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सफाई में छत्तीसगढ़ देश में तीसरा बेस्ट परफॉर्मिंग स्टेट, इनोवेशन में अंबिकापुर पहला, फीडबैक में नरहरपुर श्रेष्ठ

स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 में सफाई के मामले में राजधानी रायपुर की रैंकिंग जारी नहीं हुई है।

Bhaskar News | Last Modified - May 17, 2018, 06:50 AM IST

  • सफाई में छत्तीसगढ़ देश में तीसरा बेस्ट परफॉर्मिंग स्टेट, इनोवेशन में अंबिकापुर पहला, फीडबैक में नरहरपुर श्रेष्ठ
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    रायपुर/अंबिकापुर.स्वच्छ सर्वेंक्षण 2018 में छत्तीसगढ़ सफाई के मामले में देश का तीसरा बेस्ट परफार्मिंग स्टेट बन गया है। प्रदेश ने यह उपलब्धि पहली बार हासिल की है। प्रदेश ही नहीं, यहां के छोटे शहरों ने भी सफाई के मामले में ऊंची छलांग लगाई है। अंबिकापुर को छोटे शहरों की सूची में सफाई में बेस्ट इनोवेशन एंड बेस्ट प्रैक्टिसेज में देश में पहला स्थान मिला है। कांकेर जिले से छोटे से कस्बे नरहरपुर ने बेस्ट सिटीजन फीडबैक में देशभर के कस्बों में अपनी जगह बनाकर पड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है।

    केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप पुरी ने बुधवार को स्वच्छता सर्वेक्षण-2018 के नतीजों का ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए देश के 4203 शहरों को शामिल किया गया था। इसमें आबादी के अनुसार शहरों की रैंकिंग की गई है। स्वच्छ सर्वेक्षण के तहत जितने तरह की चुनातियां रखी गई थी, उन चुनौतियों के अनुसार भी शहरों की रैंकिंग की गई है। इसके मुताबिक देश के सबसे साफ-सुथरे तीन शहरों में क्रमश: इंदौर, भोपाल आैर चंडीगढ़ शामिल हैं। इन शहरों में स्वच्छता के सभी मापदंडों को बेहतर तरीके से अपनाते हुए इसका पालन किया गया था।

    कई राज्यों को पीछे छोड़ा

    छत्तीसगढ़ ने देश के 29 राज्यों के मुकाबले काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। उसने पूरे देश में बेस्ट परफार्मिंग स्टेट की श्रेणी में तीसरा स्थान हासिल किया है। सबसे खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ ने मध्यप्रदेश, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, केरल, पंजाब जैसे राज्यों को पछाड़कर तीसरा स्थान हासिल किया है। इसमें झारखंड पहले नंबर पर आैर महाराष्ट्र दूसरे नंबर पर रहा।

    अंबिकापुर पहला शहर, जहां कचरा बिकता भी है
    स्वच्छता अभियान अभियान के तहत इनोवेशन के लिए अंबिकापुर को पूरे देश में पहला स्थान मिला है। यह प्रदेश का पहला ऐसा शहर है जिसने डंपिंग ग्राउंड को खत्म कर उसे स्वच्छता पार्क में बदल दिया। डोर टू डोर कचरा कलेक्शन सभी वार्डों में चल रहा है और इस अभियान में लगभग 400 महिलाएं लगी हैं। हर चार वार्डों के बीच एक एसएलआरएम सेंटर बना है, जहां डोर टू डोर कलेक्शन के कचरे की छंटाई की जाती है। कचरे से खाद बनाने के अलावा अन्य उपयोगी कचरे की बिक्री भी की जाती है।

    अभियान को जारी रखने और सफल बनाने के लिए प्रशासन व नगर निगम ने काफी कवायद की। सड़क पर कचरा आने से रोकने के लिए निगम ने सख्त कदम उठाए। हालांकि अभी भी कई वार्डों में लोग सड़कों पर कचरा फेंकते हैं, लेकिन जुर्माना व अन्य कार्रवाइयों से इस पर रोक लग रही है। जहां कचरा फेंका जाता था, उन जगहों पर रंगोली बनवाने जैसे कदम उठाए गए। जनवरी में जब स्वच्छता सर्वे टीम आई तो उसने इन प्रयासों को सराहा।

