--Advertisement--

प्रदेश में कांग्रेस-भाजपा के अलावा कम ही प्रत्याशी बचा पाते हैं अपनी जमानत

Raipur News - विधानसभा चुनाव के वोटों की गिनती के लिए उल्टी गिनती शुरू हो गई है। इसके नतीजे आते ही विजयी प्रत्याशियों के लिए...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 02:55 AM IST
Raipur News - in the state less than the congress bjp fewer candidates can be saved
विधानसभा चुनाव के वोटों की गिनती के लिए उल्टी गिनती शुरू हो गई है। इसके नतीजे आते ही विजयी प्रत्याशियों के लिए उत्सव का अवसर होगा। इसके साथ ही हारने वाले गम में डूब जाएंगे। और जिनके लिए सबसे शर्मनाक स्थिति होगी वे ऐसे उम्मीदवार होंगे जिनकी जमानत ही जब्त हो जाएगी। चुनावी जंग में यह सबसे खराब बात समझी जाती है। हर चुनाव में सैकड़ों प्रत्याशियों की जमानतें जब्त होती है। जब्त राशि का करोड़ों रुपए चुनाव आयोग के खजाने में चला जाता है।

जमानत जब्त ऐसे उम्मीदवारों की होती है जो अपने विधानसभा क्षेत्र में डाले गए कुल वैध मतों का छठवां हिस्सा भी प्राप्त नहीं कर पाते हैं। उदाहरण के लिए किसी प्रत्याशी के विधानसभा क्षेत्र में एक लाख वैध वोट पड़े। तो हर उम्मीदवार को इसका छठा हिस्सा यानी 16 हजार 666 वोट पाना जमानत बचाने के लिए जरूरी है। चुनाव आयोग को 2003 और 2008 के चुनावों में करीब सवा पांच करोड़ रुपए जमानत राशि से कमाई हुई थी। इन चुनावों में सैकड़ों प्रत्याशियों की करारी हार हुई थी। 2013 में राज्य में 355 निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में उतरे थे जिनमें से 248 की जमानत जब्त हो गई थी। सबसे दिलचस्प बात यह कि बसपा राष्ट्रीय पार्टी है। उसने 2003 में 54 प्रत्याशी उतारे में थे। इनमें से दो ही जीत सके। जबकि 46 की जमानत जब्त हो गई थी। 2008 में उसने सभी 90 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए। इनमें से दो ही जीते और 83 की जमानत जब्त हो गई। इसी तरह 2013 में बसपा ने सभी 90 सीटों पर प्रत्याशी खड़े किए। इनमें से केवल एक सीट पर सफलता मिली। उसके 84 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। इस बार उसने जोगी कांग्रेस से गठबंधन किया है। जोगी कांग्रेस ने 90 में से 55 और बसपा ने 35 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। 2013 के विधानसभा चुनाव में पहली बार नोटा का उपयोग किया गया। इसमें करीब सवा चार लाख वोट पड़े थे। पहले चरण के चुनाव बस्तर संभाग व राजनांदगांव जिले की 18 सीटों के लिए हुए थे। इनमें से 14 सीटों पर महिला वोटर पुरुष वोटरों की तुलना में ज्यादा थीं। इसके बावजूद 11 महिला प्रत्याशियों में से तीन ही जीत सकीं। दो उम्मीदवार हार गईं और छह की जमानत जब्त हो गई। प्रदेश में लोकसभा की 11 सीटें हैं। 2014 के आम चुनाव में यहां 211 प्रत्याशियों ने भाग्य आजमाया था।

क्या है जमानत राशि ऐसे ले सकते हैं वापस

सभी प्रत्याशियों को चुनाव लडऩे के लिए जमानत के रूप में चुनाव आयोग के पास एक निश्चित रकम जमा करनी होती है। रायपुर के उप जिला निर्वाचन अधिकारी राजीव कुमार ने बताया कि हारने वालों की जमानत जब्त होती जो वैध मतों के एक बटे छह हिस्से से कम वोट पाते हैं। इससे अधिक वोट पाने वाले और विजयी उम्मीदवारों को जमानत राशि पाने के लिए लिखित में जिला निर्वाचन अधिकारी को आवेदन करना होता है। उन्हें कुछ दिनों में नगद रुपए लौटा दिए जाते हैं।

पहले केवल दो सौ रुपए लेते थे

1996 तथा इससे पूर्व में विधान सभा चुनावों के दौरान सामान्य प्रत्याशी के लिए जमानत राशि सिर्फ दो सौ पचास रुपए तथा तथा अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लिए मात्र एक सौ पच्चीस रुपए थी। साल 2009 के अधिनियम 41 द्वारा लगभग 1-2-2010 से प्रतिभूति जमा राशि में वृद्धि की गई।

विस व लोकसभा के लिए अलग राशि

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 34(1)(ख) के अनुसार विधान सभा का निर्वाचन लड़ने वाले सामान्य अभ्यर्थी को 10 हजार रुपए की प्रतिभूति राशि जमा करानी होगी। अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों को पांच हजार रुपए जमानत राशि जमा करानी होती है। लोकसभा चुनाव में सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए यह राशि 25 हजार रुपए है। जबकि एससी-एसटी प्रत्याशियों के लिए इसकी आधी यानी 12 हजार 500 रुपए है।

X
Raipur News - in the state less than the congress bjp fewer candidates can be saved
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..