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स्टेट बार कौंसिल को आयकर में छूट, हाईकोर्ट ने कहा- न्यायिक सुधार के लिए काम करें

जस्टिस संजय के. अग्रवाल की बेंच ने यह टिप्पणी टैक्स से जुड़े एक मामले पर दिए गए फैसले में की है।

Dainik Bhaskar

May 02, 2018, 07:25 AM IST
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बिलासपुर. हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ़ स्टेट बार कौंसिल को जिम्मेदारी याद दिलाई है। कोर्ट ने उम्मीद जताई है कि कौंसिल गरीब और जरूरतमंद लोगों को निशुल्क कानूनी सहायता दिलाने, कानूनी साक्षरता को बढ़ावा देने और न्यायिक सुधारों के लिए वकीलों को गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में कौंसिल अपनी जिम्मेदारियां भली-भांति निभाएगा।


जस्टिस संजय के. अग्रवाल की बेंच ने यह टिप्पणी टैक्स से जुड़े एक मामले पर दिए गए फैसले में की है। कौंसिल ने आयकर अधिनियम की धारा 10(23 ए) के तहत छूट के लिए याचिकाएं लगाई थीं। अविभाजित मध्यप्रदेश राज्य के दौरान एडवोकेट एक्ट 1961 के तहत मध्यप्रदेश स्टेट बार कौंसिल का गठन किया गया था। कौंसिल को केंद्र शासन द्वारा 9 अगस्त 1966 को जारी अधिसूचना के तहत आयकर अधिनियम की धारा 10(23 ए) के तहत आयकर से छूट की पात्रता थी। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद 1 नवंबर 2000 को ही छत्तीसगढ़ स्टेट बार कौंसिल का गठन किया गया। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने कौंसिल को 2004-5 और 2005-06 सत्र के लिए 26 लाख 34 हजार 767 रुपए और 2009 में 40 लाख 98 हजार 770 रुपए करने के लिए नोटिस जारी किए।

डिपार्टमेंट का कहना था.. छूट के लिए कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई

डिपार्टमेंट का कहना था कि कौंसिल को इनकम टैक्स से छूट के लिए कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। पूर्व में जारी अधिसूचना मध्यप्रदेश स्टेट बार कौंसिल के लिए थी। इसके खिलाफ 2007 और 2009 में कौंसिल ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। मामले पर जस्टिस संजय के अग्रवाल की बेंच में सुनवाई हुई। कौंसिल की तरप से कहा गया कि मध्यप्रदेश स्टेट बार कौंसिल को आयकर से छूट के लिए जारी की गई अधिसूचना छत्तीसगढ़ स्टेट बार कौंसिल पर भी लागू होगी। इसके लिए अलग से अधिसूचना जारी करने की जरुरत नहीं है। हाईकोर्ट ने 2004-05 और 2005-06 के असेसमेंट के आधार पर 26 लाख 34 हजार 767 रुपए और 2009 में 40 लाख 98 हजार 770 रुपए करने के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा जारी किए गए नोटिस को निरस्त कर दिया है। साथ ही कहा है कि छत्तीसगढ़ स्टेट बार कौंसिल को आयकर अधिनियम की धारा 10(23 ए) के तहत आयकर में छूट की पात्रता होगी।

मतपत्रों में टेम्परिंग का आरोप, थाने तक पहुंचा मामला
पिछले कुछ सालों से छत्तीसगढ़ स्टेट बार कौंसिल विवादों से घिरा रहा है। स्टेट बार कौंसिल के लिए हुए चुनावों के दौरान मतपत्रों से टेम्परिंग का आरोप लगाते हुए सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज करवाई गई। पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर लिया था। इसी मामले में कौंसिल की सचिव को पद से हटाया भी गया था। बाद में मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई। हाईकोर्ट ने ऑब्जर्वर नियुक्त कर मतपत्रों में टेम्परिंग की जांच के निर्देश दिए थे। जांच में भी टेम्परिंग की पुष्टि हुई, लेकिन अब तक किसी पर कार्रवाई नहीं की जा सकी है।

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