    रायपुर : टॉयलेट से पिछले साल पिछड़े, इस बार डूबे कचरे के ढेर में


    स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 में सफाई के मामले में राजधानी रायपुर की रैंकिंग जारी नहीं हुई है। दिल्ली से बुधवार को केवल तीन शहरों इंदौर, भोपाल और चंडीगढ़ के नाम घोषित किए गए हैं, लेकिन ऐसे संकेत हैं कि 10 लाख से ऊपर आबादी वाले शहरों में रायपुर टॉप टेन में भी नहीं है। स्मार्ट सिटी घोषित होने के बावजूद सफाई के मामले में रायपुर की पोजीशन क्यों नहीं सुधरी, रैंकिंग जारी होने के तुरंत बाद भास्कर ने इसकी पड़ताल की। पिछले साल ओडीएफ और टॉयलेट के मामले में रायपुर पिछड़ा था और 129वीं पायदान पर था। इस बार 4203 शहरों में हुए सर्वे में रायपुर की रैंकिंग का अभी खुलासा नहीं हुआ। कौन सी कमजोरियां राजधानी को सफाई के मामले में पीछे कर रही हैं, इस बारे में शहर के बड़े वर्ग का अनुमान है कि कचरा उठाने से नष्ट करने में एजेंसियां नाकाम हैं, गलियों से नालियों तक गंदगी नजर आ रही है और यही कुप्रबंधन सबसे बड़ी वजह हो सकती है।


    18 बिंदुओं में परखा गया

    स्वच्छता सर्वे की रैंकिंग में राजधानी को 18 बिंदुओं पर परखा गया। इनमें कॉलोनियों, बस्तियों, पुराना शहर, अव्यवस्थित और व्यवस्थित बसाहटों में सफाई की स्थिति, सार्वजनिक टॉयलेट्स के इंतजाम वगैरह शामिल हैं। क्या ये महिलाओं और बच्चों के लिए सुविधाजनक हैं, क्या टॉयलेट एरिया में ड्रेनेज सिस्टम काम कर रहा है, बाजारों से लेकर सार्वजनिक जगहों पर सफाई के क्या हालात हैं, सूखे और गीले कचरे का प्रबंधन हो रहा है या नहीं, मापदंडों में इन बिंदुओं के आधार पर भी राजधानी में जांच हुई। दिल्ली से आई टीम ने इन बिंदुओं पर ही शहर का आंकलन किया था। इसके अलावा, लोगों से बात भी की थी कि शहर की सफाई में वे क्या सोचते हैं (सिटीजन फीडबैक), जैसा मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण माना गया था।

    स्वच्छ सर्वे रैंकिंग में क्यों पिछड़े होंगे ... भास्कर की पड़ताल और लोगों की राय के अनुसार संभावित कारण

    1. कचरा प्रबंधन बहुत देरी से
    फरवरी में जब सर्वे के लिए दिल्ली की टीम का यहां दौरा हुआ था, तब शहर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का काम शुरू नहीं हो सका था क्योंकि नई कंपनी ने तब तक काम नहीं संभाला था। कंपनी ने काम शुरू भी किया, तो प्रारंभिक तौर पर 70 की जगह 30 वार्डों में ही। इस वजह से राजधानी के सफाई इंतजाम अब तक धराशायी हैं। कूड़ा प्रबंधन के लिए बनाए गए सिटी वेस्ट मैनेजमेंट सेंटर में भी काम अच्छा नहीं चल रहा है। शहर में अब भी खुले में ही कचरा डंप हो रहा है। स्वच्छ सर्वेक्षण में यह महत्वपूर्ण बिंदु है। माना जा रहा है कि कचरा प्रबंधन में नाकामी बड़ी वजह हो सकती है।

