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कार्डियोलॉजिस्ट की मदद से बिना चीर फाड़ 16 बच्चों के दिल के छेद किए बंद

एक वर्ष पहले
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अंबेडकर अस्पताल की कैथलैब यूनिट में पीजीआई चंडीगढ़ के डॉक्टर की मदद से दो दिनों में 16 बच्चों के दिल के छेद चीर-फाड़ के बंद कर दिए। इस सर्जरी के बबाद दिल की धड़कन का सिस्टम भी ठीक हो गया। सभी का इलाज आयुष्मान भारत योजना के तहत फ्री में किया गया। 40 बच्चों के दिल के छेद बंद करने का प्रस्ताव था, लेकिन जरूरी जांच में 24 बच्चे ऑपरेशन के लायक नहीं मिले।

सोमवार को बच्चों के हृदय में जन्मजात छेद (एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट) को बंद करने के लिये एएसडी डिवाइस क्लोजर व वेंट्रीकुलर सेप्टल डिफेक्ट डिवाइस क्लोजर की सर्जरी की गई। मंगलवार को इलेक्ट्रो फिजियोलाॅजी अध्ययन से दिल की बीमारी एरिथमिया को रेडियो फ्रिक्वेंसी एबलेशन के माध्यम से ठीक किया गया। सर्जरी और बाकी प्रक्रिया पीजीआई के कार्डियोलाॅजिस्ट डाॅ. मनोज कुमार रोहित व डॉ. स्मित श्रीवास्तव ने की। इमरजेंसी के लिए कार्डियो थोरेसिक एंड वेस्कुलर सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. कृष्णकांत साहू मौजूद थे। डॉक्टरों के अनुसार सामान्यत: जन्म के कुछ महीने बाद हृदय की दोनों मुख्य धमनियों के बीच का मार्ग स्वतः बंद हो जाता है लेकिन किसी-किसी केस में ऐसा नहीं होता और वह मार्ग खुला रह जाता है। इसे सामान्य भाषा में दिल में छेद होना तथा मेडिकल भाषा में एएसडी यानी एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट कहा जाता हैं। इस विकार से ग्रस्त लोगों को तेज चलने, सीढ़ी चढ़ने के दौरान सांस फूलने, चक्कर आने, कमजोरी महसूस होने की समस्या होती है तथा शारीरिक विकास सामान्य लोगों की अपेक्षा कम होता है। एएसडी में डिवाइस क्लोजर तकनीक से दिल के छेद को बंद किया जाता है। एएसडी डिवाइस क्लोजर एक छतरीनुमा डिवाइस होता है जिसमें दो छतरियां तथा बीच में एक नलिकानुमा हिस्सा होता है। इसे कैथलैब द्वारा एक नली के रूप में हृदय में छेद तक पहुंचाया जाता है।

जहां वह एक छतरीनुमा आकार में छेद को दोनों ओर से बंद कर देता है।



इस उपचार तकनीक की खासियत है कि एएसडी डिवाइस क्लोजर लगाकर बिना चीर-फाड़ के दिल के छेद को बंद किया जाता है। मरीज को दूसरे दिन ही छुट्टी दे सकते हैं। यह एक इंटरवेंशन प्रोसीजर है अर्थात् नसों के अंदर ही अंदर की जाने वाली प्रक्रिया। जिसमें जांघ की नस द्वारा बिना चीरे के दिल का छेद बंद कर दिया जाता है और मरीज दूसरे दिन से ही अपने काम पर जा सकता है।

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