों में कार्रवाई हुई भी तो 151 या दूसरी ऐसी धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया जो जमानती थीं। जबकि बहिष्कार कानून का जो मसौदा तैयार हुआ है उसके मुताबिक यह गैर जमानती अपराध होगा। बहिष्कृत लोगों की मदद के लिए अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति काम कर रही है। अब तक सैकड़ों लोग समिति को मदद के लिए पत्र लिख चुके हैं। समिति ने ही आरटीआई लगाकर नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो और राज्य सरकार से यह जानकारी मांगी थी कि सामाजिक बहिष्कार के कितने मामले दर्ज किए गए हैं। जवाब में निरंक मामले दर्ज होना बताया गया।

सरोकार

अहस्तक्षेप... क्याेंकि यह समाज का मामला है

बलौदाबाजार के जीवनलाल ने साल 2016 में सिटी कोतवाली थाने में समाज से बहिष्कार करने की शिकायत की थी। पुलिस ने अहस्तक्षेप योग्य मामला बताते हुए कहा कि यह मामला कलेक्टर को ट्रांसफर कर दिया। साथ ही यह भी कहा कि समाज में शामिल कराने जैसे मामलों में पुलिस दखल नहीं दे सकती।

उगाही... अदालती राशि के नाम पर

बहिष्कार के बाद समाज में वापसी के लिए अर्थदंड वसूला जाता है। ऐसे ही 2 मामले हैं जिसमें राजधानी के समारूराम से अदालती राशि के नाम पर 5 हजार रुपए वसूल लिए गए। इसी तरह और भी दूसरे खर्च बताकर उससे बहिष्कार की राशि वसूली गई । ऐसा इसलिए किया गया ताकि ऑन पेपर बहिष्कार न दिखे। वहीं, दुर्ग में कौशल प्रसाद और कृष्णा से समाज के नाम पर 1 लाख का चेक लेकर बहिष्कार का जुर्माना वसूला गया।

समाधान... सामाजिक बहिष्कार कानून जिसका मसौदा 3 साल से बनकर तैयार

केस स्टडी

अड़चन... जिनके खिलाफ कानून, उन्हीं से आपत्ति मांगकर उलझ गई है सरकार

कानून लागू हुआ तो... बहिष्कार करने वालों को 7 साल कैद और 5 लाख जुर्माना भी

सामाजिक बहिष्कार प्रतिषेध अधिनियम 2016 के मुताबिक सामाजिक बहिष्कार कराना अपराध होगा। अगर कोई जाति पंचायत बहिष्कार करती है तो कानून के तहत उसे शून्य घोषित कर दिया जाएगा। इसमाज किसी व्यक्ति को किसी भी तरह के कपड़े पहनने, विशेष भाषा का इस्तेमाल करने या सार्वजनिक जगह पर जाने से नहीं रोक पागगा। न ही किसी व्यक्ति को बहिष्कृत करने संबंधी कोई बैठक बुलाई जा सकेगी। अगर ऐसी बैठक हुई तो इसमें शामिल होने वाले प्रत्येक व्यक्ति को 1 लाख 50 हजार रुपए तक का जुर्माना चुकाना होगा। अगर बहिष्कार की पुष्टि होती है तो दोषियोें को 7 साल तक की सजा या 5 लाख जुर्माना या फिर दोनों सजा एक साथ सुनाई जा सकेगी।

महाराष्ट्र पूरे देश में इकलौता राज्य जहां बहिष्कार विराेधी कानून लागू

देश में महाराष्ट्र ही इकलौता ऐसा राज्य है जहां सामाजिक बहिष्कार के खिलाफ कानून लागू किया गया है। महाराष्ट्र सामाजिक बहिष्कार प्रतिबंधक कानून-2016 विधेयक 13 अप्रैल, 2016 को महाराष्ट्र विधानमंडल के दोनों सदनों में पारित कर केंद्र की मंजूरी के लिए भेजा गया था। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद इसे लागू किया गया। इसके तहत दोषियों को 7 साल तक कारावास और 5 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इस अपराध में साथ देने वालों को 3 साल की सजा या 3 लाख तक का जुर्माना चुकाना होगा।

हर माह मामले सामने आ रहे: मिश्र

अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने कहा कि प्रदेश के अलग-अलग इलाकों से हर महीने बहिष्कार के मामले सामने आते हैं। न केवल गांवों में, बल्कि राजधानी समेत दूसरे बड़े शहरों में भी ये प्रथा चलन में है। इस संबंध में कई बार पीएमओ दफ्तर से लेकर राज्य में मुख्यमंत्री, केबिनेट मंत्रियों और संबंधित विभाग के आला अफसरों को पत्र लिख चुके हैं।


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