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खाने की चीज से कोट-पैंट का कपड़ा बना रहा ये किसान, 500 रुपए में हाथों से बनता है 1 मीटर कपड़ा

4 वर्ष पहले
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रायपुरछत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा के किसान रामाधार देवांगन पिछले खाने की चीज से कोट-पैंट का कपड़ा बना रहे हैं। इंदिरा गांधी कृषि विश्विद्यालय में चल रही इंडियन हॉर्टीकल्चर कॉन्फ्रेंस में उन्होंने अपने स्टॉल लगाए हुए हैं। प्रदेश के सीएम भूपेश बघेल ने भी उनके स्टॉल से अलसी के डंठल से बनी जैकेट 1500 रुपए में खरीदी है। रामाधार अपने स्टॉल पर आने वाले लोगों को अलसी के फायदे भी गिनाते हैं।

ऐसे तैयार करते हैं अलसी से धागा

- रामाधार बताते हैं कि अलसी का झाड़ जब सूख जाता है तो उसके फलों को अलग कर उसे पानी में भिगो दिया जाता है। उसके बाद उसे गन्ना मशीन में पेरकर कर बारीकी से अलग कर लिया जाता है।
- उससे निकलने वाले कचरे को अलग कर सूत की जाती, उससे धीरे-धीरे कुछ ही दिनों में कोट और पैंट शर्ट का कपड़ा तैयार हो जाता है।
- रामाधार अलसी से रोजाना काम आने वाली कुल 15 तरह की चीजें बनाते हैं। उन्होंने अलसी के छोटे-छोटे टुकड़ों को चॉकलेट में मिलाकर बेहतरीन स्वाद की चॉकलेट बनाई है। साथ ही इसके 3 फ्लेवर तैयार किए हैं।

अलसी के पौधे से बनाईं ये चीजें

- नान खटाई, नमकीन बिस्किट, बालम इश्क बिस्किट, एनर्जी बार, सूखी चटनी, चॉकलेट क्रीम, चॉकलेट, कॉफी चॉकलेट, कप केक, कोरियन सिल्क, धागा, तेल, राखी, टोपी और चादर।

एक मीटर कपड़ा तैयार करने में 500 रुपए लागत

- किसान रामाधार बताते हैं कि 1 मीटर कपड़ा बनाने के लिए ढाई से तीन सौ ग्राम धागा चाहिए होता है। एक शख्स दिन में सौ से सवा ग्राम धागा ही बना सकता है, पूरा काम अभी हाथों से किया जा रहा है।
- सिर्फ धागा तैयार करने में मेहनताना मिलाकर 500 से 600 रुपए प्रति मीटर खर्च आता है। मशीनीकरण होने और बड़े पैमाने पर उत्पादन से इसकी लागत 100 से 200 रुपए प्रति मीटर तक आ सकती है। अभी फाइनली तैयार हुए कपड़े के प्रोडक्ट को करीब 2500 रुपए तक में बेचा जाता है।
- इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. केपी वर्मा कहते हैं कि प्रदेश में अलसी से 15 चीजें बनाई जा रही हैं, इसे औद्योगिक रूप देकर लागत और घटाई जा सकती है।

7वीं तक पढ़े हैं रामाधार

- 63 साल के होने जा रहे किसान रामाधार बताते हैं कि उन्होंने 7वीं क्लास तक पढ़ाई की है। उस समय मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ एक राज्य हुआ करते थे।

- उन्होंने कहा कि उनके घर में बुनाई और खेती दो पुश्तैनी काम होते थे। आज भी करीब 6 एकड़ जमीन पर खेती करते हैं जिसमें से तीन एकड़ खुद की जमीन है।

- उनकी पत्नी का नाम पार्वती है और दो बेटे विवेक और हेमंत हैं, पूरा परिवार उनके काम में साथ देता है। वहीं दो बेटियों की शादी हो चुकी है। उन्होंने अलसी के रेशों से कपड़ा बनाने के लिए खुद 10 से 15 हजार रुपए का ताना खरीदकर ये काम शुरू किया था।

रामाधार बताते हैं अलसी के फायदे

- रामाधार कहते हैं अलसी का पौधा काफी गुणकारी होता है। महिलाएं प्रेग्नेंसी के दौरान और बाद में अलसी के तेल की मालिश करती हैं। अलसी डायबिटीज कंट्रोल करती है।

- इसमें मछली और अखरोट की तरह ओमेगा 3 एसिड होता है। ओमेगा 3 ऐसा एसिड है जो बाहरी स्त्रोत से ही लेना होता है। इसकी 30 ग्राम मात्रा रोज लेने पर हार्ट की बीमारी का खतरा कम होता है।

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