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असिस्टेंट प्रोफेसर ने डायरेक्टर पर लगाया आराेप, कहा- बलि का बकरा बना रहे हैं मुझे

एम्स मोतियाबिंद कांड : डायरेक्टर ने असिस्टेंट प्राेफेसर पर की कार्रवाई की अनुशंसा।

पीलू राम साहू | Last Modified - May 01, 2018, 11:22 AM IST

  • असिस्टेंट प्रोफेसर ने डायरेक्टर पर लगाया आराेप, कहा- बलि का बकरा बना रहे हैं मुझे
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    डॉक्टर लिपी चक्रवर्ती।

    रायपुर। एम्स में मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद पांच लोगों की आखों में संक्रमण की जांच के लिए बनी कमेटी ने नेत्र सर्जन डॉ. लिपि चक्रवर्ती को जिम्मेदार ठहराया है। एम्स के डायरेक्टर डॉ. नितिन एम. नागरकर ने कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से नेत्र सर्जन डॉ. लिपि चक्रवर्ती पर कार्रवाई की अनुशंसा कर दी है। नागरकर का कहना है कि ऑपरेशन के दौरान सर्जन ने तय प्रोटोकाल का पालन नहीं किया, इसलिए लोगों की आंखों में संक्रमण फैला। दूसरी ओर डॉक्टर लिपि ने जूनियर होने के नाते खुद को बलि का बकरा बनाने की बात कही है। इस बयान के बाद जांच रिपोर्ट पर विवाद गहरा गया है।

    - डॉ. लिपि का आरोप है कि आपरेशन में 1 सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर एकता ने भी सहयोग किया था, बावजूद उनके खिलाफ कोई करवाई नही की गई है।

    - एम्स में पांच लोगों की आंखों में संक्रमण फैलने के बाद 9 अप्रैल को चार सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी। कमेटी ने आखिर 13 दिन बाद एम्स के डायरेक्टर को जांच रिपोर्ट सौंप दी है। कमेटी की रिपोर्ट अब विवादों में है।

    - नागरकर ने कहा कि ओटी में कोई बैक्टीरिया नहीं मिला। दवा में कुछ बैक्टीरिया मिला है, लेकिन प्रारंभिक जांच में नेत्र सर्जन डॉ. लिपि की लापरवाही सामने आई है। उन्होंने ऑपरेशन के पहले व बाद में तय प्रोटोकाल का पालन नहीं किया। इसलिए लोगों की आंखों में संक्रमण फैला।

    - डॉ. लिपि के ऑपरेशन करने पर भी रोक लगा दी गई है।

    - कमेटी में डीन डॉ. एसपी धनेरिया अध्यक्ष, सदस्यों में नेत्र रोग विभाग की एडिशनल प्रोफेसर डॉ. लुबना खान, माइक्रो बायोलॉजी विभाग की एचओडी डॉ. पद्मा दास व पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. नितिन बोरकर थे। कमेटी में शामिल डॉ. लुबना उसी यूनिट तीन की हेड हैं, जिसमें डॉ. लिपि चक्रवर्ती हैं।

    - ऑपरेशन के दौरान डॉ. लुबना एम्स में नहीं थीं। इसलिए ऑपरेशन डॉ. लिपि को करना पड़ा। कमेटी ने डॉक्टर, नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ के अलावा मोतियाबिंद के मरीज व उनके परिजनों से बातचीत कर रिपोर्ट बनाई है। कमेटी के अध्यक्ष डॉ. धनेरिया ने बताया कि उन्होंने सभी पक्षों से बातचीत की है।

    - ऑपरेशन में खर्च हुए 70 हजार रुपए का भुगतान एम्स ने कर दिया है, लेकिन फालोअप में जा रहे मरीजों को खुद बिल चुकाना पड़ रहा है। मरीजों ने इसकी शिकायत की है।


