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दूसरे दिन जगह बदलकर रेत खोदती रहीं 40 से अधिक महिलाएं, जिम्मेदारों की नींद नहीं खुली

शहर सीमा से लगे इंद्रावती नदी में इन दिनों रेत के अवैध खनन का मामला थमता नजर नहीं आ रहा है। पिछले कई दिनों करीब 30...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 02:15 AM IST

दूसरे दिन जगह बदलकर रेत खोदती रहीं 40 से अधिक महिलाएं, जिम्मेदारों की नींद नहीं खुली
शहर सीमा से लगे इंद्रावती नदी में इन दिनों रेत के अवैध खनन का मामला थमता नजर नहीं आ रहा है। पिछले कई दिनों करीब 30 महिलाएं नियमों काे ताक पर रखकर रेत की अवैध खुदाई कर रही थीं। इस मामले की जानकारी खनिज विभाग के अधिकारियों को देने के बाद भी गुरूवार की शाम तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। दूसरी ओर अवैध खनन का दायरा बढ़ाते हुए गुरूवार को ही करीब एक दर्जन महिलाओं ने नदी के दूसरे तट की ओर पानी कम होने का फायदा उठाते हुए अवैध खुदाई शरू कर दी है। पहले दिन महिलाओं ने करीब दो ट्रैक्टर रेत नदी से निकाली। इसमें जहां उन्होंने करीब एक ट्रैक्टर रेत नदी के अंदर ही भंडारित किया वहीं एक ट्रैक्टर रेत नदी के बाहर।

अवैध रूप से नदी से निकाली जा रही रेत को लेकर जब महिलाओं से बात की गई तो उन्होंने कहा कि अन्य कामों में इतना पैसा नहीं मिलता है जितना उन्हें रेत की निकासी के बाद उसे बेचने में मिल रहा है। महिलाओं ने कहा कि इस समय बाजार में रेत के दाम काफी बढ़ गए हैं जिसका फायदा उन्हें मिल रहा है। नाम नहीं बताने की शर्त पर कई महिलाओं ने बताया कि रेत खरीदने कई व्यापारी उनसे मिलने आते हैं। जो भी व्यापारी उनके मुताबिक रेट देता है उसको ही वे बेचती हैं।

महिलाओं ने बताया कि रेत बेचने में उन्हें कोई परेशानी नहीं हो रही है। इस सीजन में अब तक करीब 60 हजार रुपए से अधिक की रेत बेच दी है। खनिज विभाग के द्वारा कार्रवाई नहीं किए जाने से इसका फायदा वे लगातार उठा रही हैं। गौरतलब है कि इस काम में ठेकेदारों ने नदी से रेत निकालने के लिए मजदूरी करने वाली महिलाआें को अपना मोहरा बनाया है।

माफिया इंद्रावती को चीर रहे, जिम्मेदार बेखबर

जगदलपुर. इंद्रावती के तट पर गुरुवार से दूसरी जगह रेत की खुदाई करतीं महिलाएं।

निगम के ईई ने कहा-इसकी जानकारी लेंगे राजस्व विभाग से

इधर दूसरी ओर जब अवैध खनन के मामले को लेकर एक बार फिर से नगर निगम के कार्यपालन अभियंता और पीआरओ एचबी शर्मा से बात की गई तो उन्होंने सबसे पहले खुद को इस मामले की जानकारी नहीं होने की बात कही लेकिन जब उन्हें बताया गया कि इस काम को लेकर निगम गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाए हुए है तो उन्होंने कहा कि जल्द ही इस मामले को लेकर राजस्व विभाग के अधिकारियों से बातचीत की जाएगी। वहीं खनिज विभाग के अधिकारियों का कहना है यदि निगम अवैध खनन को बंद करने और खदान अनुमति के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजता है तो इसे जल्द ही स्वीकृति दे दी जाती। इसके चलते निगम को हर साल पांच से सात लाख का राजस्व प्राप्त हो जाता ।

सात खदानों को नहीं मिली पर्यावरण की स्वीकृति

खनिज विभाग ने जिले में 27 रेत खदानों का संचालन करने की कोशिश में लगा हुआ है, लेकिन अब तक उन्हें सात खदानों की पर्यावरण स्वीकृति नहीं मिली है। इन खदानों में बालेंगा, कलचा, दुबेउमरगांव, बजावंड, टिकनपाल, तोकपाल, तारापुर अ और ब खदानें शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक ये नई खदानें हैं जिन्हें पंचायत से स्वीकृति मिल चुकी है।

पिछले साल 8 मामले मिले थे अवैध खुदाई के

जिले में पिछले साल नदियों से अवैध रेत निकासी को लेकर 8 मामले दर्ज किए थे, जिसमें अधिकतर मामले बस्तर और जगदलपुर ब्लाक के थे। वहीं इस साल अब तक एक भी मामला खनिज विभाग को नहीं मिला है। इसके अलावा पिछले साल अवैध परिवहन के 193 मामले दर्ज करते हुए खनिज विभाग के अधिकारियों ने 33 लाख 58 हजार 854 रुपए की वसूली की थी जबकि इस साल अब तक एक भी मामला नहीं मिला है।

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