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मानसिक विकलांगता दिवस पर हुआ डांस, सिंगिंग और ड्रामा। स्पेशल बच्चों ने भी दी परफॉर्मैंस

Raipur News - अवंति विहार स्थित आकांक्षा स्कूल में शनिवार को मानसिक विकलांगता दिवस सेलिब्रेट किया गया। कार्यक्रम में स्पेशल...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 03:02 AM IST
Raipur News - dance singing and drama on mental disability day special children also gave the performance
अवंति विहार स्थित आकांक्षा स्कूल में शनिवार को मानसिक विकलांगता दिवस सेलिब्रेट किया गया। कार्यक्रम में स्पेशल बच्चों ने सॉन्ग्स और डांस परफॉर्म कर अपना हुनर दिखाया। शुरुआत में किरण साहू और उनकी बेटी ने फ्यूजन डांस परफॉर्म किया। बीएड के स्टूडेंट कोमल वरू एंड ग्रुप ने त्रेता युग से लेकर अब तक दिव्यांगों की जिंदगी कैसे बदली, उनसे जुड़ी गौरवगाथा और दयनीय स्थिति को एक्ट में 8 सीन के जरिए पेश किया। कार्यक्रम में केके नायक, साधना नायक, शीला पिल्लई, नागपाल, अमृत मजूमदार, प्रतिष्ठा शुक्ला व अन्य मौजूद रहे।

8 सीन में पिरोई दिव्यांगों की बदलती स्थिति और उनकी गौरवगाथा

त्रेता युग: एक्ट की शुरुआत त्रेता युग से होती है। राजा दशरथ अपनी तीनों रानियों के साथ बैठे हैं। मंथरा जिनके कूबड़ निकले हुए थे, वो कैकेयी के पास आती हैं और राम को वनवास देने व भरत को राजा बनाने के लिए कहती हैं। इसके बाद राम वनवास पर चले जाते हैं।

ऋषि अष्टावक्र : दूसरे सीन में ऋषि अष्टावक्र की कहानी दिखाई गई, उनके शरीर के 8 अंग टेढ़े थे। वे कहोड़ के पुत्र थे। अष्टावक्र जब 7 महीने के गर्भ में थे, तब गर्भ में रहते हुए ही उन्होंने पिता को उनके एक श्लोक में गलती करने की बात कह दी थी। पिता कहोड़ ने ये कहते हुए उसे श्राप दिया था कि जन्म से पहले ही पिता को बेइज्जत कर रहे हो, तुम्हारे शरीर के 8 अंग टेढ़े होंगे। शारीरिक कमजोरी के बावजूद वे बड़े ज्ञानी हुए और राजा जनक के राज गुरु बने।

सुदामा: तीसरा सीन द्वापर युग का था। इसमें सुदामा के बारे में बताया गया। शारीरिक रूप से कमजोर और कुपोषित सुदामा कृष्ण के परम मित्र थे। उनका जीवन ऐसा था कि जो मिल जाता वही खा लेते या भूखे ही सो जाते। उन्होंने कभी श्रीकृष्ण से कुछ मांगने की इच्छा नहीं रखी। प|ी के कहने पर वे कृष्ण के पास गए।

राजा धृतराष्ट: चौथा सीन भी द्वापर युग का रहा। इसमें नेत्रहीन राजा धृतराष्ट्र का विवाह राजकुमारी गांधारी से दिखाया गया। जिंदगीभर अपनी आंखों पर पट्टी बांधने वाली गांधारी का त्याग भी दिखाया गया।

चाणक्य: पांचवें सीन में चाणक्य की कहानी दिखाई गई। उन्होंने मौर्य साम्राज्य की स्थापना में प्रमुख भूमिका निभाई और महाज्ञानी कहलाए। ऐसा माना जाता है कि चाणक्य ने ऐसी नीति बनाई जिसमें दिव्यांगों के लिए कहे जाने वाले बुरे शब्दों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। सामाजिकरण के लिए भी उन्होंने नीतियां बनाई थीं।

सूरदास: छठवें सीन में 16वीं शताब्दी के कवि हिन्दी साहित्य के सूर्य सूरदास के बारे में बताया गया। वे जन्म से नेत्रहीन थे। उन्होंने विभिन्न रसों में कृष्ण के शृंगार का वर्णन किया।

हिटलर: सातवें सीन में हिटलर की तानाशाही दिखाई गई। ऐसा बताया गया कि हिटलर ने दिव्यागों को सेना में भर्ती करने से इंकार करते हुए उनका नरसंहार करने का आदेश दिया था।

वर्तमान: दिव्यांगों की वर्तमान स्थिति दिखाई गई। विकलांग के बजाय अब उन्हें दिव्यांग कहकर संबाेधित किया जाता है। कई सुविधाएं दी जा रही हैं। गवर्नमेंट जॉब में आरक्षण दिया जा रहा है। नेत्रहीनों की मदद के लिए ऐसा डिवाइस और डॉल डेवलप की जा रही है, जो उन्हें रास्ता दिखाएगी।

हिटलर ने दिव्यांगों को मारने का दिया था आदेश चाणक्य ने की थी बराबरी का दर्जा देने की पहल

द्वापर युग और सुदामा की कहानी का सीन

धृतराष्ट्र और गांधारी के बीच बातचीत...

मां-बेटी ने परफॉर्म किया फ्यूजन डांस

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