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पीलिया से मौत पर हाईकोर्ट सख्त : मोवा नहरपारा के रहवासियों को 48 घंटे में शिफ्ट करने का आदेश

हाईकोर्ट से नियुक्त कमिश्नर ने किया था इलाके का दौरा, अब तक छह लोगों की हो चुकी है मौत

dainikbhaskar.com | Last Modified - May 02, 2018, 06:59 AM IST

  • पीलिया से मौत पर हाईकोर्ट सख्त : मोवा नहरपारा के रहवासियों को 48 घंटे में शिफ्ट करने का आदेश
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    बिलासपुर हाईकोर्ट

    बिलासपुर.हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पीलिया से प्रभावित राजधानी रायपुर के तीन क्षेत्रों के रह रहे करीब 34 हजार लोगों को 48 घंटे के भीतर हैल्थ कैंप में शिफ्ट करने के निर्देश दिए हैं। यहां लोगों के लिए खाने-पीने, दवाई आदि की व्यवस्था भी सरकार को करने के निर्देश दिए गए हैं। शिविरों में शिफ्ट किए गए लोगों के घरों और अन्य संपत्तियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की होगी।


    राजधानी रायपुर के मोवा, कांपा, गुढ़ियारी सहित कई क्षेत्रों में घरों तक पाइप लाइन से पीने के पानी की सप्लाई की जाती है। गंदी नालियों से होकर गुजरने के कारण पानी बेहद प्रदूषित है। जांच में पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिलने की पुष्टि हो चुकी है। ये बैक्टीरिया मल में पाया जाता है। चार साल पहले लगाई गई जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने कई बार दिशा- निर्देश जारी किए, लेकिन हालात जस के तस हैं। न्याय मित्रों सौरभ डांगी, मनोज परांजपे और अमृतो दास ने पिछले सप्ताह प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था। मंगलवार को चीफ जस्टिस टीबी राधाकृष्णन और जस्टिस शरद कुमार गुप्ता की बेंच के समक्ष रिपोर्ट प्रस्तुत कर बताया गया कि इन क्षेत्रों में हालत बेहद खराब हैं। अब तक पीलिया से 6 लोगों की मौत हो चुकी है। 400 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हैं। स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि निरीक्षण के लिए जाने पर रायपुर नगर निगम के अधिकारी सहयोग नहीं करते। वर्किंग डे में आने के लिए कहा जाता है। पीलिया से हो रही मौतों पर प्रशासन के बेहद लचर रवैये पर भी हाईकोर्ट ने सख्त नाराजगी जाहिर की।

    कई बार निर्देश देने के बाद भी नहीं सुधरे हालात
    हाईकोर्ट ने कहा कि इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चार साल होने जा रहे हैं, लेकिन यह वर्षगांठ मनाने जैसी बात नहीं है। राजधानी में पीलिया की वजह से महामारी के हालात हैं। कई बार दिशा- निर्देश दिए गए, लेकिन स्थिति सुधरती नहीं दिख रही। लोगों को इस तरह नहीं छोड़ा जा सकता। प्रशासन का रवैया भी बेहद लचर है।

    और इधर, व्यवस्थापन तो नहीं किया टैंकर जरूर खड़े कर दिए

    निगम प्रशासन के पास शाम को जैसे ही हाईकोर्ट के आदेश की सूचना पहुंची, उसने व्यवस्थापन के इंतजाम तो शुरू नहीं किए, लेकिन लोगों को पानी उपलब्ध करवाने की धमाचौकड़ी जरूर शुरू कर दी। तीनों ही बस्तियों में अंधेरा होने से पहले एक-एक टैंकर खड़े कर दिए गए। यही नहीं, पांच टैंकरों को कांपा, मोवा और नहरपारा के लिए रिजर्व कर दिया गया है। इसके अलावा, कांपा की एक किराना दुकान के सामने पाइपलाइनें भी रख दी गई हैं। अफसरों ने बताया कि सुबह से पाइपलाइन बदलने का काम शुरू कर दिया जाएगा।

    चंगोराभाठा, सदर समेत कई बस्तियों में मरीज
    राजधानी में पीलिया के 400 से ज्यादा मरीज हो गए हैं। इनमें अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी हैं। इनमें चार मोवा-कांपा और एक-एक गोपालनगर व आमासिवनी के हैं। मृतकों में तीन गर्भवती भी शामिल हैं। मोवा के अलावा कांपा, गोपालनगर, चंगोराभाठा व सदरबाजार में पीलिया के मरीज मिले हैं। लेकिन ज्यादातर मौत मोवा-कांपा में हुई है।

