Hindi News »Chhatisgarh »Raipur »News» Child Rights Protection Commission Survey

बच्चों की बात पर गंभीर नहीं अधिकतर पैरेंट्स, अब पड़ोसियों के साथ काउंसलिंग कर रहा आयोग

अभिभावक अपने छोटे बच्चों की शिकायतों को गंभीरता से ही नहीं लेते हैं।

Bhaskar News | Last Modified - May 01, 2018, 07:53 AM IST

  • बच्चों की बात पर गंभीर नहीं अधिकतर पैरेंट्स, अब पड़ोसियों के साथ काउंसलिंग कर रहा आयोग

    रायपुर.नाबालिग बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराध को लेकर प्रदेश में यह सामने आया है कि अधिकतर पैरेंट्स ही अपने बच्चों की शिकायत और बात को गंभीरता से नहीं लेते हैं। बच्चों की बात कहते हुए उन्हें टाल दिया जाता है। इस कारण से अधिकतर घटनाएं बड़ा रूप से लेती हैं, तब तक बहुत देर हो जाती है। अगर समय रहते इस पर गंभीरता अपनाई जाए तो कई बड़ी घटनाएं और अपराध को रोका जा सकता है। यह खुलासा हुआ है कि प्रदेश के बाल अधिकार संरक्षण आयोग और बच्चों के लेकर काम करने वाली संस्थाओं की पड़ताल और उनके द्वारा बच्चों से की गई बात के आधार पर। अब आयोग की तरफ से शहर से लेकर गांव तक बाल चौपाल लगाकर बच्चों के माता-पिता के साथ उनके पड़ोसियों को भी जागरूक कर रहे हैं।


    प्रदेश में बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्थाओं से जुड़े जानकारों का कहना है कि नाबालिगों के खिलाफ होने वाले अधिकतर अपराध की अहम वजहों में पेरेंट्स की अनदेखी भी शामिल है। दरअसल,अभिभावक अपने छोटे बच्चों की शिकायतों को गंभीरता से ही नहीं लेते हैं। जबकि कई बार बच्चे उनके खिलाफ हो रही घटनाओं को लेकर बताते रहते हैं। चाइल्ड लाइन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यदि पेरेंट्स बच्चों की शिकायतों को गंभीरता से सुने तो उनके खिलाफ होने वाले अपराध को काफी हद तक रोका जा सकता है। छग राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के प्रदेशभर के अलग-अलग स्कूलों के बच्चों और एनजीओ के सर्वे में यह बात सामने आई थी कि बच्चे अपने साथ हो रहे गलत व्यवहार, छेड़छाड़ या किसी भी आपत्तिजनक हरकत को लेकर सबसे पहले अपने अभिभावकों को ही बताते हैं।

    वे खुलकर अपनी बात रखने की कोशिश करते हैं लेकिन वे पैरेंट्स के सपोर्ट ने मिलने के कारण नहीं कह पाते। ऐसे मामलों में पैरेंट्स को जागरूक होना होगा। आयोग की तरफ से अब इस मुद्दे को लेकर जागरूरता अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें बच्चों को ऐसे किसी घटना को लेकर खुलकर विरोध करने और अपने पैरेंट्स को शिकायत करने को लेकर अवेयर किया जा रहा है। इसके साथ अभिभावकों और आस-पड़ोस के लोगों को भी इन मुद्दों को लेकर बच्चों की बात को गंभीरता से लेने के लिए समझाया जा रहा है। जानकार ये भी बताते हैं कि बच्चों के मनोविज्ञान को लेकर समाज के नजरिए में बदलाव लाने की जरूरत है। बच्चों की शिकायतों को अभिभावक जब तरजीह नहीं देते हैं तो मनोवैज्ञानिक तौर पर भी बच्चे इससे टूट जाते हैं। यह भी सामने आया है कि बच्चों के विरुद्ध होने वाले ज्यादातर अपराधों में आप-पास और करीबी लोग ही शामिल होते हैं।

    दो महीने से मां लड़ रही है अपनी बेटी को न्याय दिलाने की लड़ाई और आरोपी घूम रहा

    राजधानी की 15 साल की खुशी (बदला हुआ नाम) होली मनाने नानी के घर रायगढ़ गई थी। जहां उसके साथ मोहल्ले के एक प्रभावशील व्यक्ति ने रंग लगाने के बहाने बदसलूकी की। बच्ची ने खुद के साथ हुई अभद्रता की जानकारी अपनी मां को दी तो वे उसकी शिकायत को गंभीरता से ली। घटना के दो महीने बाद भी पुलिस ने कार्रवाई नहीं की तो वे राजधानी में आकर न्याय की गुहार की। धारा 452, 354 और पॉक्सो एक्ट की 8 और 12 धारा में जुर्म दर्ज होने पर भी आरोपी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

