Hindi News »Chhatisgarh »Raipur »News» मोहम्मद इमरान नेवी | जगदलपुर

मोहम्मद इमरान नेवी | जगदलपुर

छह साल बाद वापसी पर अरविंद नेताम बोले-राजनीति में कुछ खट्‌टा और मीठा नहीं होता, यहां लंबे समय के लिए न तो कोई दोस्त...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 02:15 AM IST

छह साल बाद वापसी पर अरविंद नेताम बोले-राजनीति में कुछ खट्‌टा और मीठा नहीं होता, यहां लंबे समय के लिए न तो कोई दोस्त होता है न दुश्मन


मोहम्मद इमरान नेवी | जगदलपुर

पूर्व केंद्रीय मंत्री और आदिवासी नेता अरविंद नेताम की गुरुवार को कांग्रेस में वापसी हो गई। अरविंद को 1996 में बस्तर में मालिक मकबूजा कांड के बाद तत्कालीन मध्यप्रदेश के सीएम रहे दिग्विजय सिंह के चलते कांग्रेस पार्टी से बाहर का रास्ता देखना पड़ा था। 2012 में नेताम कुछ िदन के लिए वापस आए थे। छह सालों में बदली हुई परिस्थितियाें के बीच कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने दोबारा अरविंद नेताम का कांग्रेस प्रवेश करवाया है। इधर कांग्रेस प्रवेश के बाद अरविंद नेताम ने भास्कर से बातचीत में कहा कि राजनीति में खट्‌टा-मीठा जैसा कोई अनुभव नहीं होता है यहां लंबे समय के लिए न तो कोई दोस्त होता है न कोई दुश्मन होता है। कांग्रेस की राजनीति पर उन्होंने कहा कि दो बार उन्होंने खुद पार्टी छोड़ी तो एक बार उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया। उनका कहना था कि कांग्रेस में एक ऐसा भी दौर था जब सीनियर नेताओं को किनारे लगाया जा रहा था लेकिन आज वह दौर बदल गया है। उन्होंने दो टूक कहा कि वर्तमान में कांग्रेस के रूटीन ढांचे में कई परिवर्तन की जरूरत है। इनमें सबसे बड़ा परिवर्तन जिला और ब्लाक कांग्रेस कमेटी को मजबूत बनाने के साथ उनकी मॉनीटरिंग की व्यवस्था में हाेना चाहिए। आदिवासी राजनीति के सवाल पर उनका कहना था कि अब समय बदल गया है सिर्फ आदिवासी ही नहीं बल्कि हर वर्ग के लोगों को साथ में लेकर काम करने का समय आ गया है।

मालिक मकबूजा प्रकरण से नेताम को देखना पड़ा था बाहर का रास्ता : बस्तर में बड़ी संख्या में लोगों ने मालिक मकबूजा के माध्यम से करोड़ों रुपए कमाए। दरअसल आदिवासी ग्रामीणों की जमीन पर बड़ी संख्या में सागौन के पेड़ होते थे। संबंधित आदिवासी की जमीन औने-पौने पर खरीद ली जाती थी और उस पर खड़े बेशकीमती सागौन के वृक्षों को काटने की अनुमति वन विभाग से हासिल कर वन विभाग को ही पेड़ बेच दिए जाते थे। कई बार संबंधित आदिवासियों के नाम से ही पेड़ कटाई का प्रकरण तैयार करवाया जाता था, इसके बाद मिली रकम में से थोड़ी-बहुत रकम संबंधित आदिवासी ग्रामीण को देकर शेष पूरी रकम हड़प ली जाती थी। 1995 के आसपास आदिवासियों की जमीन कौड़ी के मोल खरीद उस पर खड़े सैकड़ों सागौन के पेड़ मालिक मकबूजा के तहत कटवाकर करोड़ों रुपए हासिल करने के मामले में अरविंद नेताम के भाइयों का नाम भी आया था। तत्कालीन कलेक्टर बी राजगोपाल नायडू ने इस मामले में कार्रवाई के लिए शासन को लिखा था, जिसके बाद मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने नेताम को कांग्रेस से बाहर का रास्ता दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।

1996 में दिग्विजय सिंह के दौर में बदली थी राह, 2012 में फिर कांग्रेस से जुड़े लेिकन संगमा का समर्थन करने पर कुछ ही िदन बाद हुए थे बाहर

अरविंद नेताम के कांग्रेस प्रवेश की कहानी एक साल पहले ही शुरू हो गई थी 9 जनवरी को इस संबंध में भास्कर ने खबर भी प्रकाशित की थी। इस दौरान राहुल और आदिवासी नेताओं के बीच हुई बैठक का खुलासा किया गया था, लेकिन दो महीने पहले 28 फरवरी को अरविंद नेताम कांग्रेस के एक लंच में शामिल हुए। इसके बाद कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया, उप नेता प्रतिपक्ष कवासी लखमा सहित अन्य बड़े कांग्रेसी नेताओं ने उनके सम्मान में बयान दिए भास्कर ने 1 मार्च के अंक में ही बता दिया था कि कांग्रेस में वापस आना तय हो गया।

9 जनवरी और फिर 11 मार्च को ही भास्कर ने कर दी थी पुष्टि

कांग्रेस से बाहर का रास्ता दिखाए जाने के बाद अरविंद नेताम ने बहुजन समाज पार्टी, भाजपा और राकांपा में प्रवेश किया, 22 सालों में तीन पार्टियां बदली पर किसी भी पार्टी में वे ज्यादा दिन तक नहीं रुके इसके बाद पिछले एक दशक से वे आदिवासी समाज के लिए काम करने लगे। दस सालों में वे किसी राजनीतिक पार्टी के कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए हैं लेकिन आदिवासियों के हितों के लिए सभी दलों पर आक्रमण किया। इस बीच उनकी कुछ दिनों के लिए कांग्रेस में वापसी हुई थी लेकिन 2012 में उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव के दौरान आदिवासी नेता पीएम संगमा का समर्थन किया तो उन्हें फिर से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। कांग्रेस में वापसी का सबसे बड़ा बेस आदिवासी समाज के लिए काम करना बना, अभी प्रदेश में 39 ऐसी सीटें हैं जो आदिवासी बहुल हैं। ऐसे में कांग्रेस अरविंद नेताम को यहां आदिवासी चेहरे के तौर पर प्रमोट कर सकती है।

22 साल में 3 पार्टी बदली, कहीं लंबा समय नहीं बिताया, लेिकन समाज के लिए डटकर काम किया यही वापसी का कारण बना

कांग्रेस को मिला एक और आदिवासी चेहरा : इस वापसी को राजनीतिक गलियारों के जानकार आदिवासी वोट बैंक को अपने पक्ष में करने की एक बड़ी रणनीति से जोड़ रहे हैं। दरअसल राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के लिए आदिवासी फैक्टर पर काम करने की शुरुआत एक साल पहले ही कर दी थी और इस बार सत्ता का रास्ता आदिवासियों के जरिए बनाने की योजना पर वे लगातार काम कर रहे थे। ऐसे में पूरे प्रदेश में उन्हें ऐसे कई आदिवासी चेहरों की जरूरत थी जिसके जरिए वे सीधे आदिवासियों तक पहुंच सकें।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×