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अंबेडकर में कॉल पर नहीं आते डीके के डाॅक्टर / अंबेडकर में कॉल पर नहीं आते डीके के डाॅक्टर

Bhaskar News Network

Dec 08, 2018, 03:21 AM IST

Raipur News - अंबेडकर अस्पताल में ट्रामा सेंटर और सिर का इलाज डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में होना अब मरीजों के लिए खतरनाक...

Raipur News - dk doctor not coming to call in ambedkar
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अंबेडकर अस्पताल में ट्रामा सेंटर और सिर का इलाज डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में होना अब मरीजों के लिए खतरनाक होता जा रहा है। घायल मरीजों को सीधे अंबेडकर अस्पताल लाया जाता है। ट्रामा सेंटर में हाथ-पांव और पेट की चोट का इलाज तो किया जाता है, लेकिन सिर की चोट से घायल मरीजों का इलाज करने डीकेएस से न्यूरो सर्जन को बुलाया जाता है।

बुलावे पर डाक्टर तुरंत नहीं आते। इससे मरीजों के इलाज पर असर पड़ रहा है। कई बार अंबेडकर अस्पताल के डाक्टर हाथ-पांव का इलाज कर कई-कई घंटे तक सिर के डाक्टर का इंतजार करते रहते हैं, लेकिन कोई नहीं आता। एंबुलेंस तक समय पर नहीं आती। इससे नाराज डाक्टरों ने अस्पताल अधीक्षक से शिकायत कर दी है। अस्पताल अधीक्षक डा. विवेक चौधरी के हस्तक्षेप के बाद डीकेएस में शुक्रवार को डाक्टरों की बैठक बुलायी गई। उसमें अंबेडकर अस्पताल के साथ-साथ डीकेएस के डाक्टर शामिल हुए। बैठक में डाक्टरों ने जमकर अपनी भड़ास निकाली। जनरल सर्जरी के डॉक्टरों का कहना है कि सिर में गंभीर चोट के मरीजों का इलाज न्यूरो सर्जन को करना चाहिए, लेकिन वे अंबेडकर अस्पताल में भर्ती मरीजों को देखते तक नहीं आते। बैठक में जनरल सर्जरी, न्यूरो सर्जरी, ऑर्थोपीडिक, पैथालॉजी व सभी आपातकालीन चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) शामिल हुए। डॉक्टरों ने कहा कि सड़क दुर्घटना में पेट, पैर व ब्रेन में चोट वाले मरीज सबसे ज्यादा आते हैं। पेट की चोट जनरल सर्जन व पैर की चोट अथवा हड्डी फ्रैक्चर वाले मरीजों का इलाज ऑर्थोपीडिक सर्जन कर रहे हैं। ब्रेन की चोट भी जनरल सर्जन के जिम्मे है। न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉक्टरों को सूचना देने के बावजूद वे मरीज को समय पर आकर नहीं देखते। इससे कई बार मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है।



डॉक्टरों का कहना है कि वे सिर में चोट वाले मरीजों का सीटी स्कैन करवाते हैं, लेकिन रात में हुई जांच की रिपोर्ट सुबह आती है। ऐसे में वे फिल्म देखकर यह नहीं बता सकते कि ब्रेन में कितनी चोट है। वे रिपोर्ट देखकर ही ब्रेन की चोट के बारे में बता सकते हैं। हालांकि मरीज की स्थिति स्थिर करने के लिए इलाज किया जा रहा है। न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉक्टरों का कहना था कि वे हेड इंजुरी वाले केस को बराबर देख रहे हैं। जरूरत पड़ने पर जनरल सर्जरी के जूडो को जरूरी निर्देश भी देते हैं। गौरतलब है कि महीनेभर पहले हुई बैठक में हेड इंजुरी यानी सिर की चोट के गंभीर मरीजों को अंबेडकर में भर्ती कर इलाज करने का निर्णय लिया गया था। उसमें ये भी कहा गया था, जब तक मरीज की स्थिति में सुधार नहीं आ जाता, उन्हें डीके रिफर न किया जाए। मरीज को डिस्चार्ज करने के बाद डीकेएस भेजा जाए।

सीएमओ भी परेशान मिले अधीक्षक से

अंबेडकर अस्पताल के आपात चिकित्सा अधिकारी सीएमओ भी ट्रामा सेंटर की व्यवस्था से नाराज हैं। दो दिन पहले उन्होंने अस्पताल अधीक्षक विवेक चौधरी से भेंटकर ट्रामा में इलाज में आ रही दिक्कतों का ब्योरा दिया था। सीएमओ की शिकायत सुनने के बाद ही अस्पताल अधीक्षक ने हस्तक्षेप किया और शुक्रवार को डीके में बैठक की गई। ट्रामा में आने वाले सिर की चोट के मरीजों का इलाज व जरूरी ऑपरेशन सीएमआे के निर्देश पर होना है। सीएमओ की शिकायत है कि कई बार मरीजों को डीके रिफर करने के लिए समय पर एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती।

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