    जांच के बाद फैसले का आग्रह किया जाएगा
    रायपुर नगर निगम के कमिश्नर रजत बंसल ने कहा कि हाईकोर्ट में पर्यावरण संरक्षण मंडल की उस रिपोर्ट को रखा जाएगा, जिसमें पाइपलाइन बदलने के बाद पानी की जांच में ई-कालोई बैक्टीरिया नहीं मिला। कोर्ट से निवेदन किया जाएगा कि वे यहां पानी की सप्लाई के सिस्टम की जांच कोर्ट कमिश्नरी से करवाएं, उनकी संतुष्टि के बाद ही आगे का फैसला लें। फिलहाल तब तक लोगों के पीने के लिए टैंकरों से पानी की सप्लाई की जाएगी।

    मोवा में पीलिया का ऐसा कहर...बेटी परीक्षा नहीं दे पाई, पत्नी के इलाज में दस दिन में डेढ़ लाख खर्च... 5 हजार परिवारों की यही दास्तान, हर घर में एक न एक बीमार

    राजधानी का मोवा-कांपा और उससे लगे हुए नहरपारा, पंचशील नगर इलाके को पीलिया ने बुरी तरह घेर लिया है। प्रभावित इलाके की तीन बस्तियों में सब मिलाकर 5 हजार से ज्यादा परिवार और करीब 35 हजार लोग हैं। हर परिवार में एक से ज्यादा लोग पीलिया से पीड़ित हैं। भास्कर टीम ने इन बस्तियों का जायजा लिया और पाया कि ऐसे दर्जनों परिवार हैं जहां पूरा का पूरा घर पीलिया से पीड़ित हो गया है। अब तक 6 लोगों की यहीं मृत्यु हो चुकी है और कई अब भी गंभीर रूप से बीमार हैं। यह दहशत लगातार बढ़ रही है।

    भास्कर टीम नहरपारा में राजेंद्र कुमार से मिली तो उन्होंने बताया कि पीलिया की वजह से बेटी बीएससी का एग्जाम नहीं दिला पाई। कुछ पेपर तो अस्पताल में भर्ती रहने की वजह से छूटे। बेटा ग्लूकोज की बोतल लगी हालत में बीसीए की परीक्षआ देने गया। नहरपारा में ऐसा हर परिवार पीलिया की वजह से शारीरिक ही नहीं, मानसिक रूप से भी त्रस्त है। यहीं के प्रेमलाल यादव (42) की पीलिया से मौत हो गई। राज मिस्त्री का काम करने वाले प्रेमलाल को परिजनों ने एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। नहरपारा कांपा की ही रेखा पति भूपेन्द्र त्रिपाठी (24) की भी जान पीलिया की वजह से गई है। आठ अप्रैल को उन्हें इलाज के लिए आंबेडकर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। नौ अप्रैल को आपरेशन हुआ था। 23 अप्रैल को आंबेडकर अस्पताल में मौत हो गई। इसी तरह, मोवा, कांपा, नहरपारा, पंचशील नगर में अब तक पीलिया से छह मौतें हो चुकी हैं। इन मौतों और 200 से ज्यादा लोगों में पीलिया के पाजीटिव मिलने के बाद इस पूरे इलाके में सन्नाटा और अजीब सा डर छा गया है।

    इसलिए खराब हुई स्थिति
    मोवा इलाका डेढ़ दशक पहले ग्राम पंचायत मोवा था। अभी यह निगम के डा. भीमराव आंबेडकर वार्ड के अंतर्गत आता है। ग्राम पंचायत के समय ही यहां पानी के लिए पाइपलाइन बिछाई गई थी। यहां रहने वाले श्यामदास ने बताया कि तब इलाके में ज्यादा बसाहट नहीं थी। स्थिति ग्रामीण परिवेश की थी। सड़कें व नालियां नहीं थीं। 14 साल पहले यहां सड़कें बनाई गई। उसके साथ नालियां भी बनी। तब, सड़क व नाली बनाने वाले अफसर, इंजीनियरों ने यहां बड़ी खामियां कीं। कच्ची सड़क के जिस साइड में पाइपलाइनें थी, नालियां भी उसी साइड में बना दी गईं। नाली और पाइपलाइन में दूरी भी नहीं रखी गई। कई-कई जगह नाली पाइपलाइन के ऊपर ही बना दी गई। वर्षों बाद यही पाइपलाइनें लीकेज हुई और नालियों का पानी पाइपलाइन से घरों में पहुंचने लगा। इसकी वजह से पीलिया फैली है।

