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मेनोपॉज के दौरान वुमंस को हो सकता है एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम इससे बचने खुद को रखें बिजी और फिटनेस पर करें फोकस / मेनोपॉज के दौरान वुमंस को हो सकता है एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम इससे बचने खुद को रखें बिजी और फिटनेस पर करें फोकस

Bhaskar News Network

Dec 09, 2018, 03:02 AM IST

Raipur News - मेनोपॉज के दौरान वुमंस खालीपन से गुजरती हैं। इस स्थिति को एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम भी कहा जाता है। 45 से 55 उम्र के बीच...

Raipur News - during menopause women may be empty nest syndrome keep yourself busy and fit on focus
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मेनोपॉज के दौरान वुमंस खालीपन से गुजरती हैं। इस स्थिति को एम्प्टी नेस्ट सिंड्रोम भी कहा जाता है। 45 से 55 उम्र के बीच मेनोपॉज होता है। इस उम्र में महिलाएं अकेली महसूस करती हैं, क्योंकि पति जॉब या बिजनेस की तनाव में उलझे होते हैं और बच्चों का फोकस करियर बनाने पर होता है।

यही खालीपन इस सिंड्रोम को जन्म देता है। इसकी वजह से मेनोपॉज के दौरान वुमंस की तकलीफें और बढ़ जाती हैं। इससे बचने के लिए वुमंस को फिटनेस एक्टिवटी बढ़ाने के साथ खुदको घर या पसंद के कुछ काम में बिजी रखने की कोशिश करनी चाहिए।

इंडियन मेनोपॉज सोसाइटी रायपुर चैप्टर की आेर से आयोजित दो दिवसीय नेशनल लेवल कॉन्फ्रेंस के पहले दिन शनिवार को डाॅ. आभा सिंह ने ये बातें कहीं। वीआईपी रोड स्थित एक होटल में आयोजित कॉन्फ्रेंस में देशभर से 200 से ज्यादा डॉक्टर्स शामिल हुए हैं।

बिहेवियर थैरेपी से इलाज

डिप्रेशन फील होना, वर्किंग वुमन होने के बाद भी खालीपन महसूस होना, रात को पसीना आना, नींद न आना, चिड़चिड़ाहट होना, थकान और चिंता लगना... मेनोपॉज के लक्षण हैं। इस दौरान महिलाओं को मेंटली और फिजिकली फिट रहना जरूरी है। इस स्थिति से गुजरने वाली वुमंस को बिहेवियर थैरेपी से ठीक किया जाता है। ऐसी स्थिति में प्रोटीन और कैल्शियम युक्त डायट रूटीन में शामिल करें और फिटनेस एक्टिविटी बढ़ाएं। इस मौके पर र|ाबलि, डाॅ. नीता ठाकरे, डाॅ. तृप्ति नागरिया, डाॅ. मनोज चेलानी, डाॅ. सुषमा वर्मा सहित अन्य मौजूद रहे।

इंडियन मेनोपॉज सोसाइटी रायपुर चैप्टर की आेर से वुमंस इश्यूज पर रखी गई कॉन्फ्रेंस, देशभर की 200 गायनेकोलॉजिस्ट हुईं शामिल

50 की उम्र के बाद हर दो साल में कराएं चेकअप

कोकिलाबेन हॉस्पिटल मुंबई की डाॅ. अर्चना शेट्टी ने बताया, मेनोपॉज के बाद 50 प्लस वुमंस को कैंसर की आशंका बढ़ जाती है। स्तन में गांठ बनने से पहले ही अगर कैंसर की पहचान हो जाए तो इलाज से महिलाओं को पूरी तरह ठीक किया जा सकता हैं। लेकिन ये तभी मुमकिन है जब 50 साल की उम्र के बाद महिलाएं हर दो साल में एक बार मैमोग्राफी स्क्रीनिंग कराएं। हर दो साल में रेगुलर चेकअप कराने से मेनोपॉज के बाद होने वाले कैंसर का पता समय रहते ही लगाया जा सकता है।

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