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ट्रेनर्स ने कहा- परिजन भी साथ दें तो सर्वश्रेष्ठ खेल बन सकता है वॉलीबॉल

दंतेवाड़ा | जावंगा के आस्था स्कूल में चल रहे प्री मिनी वॉलीबॉल ट्रेनिंग कैंप में अंडर-14 बालिकाओं की छत्तीसगढ़ की टीम...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 02:15 AM IST

ट्रेनर्स ने कहा- परिजन भी साथ दें तो सर्वश्रेष्ठ खेल बन सकता है वॉलीबॉल
दंतेवाड़ा | जावंगा के आस्था स्कूल में चल रहे प्री मिनी वॉलीबॉल ट्रेनिंग कैंप में अंडर-14 बालिकाओं की छत्तीसगढ़ की टीम मिजोरम में होने वाले राष्ट्रीय वॉलीबॉल स्पर्धा के लिए तैयार हो रही है। यहां रायपुर, भिलाई व दंतेवाड़ा के कोच पांच शिफ्ट में नेशनल स्तर पर खेलने बालिकाओं को इनडोर व आउटडोर ग्राउंड में ट्रेनिंग दे रहे हैं। कोचेस का मानना है कि क्रिकेट या अन्य खेलों में परिजन जिस तरह बैठकर खेलों को देखते हैं, अपने बच्चों का मनोबल बढ़ाते हैं, वैसा सपोर्ट वाॅलीबाॅल के लिए बच्चों को नहीं मिल पाता। यह सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश की स्थिति है। अगर परिजन खुद बाकी खेलों की तरह वॉलीबॉल में भी बच्चों का सपोर्ट करें तो देश का सबसे अच्छा खेल वॉलीबाॅल बन सकता है। दंतेवाड़ा के कोच श्रीकांत, रायपुर के अजीत कुट्टम बताते हैं कि डेढ़ दशक का अनुभव वॉलीबाॅल खेलने व खिलाने का है। बच्चे खेल सीखने उत्साहित रहते हैं, वॉलीबॉल के लिए परिजनों के सपोर्ट की सबसे ज्यादा जरूरत है।

बेटियों ने कहा- इंटरनेशनल खिलाड़ी बनना है : कैंप में सूरजपुर जिले से पहुंची सरपंच की बेटी प्रियंका, बारसूर के किसान बेटी रीता, रायपुर की ममता ने बताया कि वे इंटरनेशनल स्तर की वाॅलीबाॅल प्लेयर बनना चाहती है। अन्य बालिकाओं ने बताया कि वॉलीबॉल खेल में रुचि है, नेशनल, इंटरनेशनल स्तर पर खेलकर जिले व प्रदेश का नाम रोशन करना चाहती हैं। इसके अलावा कोई बालिकाएं आईएएस, कोई डाॅक्टर तो कोई इंजीनियर बनना चाहती हैं।

दंतेवाड़ा. जावंगा के आस्था स्कूल में प्रशिक्षण ले रहीं वॉलीबाॅल खिलाड़ी।

छग के खिलाड़ियों को आपसी समझ बढ़ानी चाहिए

ट्रेनिंग कैंप में 24 छात्राएं प्रदेशभर के अलग-अलग जिलों से आई हैं। इनमें 5 छात्राएं नेशनल स्तर पर पूर्व में एक-एक बार खेल चुकी हैं। नेशनल स्पर्धा खेल चुकी प्रांजल दुबे , पूर्वी, ममता, उपासना राजपूत, शाहिब अंजुम ने अपना अनुभव साझा करते हुए दैनिक भास्कर को बताया कि नेशनल स्तर पर छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करने टीम में शामिल हुईं थीं। छत्तीसगढ़ के प्लेयर्स की कमजोरी काॅन्फिडेंस व यूनिटी की कमी है, जबकि अन्य प्रदेशों के प्रत्येक खिलाड़ी एकता के सूत्र में बंधे होते हैं। अपनी कमजोरी कैसे दूर करना है इस ट्रेनिंग कैंप में सीख रहे हैं।

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Web Title: ट्रेनर्स ने कहा- परिजन भी साथ दें तो सर्वश्रेष्ठ खेल बन सकता है वॉलीबॉल
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