    लाखों के मकान, पानी शुद्ध नहीं
    मोवा, नहरपारा और आसपास का इलाका विधानसभा रोड से लगा हुआ होने का कारण प्राइम लोकेशन में है। पट्‌टे पर बसा नहरपारा के ज्यादातर मकान पक्के हैं। यहां तीन बूथ में करीब साढ़े चार हजार मतदाता है। इस लिहाज से अकेले यहां की आबादी करीब आठ हजार बताई जा रही है। यहां जितने भी मकान हैं वह दोमंजिला, तीन मंजिला है। यहां रहने वाले लोगों जीवनभर की कमाई से या फिर लोन लेकर घर बनाया है। लेकिन शुद्ध पानी नहीं होने के कारण स्थिति नारकीय हो गई है। लोगों का कहना है कि पीलिया फैलने के बाद से वे पानी ऊबालकर पी रहे हैं।
    निगम व स्वास्थ्य विभाग की ओर से दी गई क्लोरीन की गोलियां भी पानी में डालकर पी रहे हैं।

    निगम तो व्यवस्थापन की स्थिति में ही नहीं लगता
    हाईकोर्ट ने नगर निगम को निर्देश दिया है कि तीन बस्तियों के 34 हजार लोगों को 48 घंटे यानी गुरुवार को शाम 5 बजे से पहले बस्तियों से हटाकर दूसरी जगह ले जाया जाए। लेकिन मंगलवार को आधी रात तक व्यवस्थापन की कोई हलचल नजर नहीं आई। यही नहीं, सरकारी एजेंसियां इस कोशिश में हैं कि किसी तरह अदालत से गुहार लगाकर व्यवस्थापन का मामला टाला जाए। लेकिन अफसर यह बातें खुलकर बोलने के लिए तैयार नहीं हैं। भास्कर ने निगम कमिश्नर रजत बंसल से बात की तो उन्होंने कहा - हाईकोर्ट में पर्यावरण संरक्षण मंडल की उस रिपोर्ट को रखा जाएगा, जिसमें पाइपलाइन बदलने के बाद पानी की जांच में ईकोलाई बैक्टीरिया नहीं मिला। कोर्ट से निवेदन किया जाएगा कि वे यहां पानी को सप्लाई को लेकर कोर्ट कमिश्नरी संतुष्ट हो। तब तक पीने का पानी टैंकरों से सप्लाई करेंगे।

    निगम तो व्यवस्थापन की स्थिति में ही नहीं लगता
    हाईकोर्ट ने निगम को निर्देश दिया है कि तीन बस्तियों के 34 हजार लोगों को 48 घंटे यानी गुरुवार को शाम 5 बजे से पहले बस्तियों से हटाकर दूसरी जगह ले जाया जाए। लेकिन मंगलवार को आधी रात तक व्यवस्थापन की कोई हलचल नजर नहीं आई। यही नहीं, सरकारी एजेंसियां इस कोशिश में हैं कि किसी तरह अदालत से गुहार लगाकर व्यवस्थापन का मामला टाला जाए। लेकिन अफसर यह बातें खुलकर बोलने के लिए तैयार नहीं हैं। भास्कर ने निगम कमिश्नर रजत बंसल से बात की तो उन्होंने कहा - हाईकोर्ट में पर्यावरण संरक्षण मंडल की उस रिपोर्ट को रखा जाएगा, जिसमें पाइपलाइन बदलने के बाद पानी की जांच में ईकोलाई बैक्टीरिया नहीं मिला।

    कोर्ट से निवेदन किया जाएगा कि वे यहां पानी को सप्लाई को लेकर कोर्ट कमिश्नरी संतुष्ट हो। तब तक पीने का पानी टैंकरों से सप्लाई करेंगे।