    ओटी में कमियां, कर चुकी हूं शिकायत


    - इसी साल मार्च में एम्स ज्वाॅइन करने वाली नेत्र रोग विभाग की असिस्टेंट सर्जन डॉ. लिपि का आरोप है कि आई ओटी में कई खामियां है। इसके कारण ऑपरेशन के दौरान संक्रमण की आशंका बनी रहती है। उन्होंने इसकी शिकायत एचओडी से लेकर यूनिट हेड व दूसरे अधिकारियों से की थी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।

    - उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ओटी सही है तो अभी तक सील क्यों किया गया है? मरीजों का ऑपरेशन क्यों नहीं किया जा रहा है? एम्स ने अपनी नाक बचाने के लिए मुझ जूनियर डाॅक्टर को बली का बकरा बनाया गया है।

    - अमृत फार्मेसी ने भी ऑपरेशन के दौरान उपयोग की गई दवाइयों को गायब कर दिया। आखिर संक्रमण के लिए दवा भी जिम्मेदार हो सकता है, लेकिन मुझे ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है?


    डा. लिपि के आरोपों में दम

    - नेत्र सर्जन डा. लिपि ने ओटी को मरीजों के ऑपरेशन के लिए खतरनाक बताया है। इनके आरोप में दम भी लग रहा है, क्योंकि एम्स प्रशासन सील ओटी को अभी नहीं खाेल रहा है। बल्कि ओटी का रेनोवेशन कराएगा। कुछ निर्माण कार्य भी किया जाएगा, जिससे ओटी आइसोलेटेड हो सके और संक्रमण की बिल्कुल भी आशंका न रहे। इसकी पुष्टि मेडिकल अधीक्षक डॉ. अजय दानी ने की है।


    यह है पूरा मामला


    - 5 अप्रैल को एम्स में रामकृष्ण सोनी 67, कुशाल सिंह 58, मानवेंद्र बनवाल 67, तिलक कोठारे 69 व योगेश पांडेय 67 के मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया था। नेत्र रोग विभाग की एडिशनल प्रोफेसर डॉ. लुब्ना खान की यूनिट की डॉ. लिपि ने मरीजों का ऑपरेशन सुबह 11 बजे किया था। शाम 4 बजे के बाद ही मरीजों ने आंख में दर्द की शिकायत कर दी थी, लेकिन डॉक्टरों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया था।

    - ऑपरेशन के बाद दर्द होता है, कुछ देर में ठीक हो जाएगा कहकर मरीजों की बात टाल दी थी। जब 6 अप्रैल को आंख से पट्‌टी खोली गई तो आंखों में सूजन आ गया था और लाल हो गई थी।

    - इसके बाद आनन-फानन में मरीजों का फिर ऑपरेशन किया गया। इसके बाद भी आंखों में कोई सुधार नहीं हुआ और मरीजों को 7 अप्रैल को डिस्चार्ज कर दिया गया। मरीज अपने साधन से विधानसभा रोड स्थित निजी अस्पताल गए।


    सीधी बात


    डॉ. नितिन एम. नागरकर, डायरेक्टर एम्स


    सवाल- मोतियाबिंद कांड के लिए गठित रिपोर्ट में आखिर क्या है?
    जवाब- कमेटी ने नेत्र सर्जन को दोषी ठहराया है। सर्जन ने जरूरी प्रोटोकाल का पालन नहीं किया।
    सवाल-तो क्या ऑपरेशन थिएटर में कोई बैक्टीरिया नहीं मिला?
    जवाब- कल्चर जांच में ओटी को क्लीनचिट मिली है।
    सवाल- तो दोषी डाक्टर के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी?
    जवाब- केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को कार्रवाई करने की अनुशंसा की गई है।


  • असिस्टेंट प्रोफेसर ने डायरेक्टर पर लगाया आराेप, कहा- बलि का बकरा बना रहे हैं मुझे
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    ऑपरेशन के बाद खराब आंखों के साथ एक पीड़ित।
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