    ध्यान न देने और डांटने पर बच्चे भी शेयर नहीं करते हैं प्रॉब्लम
    चाइल्ड लाइन से जुड़ी मनीषा शर्मा बताती हैं कि जब पेरेंट बच्चों की बातों को गंभीरता से नहीं लेते हैं तो बच्चे भी उन्हें अपनी समस्याएं बताना बंद कर देते हैं। अगर अभिभावकों और बच्चों के बीच संवाद न हो तो यह बड़ी परेशानी है। पैरेंट अगर बच्चों को टाइम नहीं देंगे तो उनकी समस्याएं फिर कौन सुनेगा। सरकारी संस्थाओं को भी इस मामले में अभिभावकों की जागरूकता बढ़ाने पर व्यापक काम करना होगा।

    अधिकतर स्कूल वाहनों में महिला स्टाफ ही नहीं है
    राजधानी में संचालित अधिकतर स्कूल वाहनों में महिला स्टॉफ नहीं रखे गए हैं। जबकि नियमों के मुताबिक बच्चों और लड़कियों के स्कूल बस में महिलाकर्मी होनी चाहिए। कई बड़े स्कूल प्रबंधन की तरफ से ऐसी लापरवाही बरती जा रही है। इसे लेकर न तो शिक्षा विभाग न ही पुलिस और जिला प्रशासन को कोई ध्यान दे रहा है। जबकि देखने में आता है कि स्कूल बस और वैन में छोटे बच्चों के साथ लड़कियां आती-जाती है।

    घटना से उनके व्यवहार में दिखाई देता है बदलाव
    छग राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के मुताबिक पूछताछ और सर्वे में पाया गया है कि जब कभी बच्चे के साथ इस तरह की कोई भी घटना होती है, तो सबसे पहले उसके व्यवहार में बदलाव आता है। घर हो या स्कूल बच्चा कटा- कटा रहने लगता है। वह अपने साथी बच्चों और परिवार के साथ भी घुलता-मिलता नहीं है। ऐसी स्थिति में ये उससे जुड़े हर शख्स की ये जिम्मेदारी बनती है कि वो बच्चे के वक्त देकर उसकी समस्याओं को सुने। उसके गुमसुम रहने की वजह को जानने की कोशिश करनी चाहिए। बच्चे परिवार हो या घर खुलकर अपनी बात कह सकें उन्हें ऐसा माहौल देना चाहिए।


    वे खुद भी कर सकते हैं शिकायत, तत्काल कार्रवाई
    आयोग के मुताबिक छग में ऐसी व्यवस्था बनाई गई है कि कोई भी बच्चा अपनी शिकायत हेल्पलाइन के माध्यम से या मन की बात की पेटियों तक खुद भी कर सकता है। यही नहीं राजधानी में ये पेटियां ऐसी जगहों पर लगाई गई हैं, जहां पर सीसीटीवी कैमरा न लगा हो, ऐसे सार्वजनिक स्थलों के चयन के पीछे अहम वजह ये है कि कोई भी बच्चा बिना किसी डर के मन की बात की पेटी तक अपनी शिकायतें पहुंचा सके।


    नाबालिगों के खिलाफ अपराध बढ़े, पॉक्सो के ज्यादा मामले
    पिछले कुछ सालों के दौरान नाबालिगों के खिलाफ होने वाले अपराधों की संख्या बढ़ी है। राजधानी में महीने में करीब एक दर्जन मामले सामने आ रहे हैं। 2015-16 में पूरे प्रदेश में पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत जहां आयोग के समक्ष जहां केवल 7 शिकायतें आई थी। वो 2017-18 में बढ़कर 72 हो गई है। इस दौरान कुल 1066 शिकायतों में करीब 7 फीसदी पॉक्सो की थी। बाल चौपाल जैसी मुहिम में बच्चों के अभिभावकों के साथ पड़ोसियों को भी जोड़ा है, ताकि बच्चों के खिलाफ अपराध को रोका जा सके।

Topics:
India Result 2018: Check BSEB 10th Result, BSEB 12th Result, RBSE 10th Result, RBSE 12th Result, UK Board 10th Result, UK Board 12th Result, JAC 10th Result, JAC 12th Result, CBSE 10th Result, CBSE 12th Result, Maharashtra Board SSC Result and Maharashtra Board HSC Result Online

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Raipur News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: Child Rights Protection Commission Survey
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×