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मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की होगी सीधी भर्ती, पॉलिसी बदलने लिखी चिट्‌ठी

राज्य के 6 मेडिकल कॉलेजों में संविदा में सेवाएं दे रहे 52 डॉक्टर नौकरी छोड़कर दूसरे राज्यों में जाने वाले हैं।

Dainik Bhaskar

May 18, 2018, 08:01 AM IST
doctors will be directly recruited in Medical colleges

रायपुर. राज्य के मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की नियमित भर्ती का सिस्टम बदलने के प्रयास तेज हो गए हैं। इसे लेकर विभाग की तरफ से शासन को चिट्‌ठी लिखी गई है। शुक्रवार को स्वास्थ्य सचिव ने निहारिका बारीक ने आनन-फानन में राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों के डीन की बैठक बुलाई है। मीटिंग में भर्ती की नई पॉलिसी को अंतिम रूप दिया जा सकता है। उसके बाद नए नियम में भर्ती का अधिकार स्वशासी कमेटी को होगा।

कमेटी के अध्यक्ष संभाग कमिश्नर व सचिव मेडिकल कॉलेज के डीन होंगे। अधिकारियों का दावा है कि नए सिस्टम से कॉलेजों में बिना देरी किए डॉक्टरों की भर्ती होने लगेगी। इससे मेडिकल कॉलेजों की मान्यता बचाने में मदद मिलेगी। नया सिस्टम मध्यप्रदेश के मेडिकल कॉलेजों की तर्ज पर होगा। इसे लेकर नियमित डॉक्टर विरोध में आ गए हैं, वे हाईकोर्ट जाने की तैयारी में हैं।


52 डॉक्टर नौकरी छोड़कर दूसरे राज्यों में जाने वाले हैं

राज्य के 6 मेडिकल कॉलेजों में संविदा में सेवाएं दे रहे 52 डॉक्टर नौकरी छोड़कर दूसरे राज्यों में जाने वाले हैं। उन्होंने कॉलेज प्रबंधन से एनओसी मांगी है। एक साथ 52 डॉक्टरों ने जब एनओसी मांगी तब अफसरों का ध्यान उनकी ओर गया। कारण पता चला कि मप्र और ओडिशा सहित आस-पास के ही दूसरे राज्यों में मेडिकल कॉलेजों की स्वशासी समिति के माध्यम से डॉक्टरों की भर्ती की जा रही है। इन राज्यों के कुछ कॉलेजों के खास विभागों में तो केवल इंटरव्यू से ही चयन कर नियमित पोस्टिंग दी जा रही है। आसानी से नियमित नौकरी मिलने कारण ही डॉक्टर वहां जा रहे हैं। यहां अभी तक जितने भी डॉक्टरों ने नौकरी छोड़ने की तैयारी की है, उनमें ज्यादातर को संविदा में सेवाएं देते हुए आठ से 10 साल हो चुके हैं।

लगभग सभी डॉक्टरों ने पीएससी से नियमित नौकरी पाने के प्रयास किए पर सफलता नहीं मिली। दरअसल आयोग से भर्ती का सिस्टम कठिन है। लिखित परीक्षा के साथ इंटरव्यू में भी अच्छे नंबर आने पर ही पोस्टिंग होती है। लेकिन पद कम होने से ज्यादा डॉक्टरों को मौका नहीं मिलता। यही वजह है कि यहां के डॉक्टर नौकरी के लिए मप्र और ओडिशा जा रहे हैं। अब इन डॉक्टरों को रोकने के लिए भर्ती की पॉलिसी बदलने के प्रयास तेज हो गए हैं।

मेडिकल कॉलेजों में 500 पद खाली
राज्य के मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों के 500 से ज्यादा पद खाली है। असिस्टेंट प्रोफेसर, सीनियर रेसीडेंट, रजिस्ट्रार, जूनियर रजिस्ट्रार व डेमोस्ट्रेटर की भर्ती लोक सेवा आयोग करता है। अभी तक 2003, 2010, 2015 अौर 2017 में डॉक्टरों की भर्ती पीएससी से हुई है। कई बार भर्ती प्रक्रिया में देरी होने की वजह से मेडिकल कॉलेज की मान्यता खतरे में पड़ जाती है। अब स्वशासी समिति को भर्ती का अधिकार मिल जाने से कागजी प्रक्रिया में देरी की संभावना खत्म हो जाएगी। डॉक्टरों को वेतन स्वशासी मद से मिलेगा। इसमें डॉक्टरों का तबादला भी नहीं होगा। जिस कॉलेज में वे नियुक्त किए जाएंगे, वे वहीं से रिटायर होंगे।

टीचर एसोसिएशन ने दिया ज्ञापन
स्वशासी समिति से संविदा डॉक्टरों को नियमित भर्ती करने का मेडिकल टीचर एसोसिएशन ने विरोध किया है। मुख्य सचिव, स्वास्थ्य सचिव व डीएमई को ज्ञापन सौंपकर समिति से नियमित भर्ती को रेगुलर डॉक्टरों के हित के खिलाफ बताया है। नई भर्ती में प्रमोशन वाले पदों की भी सीधी भर्ती की जाएगी, जिससे नियमित डॉक्टरों का प्रमोशन अटक जाएगा। मप्र में यह लागू करने के बाद भी मेडिकल कॉलेजों में कमी दूर नहीं हो पाई।

डॉक्टरों की कमी दूर करना जरूरी
स्वास्थ्य सचिव निहारिका बारीक ने बताया कि स्वशासी समिति से नियमित डॉक्टरों की भर्ती पर चर्चा करने के लिए शुक्रवार को सभी डीन की बैठक बुलाई गई है। बैठक में तय होगा कि नया प्रस्ताव कितना कारगर है। मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों की कमी दूर करना जरूरी है।

नए मेडिकल कॉलेज होने से अवसर बढ़े वहां
मप्र और ओडिशा में नए मेडिकल कॉलेज खुल रह हैं। मप्र में इसी साल 7 कॉलेज आकार ले रहे हैं। सभी कॉलेज स्वशासी हैं। इसी वजह से वहां समिति के माध्यम से भर्ती की जा रही है। अभी वहां पद खाली हैं। ऐसे में अवसर ज्यादा हैं। डॉक्टरों को यहां संविदा के तौर पर सेवाएं देने के कारण वैसी सहूलियतें नहीं मिल रही हैं जैसी नियमित डॉक्टरों को मिलती हैं। आठ-दस साल से नौकरी कर रहे डाक्टर सहूलियतों के कारण ही दूसरे राज्यों में जाने का मन बना रहे हैं।

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