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सरकारी इंग्लिश मीडियम स्कूल का प्रस्ताव अटका, तीन महीने में नाम तक फाइनल नहीं

शुरुआत में इन स्कूलों में प्राइमरी तक की पढ़ाई की योजना बनाई गई। ताकि अंग्रेजी को लेकर बच्चों का शुरुआती बेस मजबूत हो।

Danik Bhaskar

May 17, 2018, 07:10 AM IST

रायपुर. प्रदेश के सरकारी स्कूलों में इंग्लिश मीडियम पढ़ाई शुरू करने की योजना फिलहाल अटक गई है। तीन महीने पहले जिलों से स्कूल के नाम, शिक्षक समेत अन्य जानकारी शिक्षा विभाग को भेजी गई थी, लेकिन अब तक एक भी स्कूल के नाम पर विभाग की मुहर नहीं लगी है। नया सत्र शुरू हाेने में अब एक महीने का ही समय बचा है। बताया जा रहा है कि शिक्षा विभाग ने इंग्लिश मीडियम स्कूल के लिए योजना तो बनाई, लेकिन इसे शुरू करने में होने वाली दिक्कतों को लेकर अब मामले को टाला जा रहा है। इसलिए अफसर जिलों से भेजे गए नाम पर अंतिम मुहर नहीं तक नहीं लगा पा रहे हैं।


रायपुर में कुल आठ इंग्लिश मीडियम स्कूल खोलने की योजना

सरकारी स्कूलों में बच्चों की लगातार घटती संख्या के साथ प्राइवेट और इंग्लिश मीडियम स्कूलों के प्रति छात्रों के बढ़ते रुझान को लेकर शिक्षा विभाग ने राज्य के हर ब्लॉक में दो सरकारी इंग्लिश मीडियम स्कूल शुरू करने की घोषणा की। शुरुआत में इन स्कूलों में प्राइमरी तक की पढ़ाई की योजना बनाई गई। ताकि अंग्रेजी को लेकर बच्चों का शुरुआती बेस मजबूत हो। इसके अनुसार सभी जिलों से ब्लॉक के अनुसार उन स्कूलों के नाम मांगे गए, जहां नए शिक्षा सत्र से पढ़ाई शुरू हो सके। जिलों से इसके प्रस्ताव करीब ढाई - तीन महीने पहले ही विभाग को भेज दिए गए। इसमें उन शिक्षकों के नाम भी दिए गए जो इन स्कूलों में अंग्रेजी में पढ़ाएंगे। रायपुर से कुल आठ इंग्लिश मीडियम स्कूल खोलने का प्रस्ताव है। शिक्षा विभाग के अफसरों का कहना है कि जून के पहले सप्ताह तक प्राइमरी इंग्लिश मीडियम स्कूल के नाम की घोषणा कर दी जाएगी। जिलों से आए प्रस्ताव की जांच की जा रही है, लेकिन जिस तरीके से इसे लेकर काम किया जा रहा है, उसे देखते हुए नए सत्र के शुरूआत में होने की संभावना कम ही है।


स्कूल के नाम में होगी देरी तो बच्चों के एडमिशन के साथ पढ़ाई में होगा असर
राज्य में अभी एक भी सरकारी इंग्लिश मीडियम स्कूल नहीं हैं। कुछ सरकारी प्राइमरी स्कूलों से इसकी शुरुआत होगी। इनके नाम में देरी का असर यह होगा कि पहले सत्र में यहां की सीटें खाली रहेगी, क्योंकि अभी आरटीई से प्राइवेट स्कूलों में दाखिले के लिए आवेदन की प्रक्रिया चल रही है। जब तक सरकारी इंग्लिश मीडियम के नाम की घोषणा होगी, तब तक ज्यादातर गरीब बच्चों का प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन हो गया होगा। इसके अलावा लेटलतीफी से यह बात भी साफ हो रही है कि शिक्षा विभाग भी इन नए स्कूलों को लेकर गंभीर नहीं है। अन्यथा कुछ महीने पहले ही नाम तय हो जाते और इसमें प्रवेश के लिए प्रचार-प्रसार भी होता। और अब तक प्रक्रिया भी शुरू हो जाना था। देरी से स्कूल के नाम की घोषणा होेने से पढ़ाई भी प्रभावित होगी।