    2. पूरी तरह डस्टबिन भी नहीं बंटी
    घरों से सूखा और गीला कचरा अलग-अलग जमा करने के लिए 8 जोन, 70 वार्डों में डस्टबिन बांटी जानी थी। लेकिन जिस वक्त सर्वे किया गया, पता चला कि डस्टबिन शहर में सिर्फ 60 फीसदी घरों तक ही पहुंच पाई है। राजधानी के हर जोन दफ्तर में हजारों की संख्या में डस्टबिन डंप पड़ी है। लोगों ने बताया कि हरी और नीली डस्टबिन बांटी तो गई है, लेकिन घरों में कचरा कलेक्ट करने के लिए जो लोग आ रहे हैं, वह सूखा और गीला कचरा अलग से नहीं मांग रहे हैं। यही नहीं, कलेक्शन सेंटर में कचरे का पहाड़ खड़ा किया जा रहा है। इसमें भी सूखा और गीला अलग नहीं है।


    3. मोबाइल एप में भी पिछड़े
    दिल्ली की टीम ने यहां जिन बिंदुओं पर सर्वे किया था, उनमें सफाई के लिए मोबाइल एप का इस्तेमाल शामिल है। यह जरूरी बिंदु है, क्योंकि सभी शहरों की तरह सफाई की शिकायतों के निराकरण के लिए स्वच्छता एप राजधानी में भी लोगों के मोबाइल पर डाउनलोड करवाया गया, लेकिन अभियान चलाने के बावजूद केवल 4 हजार के आसपास। इस एप के रिस्पांस टाइम में भी बड़ा इश्यू है। मापदंडों के अनुसार एप में जैसे ही शिकायत अपलोड की जाए, तुरंत निराकरण होना चाहिए। लेकिन राजधानी में शिकायतों के निराकरण में ही एक से दो दिन तक लग रहे हैं।

    4. टॉयलेट सुविधा में सुधार नहीं
    पिछले बार स्वच्छता सर्वेक्षण में रायपुर शहर के पिछडऩे की सबसे बड़ी वजह टॉयलेट ही थी। सार्वजनिक स्थानों में टॉयलेट जैसी सुविधाओं के खस्ता हाल के कारण से रायपुर टॉप टेन में जगह नहीं बना पाया था। इस बार भी फरवरी के महीने में सफाई सर्वे करके गई दिल्ली की टीम ने रायपुर समेत राज्य के अन्य शहरों का कुछ बिंदुओं पर दोबारा सर्वे किया था। रायपुर में 9 बिंदुओं के लेकर ये कवायद हुई थी। हालांकि प्रदेश के बाकी शहरों की तुलना में ये बेहद कम थी, क्योंकि कई जगह 25 से ज्यादा प्वॉइंट्स पर रिव्यू किए गए थे। सबसे ज्यादा पड़ताल टॉयलेट को लेकर की गई है।

    शहर से भी उठे सवाल

    1. सड़कों और गलियों में कचरा देखा जा सकता है, ऐसे में नंबर वन बनेंगे कैसे?
    आशा तिवारी, गृहिणी संतोषी नगर
    2. ड्रैनेज ठीक होता नहीं, सफाई इंतजाम कैसे दुरुस्त किए जा सकेंगे?
    डॉ. सुनील खेमका, डायरेक्टर नारायणा अस्पताल
    3. प्रचार तो खूब कर रहे हैं, पर लोगों की आदत क्यों नहीं बदलवा पा रहे हैं?
    सीएल शर्मा, एजुकेशनल ट्रेनर
    4. कचरा डालने की जगह और जिम्मेदारी, यही तय नहीं है तो सुधरेंगे कैसे?
    दर्शन नरवाल, समाजसेवी

  • सफाई में छत्तीसगढ़ देश में तीसरा बेस्ट परफॉर्मिंग स्टेट, इनोवेशन में अंबिकापुर पहला, फीडबैक में नरहरपुर श्रेष्ठ
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