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8 माह पहले ही बने जिला अस्पताल भवन में दरारें, कमरों में रिस रहा बारिश का पानी

बलौदा बाजार| 8 माह पहले ही 8 करोड़ 6 लाख रुपए की लागत से बने 140 बिस्तर वाले जिला अस्पताल भवन में दरारें आ गई हैं। इसके...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 14, 2018, 02:05 AM IST

8 माह पहले ही बने जिला अस्पताल भवन में दरारें, कमरों में रिस रहा बारिश का पानी
बलौदा बाजार| 8 माह पहले ही 8 करोड़ 6 लाख रुपए की लागत से बने 140 बिस्तर वाले जिला अस्पताल भवन में दरारें आ गई हैं। इसके चलते कमरों में बारिश का पानी रिस रहा है। वहीं भवन में लगे टाइल्स टूटने लगे हैं और प्लास्टर भी उखड़ने लगी है। इस संबंध में कलेक्टर जेपी पाठक ने कहा कि जिला अस्पताल भवन में दरारें पड़ने की जांच कर रिपोर्ट स्वास्थ्य संचालक के डायरेक्टर को भेजी जाएगी।

जिला अस्पताल भवन का लोकार्पण मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह, विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, मंत्री अमर अग्रवाल, राजेश मूणत, सांसद रमेश बैस, कमला पाटले के अलावा विभागीय मंत्री अजय चंद्राकर, कलेक्टर राजेश राणा की उपस्थिति में 3 अक्टूबर 2017 को किया गया था। इस मौके पर मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री ने कहा था कि इस भवन का निर्माण बेहतर तकनीक से किया गया है। इस भवन की मजबूती शानदार है। आने वाले अगले 30 साल तक ये इसी मजबूती के साथ टिकी रहेगी, लेकिन निर्माण के महज 8 माह के भीतर ही भवन में दरारें दिखने लगी है और भवन का प्लास्टर जगह-जगह से उखड़ने लगी है। भवन के आगे-पीछे के बींब में भी दरारें आ गई हैं, जिसके सहारे ये भवन टिकी है। जानकारों की माने तो भवन के निर्माण के दौरान रेत में सीमेंट कम मिलाया गया था।

8 करोड़ की लागत से बने 140 बिस्तर वाले जिला अस्पताल भवन में दरारें आ गई।

इंजीनियर बोले- भवन में रद्दी ईट का उपयोग हुआ है

सीएमएचओ योगेश शर्मा ने कहा कि जिला चिकित्सालय का संपूर्ण उत्तरदायित्व सिविल सर्जन अभय परिहार की है। उन्हीं से जानकारी लीजिए। सिविल सर्जन हाॅस्पिटल सह अधीक्षक अभय परिहार ने कहा कि कहां-कहां पर दरारें आई हैं इसे दिखवाता हूं, पर इसकी जानकारी छग मेडिकल सिविल कौंसिल के इंजीनियर ही बेहतर बता पाएंगे। सीजीएमएससी के इंजीनियर रविकांत ने बताया कि भवन का निर्माण 2016 में ही पूर्ण कर लिया था, जिसका लोकार्पण 3 अक्टूबर 2017 को किया गया। ठेकेदार द्वारा सालभर पहले ही भवन का निर्माण कर सौंप दिया गया था। अनुबंध के हिसाब से सालभर ही मरम्मत की जिम्मेदारी थी, सालभर बीत जाने के बाद ठेकेदार ने अनुबंध पूरा होने का हवाला देकर मरम्मत करने से मना कर दिया।

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