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क्रिसमस, नए साल का जश्न मनेगा प्राकृतिक और पुरात्विक स्थलों पर

Raipur News - 25 दिसंबर से पहले ही गिरजाघरों में क्रिसमस की रौनक दिखने लगी है। दूसरी तरफ, नए साल के जश्न की तैयारियां भी शुरू हो गई...

Dainik Bhaskar

Dec 08, 2018, 03:20 AM IST
Raipur News - christmas celebrating new year at mannega natural and archaeological sites
25 दिसंबर से पहले ही गिरजाघरों में क्रिसमस की रौनक दिखने लगी है। दूसरी तरफ, नए साल के जश्न की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। इस बार भी प्रदेश के पर्यटन स्थलों में लोगों की भीड़ उमड़ेगी। प्रदेश के कई पर्यटन स्थलों में तो अभी से सैलानी पहुंचने लगे हैं। इसे देखते पर्यटन विभाग ने होटल-मोटल से लेकर सुविधा केंद्रों में इंतजाम पुख्ता कर लिए हैं। एक जानकारी के मुताबिक छत्तीसगढ़ के अलग-अलग पर्यटन स्थलों में इस साल अप्रैल से अक्टूबर के बीच 88,71,449 लोकल और 3,900 विदेशी सैलानी पहुंचे हैं।

पर्यटन विभाग में अभी से गंगरेल, चित्रकोट और मैनपाट में नया साल मनाने लोगों ने बुकिंग करवाना शुरू कर दिया है। इस साल सबसे ज्यादा डिमांड जंगल सफारी, गंगरेल बांध, चित्रकोट जलप्रपात जैसे प्राकृतिक सौंदर्य के जगहों की है। वहीं धार्मिक और पुरातात्विक महत्व वाले केंद्रों में भी लोग पर्यटन विभाग में होटल-मोटल बुक करवाने के लिए संपर्क कर रहे हैं। जहां पर्यटन विभाग की व्यवस्था नहीं है, वहां ऑनलाइन बुकिंग के जरिए निजी होटल बुक करवाए जा रहे हैं। दूसरी तरफ, वन विभाग ने भी नए साल को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं। जंगल सफारी में इस साल वाइट टाइगर आकर्षण का केंद्र रहेगा। नंदनवन में विदेशी परिंदे आकर्षण का केंद्र बनेंगे। इन दोनों जगहों के लिए भी वन विभाग में ऑनलाइन बुकिंग हो रही है। दूसरी तरफ, गिरजाघरों में भी 25 दिसंबर को प्रभु यीशु का जन्मोत्सव मनाने के बाद नए साल की खुशी में हफ्तेभर विविध कार्यक्रम होेंगे। 31 दिसंबर की रात 12 बजे केक काटकर नए साल का जश्न मनाया जाएगा।

पर्यटन विभाग से संपर्क कर आप भी करा सकते हैं बुकिंग

पर्यटन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ तेजी से आगे बढ़ रहा है। बाहरी राज्यों से आने वाले सैलानियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में पर्यटन स्थलों में लोग पहले से ही बाग-बगीचों और अभ्यारण्योें में एंट्री, होटल में ठहरने आदि की बुकिंग करवा रहे हैं। आप भी पर्यटन विभाग में ऑनलाइन बुकिंग करवा सकते हैं। इसके लिए आप टोल फ्री नंबर 18001026415 पर संपर्क कर सकते हैं। पर्यटन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक बिलासपुर के कानन पेंडारी, नंदनवन स्थित विदेशी पक्षी विहार, भिलाई के मैत्री बाग, बारनवापारा, अचानकमार, उदंती सीतानदी, इंद्रावती टाइगर रिजर्व, जगदलपुर, चित्रकोट जैसे पर्यटक स्थलों के लिए टिकट बुक किए जा रहे हैं। मैनपाट, सरोदा दादर और आमाडोम जाने के लिए भी लोग फोन पर जानकारी ले रहे हैं।

जंगल सफारी

राजधानी से 25 किमी दूर नया रायपुर में 800 एकड़ जमीन में फैला है। यह एशिया की सबसे बड़ी मानव निर्मित जंगल सफारी है।

गंगरेल डैम

धमतरी से 13 किमी दूर स्थित। गंगरेल के नाम से जानते हैं। पिकनिक स्थल के रूप में विकसित हो चुका है।

मैनपाट

अंबिकापुर से 75 किमी दूर। छत्तीसगढ़ का शिमला भी कहा जाता है। प्राकृतिक सौंदर्य के लिए काफी प्रसिद्ध है।

चित्रकोट वॉटरफाॅल

यहां 90 फीट की ऊंचाई से इंद्रावती नदी नीचे गिरती है। घोड़े के नाल की तरह होने की वजह से भारत का नियाग्रा भी कहते हैं।

रतनपुर

मां महामाया शक्तिपीठ की स्थापना यहां कल्चुरी नरेश र|सेन ने की थी। अनेकों पुराने मंदिर, जलाशय और प्राचीन किले दिखेंगे।

सिरपुर

5वीं से 8 वीं सदी के मध्य यह दक्षिण कोशल की राजधानी था। हजार वर्ष पुराना ईंटों से बना लक्ष्मण, गंधेश्वर महादेव मंदिर आकर्षण।

डोंगरगढ़

राजनांदगांव से 59 किमी दूर। पहाड़ी के ऊपर मां बम्लेश्वरी का विशाल मंदिर है। मंदिर का निर्माण राजा कामसेन ने करवाया था।

जगदलपुर

राजमहल और उसमें स्थित माई दंतेश्वरी का मंदिर यहां का सबसे पवित्र स्थल है। आदिवासियों की संस्कृतिधानी भी मानी जाती है।

सिहावा

शृंगी ऋषि पर्वत से प्रदेश की जीवनदायिनी महानदी का उद्गम हुआ। कर्णेश्वर महादेव, मातागुड़ी, मोखला मांझी व भिंबा महाराज मंदिर प्रमुख हैं।

पाली

यह बिलासपुर जिले में स्थित है। यहां का 9 वीं शताब्दी का शिव मंदिर प्रसिद्ध है।

प्राकृतिक, आध्यात्मिक और पुरातात्विक महत्व वाले प्रदेश के इन पर्यटन स्थलों पर नए साल का जश्न मनाने जुटेंगे सैलानी

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