    गांव था तब सरपंच ने बिछाई थी पाइपलाइन

    कांपा के चौक की जिस गली में सबसे अधिक लोग पीलिया से ग्रस्त हैं, वहां पर छोटा चौक है। इस चौक के नीचे से ही पाइप का जंक्शन गया हुआ है। शंकर सिंह चौहान ने बताया कि यह क्षेत्र पहले ग्राम पंचायत हुआ करता था। उस वक्त सरपंच ने यहां पाइप लाइन बिछवाई थी। उसके बाद से पाइप लाइन बदली नहीं गई है। चौक से ही पूरी पाइप लाइन का जंक्शन गया है। पूरी पाइप लाइन बदलने के लिए कम से कम चार फीट तक का गड्ढा खोदना पड़ेगा।

    पार्षद के खिलाफ नाराजगी
    पीलिया फैलने के बाद लोगों में मोवा के पार्षद अनवर हुसैन के खिलाफ भी गुस्सा दिखा। पीलिया से प्रभावित परिवारों ने कहा कि चार साल पहले जब चुनाव था तब पार्षद इन गलियों में नजर आए थे। उसके बाद से अब तक कोई नहीं आया। इस बारे में भास्कर ने अनवर हुसैन से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वे उपलब्ध नहीं हुए।

    बोर बंद होने से नाराज हैं लोग
    कांपा के शैलेश सिंह कुलदीप, हरेंद्र कुमार साहू सहित बस्ती के लोगों के साथ भास्कर टीम ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। लोगों ने बताया कि यह चूना भट्टी का क्षेत्र रहा है। यहां का पानी बहुत मीठा है। लेकिन निगम प्रशासन ने यहां के बोर बंद करवा दिए हैं। अगर बोर बंद नहीं होता तो शायद पीलिया महामारी नहीं फैलती। लोग बोर का मीठा पानी ही पीने के लिए उपयोग करते।

    चार साल पहले डीडीनगर और हीरापुर में फैला था पीलिया, सिर्फ दो साल में 150 से ज्यादा की मौत

    चार साल पहले डीडीनगर व तीन साल पहले हीरापुर के आरडीए कॉलोनी में पीलिया फैला था। इसमें इस दाैरान 150 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। डीडीनगर के अलावा लाखेनगर, डूमरतालाब, डंगनिया खदान बस्ती में पीलिया से मरीजों की मौत हुई थी। आरडीए कॉलोनी में तीन लोगों की मौत हुई थी और एक हजार से ज्यादा लोगों को पीलिया की पुष्टि हुई थी। कुशालपुर में भी तीन लोगों की जान गई थी। राजधानी में पीलिया से मौत नया मामला नहीं है। डीडीनगर में एनआईटी छात्र रोहित गुप्ता से मौत की शुरुआत हुई थी। इसके बाद पीलिया का कहर राजधानी के विभिन्न मोहल्लों पीलिया फैला था। स्वास्थ्य विभाग ने पीलिया प्रभावित इलाकों के पानी की जांच कराई थी, जिसमें खतरनाक बैक्टीरिया ईकोलाई मिलने की पुष्टि हुई थी। पिछले साल किसी इलाके में पीलिया नहीं फैला। अंबेडकर समेत निजी अस्पतालों में रुटीन में पीलिया के मरीज आते रहे।

    गर्मी में फैलता है पीलिया
    गर्मी में पीलिया फैलने का प्रमुख कारण दूषित पानी की सप्लाई है। इसके साथ ही लोग बर्फ का उपयाेग भी बहुतायत में करने लगते हैं। बर्फ दूषित पानी से बनाया जा रहा है, इसलिए पीलिया होने की आशंका पूरी तरह बढ़ जाती है। डाक्टरों का कहना है कि पीलिया के लिए दूषित पानी के बाद बर्फ भी जिम्मेदार है। खुले में बिक रहे गन्ना रस, लस्सी भी पीलिया के लिए जिम्मेदार है।

    पांच साल में पीलिया से मौतें

    2018 में अब तक 6
    2017 में 05 की मौत
    2016 में 76 की मौत

    2015 में 75 की मौत
    2014 में 15 की मौत

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    कोर्ट के आदेश के बाद पीलिया प्रभावित मोवा के नहरपारा में मंगलवार रात 9 बजे भेजे गए टैंकर से पानी लेती एक बच्ची।
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    मोवा-कांपा में पीलिया की दहशत से वीरान हो गई है गलियां।
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    लोगों को थमाया नोटिस।
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    घरों से बाहर एहतियात बरतने के पर्चे चिपकाए गए हैं।
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