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जनपद और दो पंचायतों को पुरस्कार पर हकीकत में टॉयलेट बने ही नहीं

अफसरों ने कागजों में हेराफेरी का झूठा दावा करते हुए ये पुरस्कार ले लिया है।

Bhaskar News | Last Modified - May 01, 2018, 07:58 AM IST

  • जनपद और दो पंचायतों को पुरस्कार पर हकीकत में टॉयलेट बने ही नहीं

    खडगवां.जनपद पंचायत और यहां की दो पंचायतों जरौंधा और गढ़तर को उत्कृष्ट कार्यों के लिए हाल ही में 24 अप्रैल को मध्यप्रदेश के रामनगर में आयोजित एक समारोह में पं. दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार मिला। इसके तहत जनपद पंचायत को 25 लाख और ग्राम पंचायतों को 10-10 लाख रुपए के पुरस्कार दिए गए। लेकिन जिन पंचायतों को उत्कृष्टता पुरस्कार दिए गए हैं, वहां मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं।


    गांव के दर्जनों लोगों के टाॅयलेट तक पूरे नहीं बने हैं। अफसरों ने कागजों में हेराफेरी का झूठा दावा करते हुए ये पुरस्कार ले लिया है। पुरस्कार मिलने के बाद भास्कर ने गांवों की पड़ताल की तो चौंकाने वाली जमीनी हकीकत सामने आई। गांवों में सुविधाओं की पड़ताल करने के लिए भास्कर टीम ग्राम जरौंधा पहुंची तो यहां न ताे कहीं विकास दिखाई दिया और न ही ऐसा कोई कारण नजर आया, जिससे पंचायत को उत्कृष्टता पुरस्कार मिलना चाहिए। पंचायत के कारीछापर के काशी प्रसाद का ने बताया कि उसका टॉयलेट अधूरा पड़ा हुआ है। जिसका पाइप शुरू से ही टूटा है। ईंट की कमी से टॉयलेट के पीछे की टंकी भी अधूरी थी। काशी प्रसाद का कहना है कि जल्दबाजी में टेंपरेरी काम किया गया था।

    जनपद पंचायत खडगवां के बीडीसी जयकुंवर के घर का पता मिला। लोगों ने बताया सबका टॉयलेट बन गया मगर बीडीसी के घर का टॉयलेट भी अधूरा है। भास्कर टीम उसके घर पहुंची तो वहां मौजूद सदन सिंह ने बताया कि उसके घर के टाॅयलेट को सरपंच ने नहीं बनने दिया। कई बार कहने के बाद भी वह नहीं बनबा रहे और न ही बनाने के लिए मिस्त्री का इंततजाम कर रहे। वहीं कारीछापर मे 5-8 घर है जिसमें से आधे घरों के ही टाॅयलेट बनेे हैं।

    गांव की सड़कें भी बदहाल
    कारीछापर, भुजबलडांड़ ग्राम पंचायत जरौंधा के सुदर सीमावर्ती इलाका है। जहां से आगे मातीन पंचायत जिला कोरबा लग जाता है। इन पारा मोहल्लों मे जगह-जगह पर पुल तो दिखे, लेकिन कहीं पक्की सड़क नहीं दिखी। जिससे लोग आसानी से आवाजाही कर सकें और जीवन सुगम बना सकें।


    उत्कृष्ट पुरस्कार के लिए ये हैं मापदंड
    जनपद सीईओ मनोहर लाल ने बताया कि आवार्ड के लिए रिकार्ड संधारण, समय-समय पर बैठक आयोजित करना, पंचायत की छः समिति की नियमित बैठक आयोजित करना। आय-व्यय का लेखा-जोखा, कार्यालय संचालन, शिकायत का निराकरण समय पर पूरा करना मापदंड हैं। इन पंचायतों में विधिवत काम कर 16 प्रकार की पंजियों का संधारण समय पर किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि कागजी कार्रवाई करते हुए पंचायतों को अफसरों ने उत्कृष्ट बताया गया है। जबिक वास्तव में यहां मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं।


    विकास कार्यों में खर्च होगी पुरस्कार की राशि
    जनपद पंचायत अध्यक्ष हृदय सिंह, उपाध्यक्ष अशोक जायसवाल ग्राम पंचायत गढ़तर के सरपंच राजकुमार, ग्राम पंचायत जरौंधा के सरपंच सुकवरिया, सीईओ जनपद पंचायत खडगवां मनोहर लाल वर्मा ने बताया कि पुरस्कार की राशि ग्राम पंचायत एवं जनपद पंचायत में निर्णय लेकर विकास कार्यों मे खर्च किया जाएगा। गांव की जरूरतों के हिसाब से वहां कार्य कराए जाएंगे।


    सीईअो बोले- 8 माह पहले ओडीएफ घोषित

    सीईओ मनोहर लाल वर्मा ने बताया कि दोनों पंचायत ओडीएफ हो चुक हैं। इन्हें करीब 8 माह पहले ही ओडीएफ घोषित किया गया था। वहीं सरपंच जरौंधा सुकवरिया ने बताया 6-8 महिने पहले उनकी पंचायत ओडीएफ घोषित हो गई थी। जो नए घर बने हैं उनमें टाॅयलेट का निर्माण कराया जा रहा है।

    कहीं टंकी अधूरी तो कहीं ईटें कम पड़ी
    गांव की मानमती ने बताया उनके घर में टाॅयलेट तो बन गया है, लेकिनप टंकी के लिए ईटें कम पड़ गई थीं। जिससे के कारण नहीं नहीं बन सकी। नाहर सिंह के टाॅयलेट का टैंक भी अधूरा है। इसके लिए गड्ढा तो खोदा गया पर ईंट, रेत, सीमेंट घट कम पड़ गई थी। भुजबलडांड़ के देवनारायण का टाॅयलेट भी अधूरा था। उसने बताया कि मिस्त्रियों को मजदूरी नहीं मिली तो वे काम अधूरा छोड़कर भाग गए।

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