जहां पहले से हो रही है पढ़ाई उसे मिलेगी प्राथमिकता
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हिंदी मीडियम वाले जिन प्राइमरी स्कूलों में इंग्लिश मीडियम की तर्ज पर पहले से पढ़ाई हो रही है। इंग्लिश को लेकर जहां टीचर मौजूद हो। इंग्लिश मीडियम से पढ़ाई करने वाले शिक्षकों की संख्या भी ज्यादा होनी चाहिए। उन स्कूलों में ही अंग्रेजी माध्यम के स्कूल शुरू किए जाएंगे। इनके नाम को ही प्राथमिकता दी गई है। इसके आधार पर ही ऐसे स्कूलों की सूची शिक्षा विभाग को भेजी गई है। स्कूलों की घोषणा होने के बाद नए सत्र में पढ़ाई को लेकर तैयारियां शुरू की जाएगी। प्रदेश के कुछ जिलों में अपनी पहले से स्कूल प्रबंधन की तरफ से प्राइमरी में अंग्रेजी कोर्स की पढ़ाई कराई जा रही है, जिससे कि बच्चों का बेस तैयार हो पाए।

आरटीई में भी इंग्लिश मीडियम दाखिले की होड़

शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत प्राइवेट स्कूलों में गरीब बच्चों को प्रवेश मिलता है। इसके तहत आवेदन की प्रक्रिया चल रही है। इसमें भी पैरेंट्स की पहली पसंद इंग्लिश मीडियम स्कूल हैं। पिछली बार कुल 822 स्कूलों में 9574 सीटें गरीब बच्चों के लिए आरक्षित थी। इसमें से छह हजार सीटों पर ही बच्चों को प्रवेश मिला। करीब 153 स्कूल ऐसे थे जहां दाखिले के लिए एक भी आवेदन नहीं आए थे। इनमें से ज्यादातर स्कूल हिंदी मीडियम वाले ही थे। इस बार आरटीई के तहत करीब 770 निजी स्कूलों में साढ़े हजार हजार सीटें आरक्षित हैं। इस बार भी इंग्लिश मीडियम स्कूल के प्रति ही ज्यादा रुझान दिखाई दे रहा है।

एक्सपर्ट व्यू : बच्चों के विकास और प्रतिस्पर्धा के लिए अच्छा है, जल्द अमल में लाएं
शिक्षा एक्सपर्ट, पूर्व आईएएस बीकेएस रे का कहना है कि कुछ सरकारी स्कूलों में इंग्लिश मीडियम से पढ़ाई की करने योजना अच्छी है। शिक्षा विभाग को इसे जल्द अमल में लाना चाहिए। सरकारी स्कूल में इंग्लिश मीडियम में पढ़ाई होने के दूरगामी परिणाम होंगे। शिक्षा में काफी परिवर्तन आएगा। वर्तमान समय में गरीब हो या फिर अमीर सभी अपने बच्चे को इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं। सरकारी स्कूल में यह व्यवस्था शुरू होने से गरीब बच्चों को फायदा होगा। क्योंकि यहां की फीस प्राइवेट स्कूलों की अपेक्षा कम रहेगी। बच्चों के विकास और भविष्य में होने वाली प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार होंगे।

स्कूलों के नाम जल्द आ जाएंगे सामने

स्कूल शिक्षा के सचिव गौरव द्विवेदी ने बताया कि प्रदेशभर से इंग्लिश मीडियम स्कूल के लिए नाम आए हैं। इसका निरीक्षण भी किया जा रहा है। जल्द ही स्कूलों के नाम की घोषणा की जाएगी। नए सत्र से वहां अंग्रेजी माध्यम से ही पढ़ाई होगी।

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