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स्वस्थ हुए महाप्रभु, नए कलेवर में दिए दर्शन गजामूंग और फनस कोसा का लगाया भाेग

जगन्नाथ मंदिर में शुक्रवार को नेत्रोत्सव पूरे विधि विधान के साथ मनाया गया। इस दौरान मंदिर जगन्नाथ के जयघोष से...

Danik Bhaskar | Jul 14, 2018, 02:35 AM IST
जगन्नाथ मंदिर में शुक्रवार को नेत्रोत्सव पूरे विधि विधान के साथ मनाया गया। इस दौरान मंदिर जगन्नाथ के जयघोष से गूंजता रहा। 15 दिनों के बाद होने वाले इस विधान में भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा तथा बलभद्र को नए वस्त्र, चांदी के आभूषण पहनाने के साथ उन्हें काजल लगाया और आइना भी दिखाया गया। इस दौरान उन्हें सादा भोजन कराया गया।

मंगल आरती, महाभिषेक और श्रृंगार के बाद भगवान नए कलेवर में भक्तों को दर्शन दिए। मंदिर के पुजारियों के साथ ही सदस्यों ने कहा कि अस्वस्थ होने के कारण लंबे समय तक जगन्नाथ भगवान भक्तों से दूर थे लेकिन नेत्रोत्सव के बाद यह दूरी मिट गई है। अब भक्तों को हर दिन भगवान के दर्शन मिलेंगे। समाज के सदस्य नरेंद्र पानीग्रही ने बताया कि सालों से चली आ रही परंपरा के अनुसार भगवान के 22 विग्रहों को एक साथ रखकर उनका श्रृंगार किया गया। भगवान के विग्रहों को सजाने के लिए सुबह से समाज के लोग जुटे थे।

नेत्रोत्सव के बाद भगवान को गजामूंग और फनस कोसा का भाेग लगना शुरू हो गया है। समाज के सदस्यों ने बताया कि सालों से हर साल परंपरा के अनुसार मनाए जाने वाले इस पर्व में हर विधि विधान का पालन किया जा रहा है। 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष हेमंत पांडे ने बताया कि दो दलों ने मिलकर भगवान जगन्नाथ की नेत्रोत्सव पूजा की। एक तरफ 300 अौर दूसरी तरफ 60 घरों के यजमान इस पूजा में शामिल हुए।

जगदलपुर. भगवान के श्रृंगार के दौरान घंटा बजाती महिला।

रथयात्रा आज, राजपरिवार के लोग भी होंगे शामिल

शनिवार को रथ यात्रा जगन्नाथ मंदिर से शुरू होकर गोल बाजार और गुरुनानक चौक से हाेते हुए दंतेश्वरी मंदिर पहंुचेगी जहां भगवान का स्वागत किया जाएगा। इसके बाद यह यात्रा सिरहासार भवन में समाप्त होगी। जहां से भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र के साथ मौसी के घर जाएंगे। रथ ग्रामीणों व शहरवासियों के द्वारा खींचा जाएगा। समाज के सदस्य नरेंद्र पानीग्रही ने बताया कि इस यात्रा को शुरू करने के पहले राजपरिवार के सदस्यों को लेने के लिए एक दल एक बजे राजमहल जाएगा। जहां से राजपरिवार के सदस्यों को लाने के बाद यह यात्रा शाम चार बजे शुरू की जाएगी। रथ यात्रा में कोई बाधा न आए इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

भगवान को अाइना दिखा काजल लगाती आरण्यक ब्राह्मण समाज की महिला।

15 साल के कार्यकाल में पहली बार पहुंचे सीएम

सीएम डॉ. रमन सिंह ने अपने 15 साल के कार्यकाल में पहली बार जगदलपुर के जगन्नाथ मंदिर में पहुंचे थे। जिस समय सीएम मंदिर मंे पहुचे वहां पर भगवान जगन्नाथ की आरती हो रही थी। स्कूल शिक्षा मंत्री केदार कश्यप, वन मंत्री महेश गागड़ा, 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज और गोंचा महापर्व समिति के सदस्यों के साथ पहुंचे सीएम ने इस दौरान भगवान जगन्नाथ की आरती की और प्रदेश की जनता की खुशहाली की कामना की। आरती करने के बाद सीएम ने मंदिर के हर एक कक्ष में जाकर भगवान को नमन किया। इसके बाद उन्होंने गोंचा गुड़ी का उदघाटन कर तुपकी भी चलाई। इसके बाद में 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज और गोंचा महापर्व समिति के सदस्यों से मिलकर वे अपने निर्धारित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मंदिर से रवाना हो गए। सीएम के आगमन को देखते हुए मंदिर के पास वाहनों की अावाजाही रोक दी गई थी। मंदिर में जाने से पहले लोगों के हर सामान की तलाशी ली गई। गौरतलब है कि भगवान जगन्नाथ को तुपकी से गार्ड आॅफ आनर देने की परंपरा केवल बस्तर में ही है। इस विधान को सालों से एक परंपरा के अनुसार आज भी पूरा किया जा रहा है।

भगवान को लगने वाले भोग की जांच की बीएमओ ने

सीएम डॉ. रमन सिंह के जगन्नाथ मंदिर पहुंचने के पहले जगदलपुर ब्लाक के बीएमओ डॉ. वीरेंद्र ठाकुर ने गजामूंग और अन्य प्रसाद चखकर जांच की और सभी मानक होने की पुष्टि की। बीएमओ ने कहा कि सीएम के मंदिर में आने के चलते भोग प्रसाद लेने के चलते मंदिर में भगवान जगन्नाथ को चढ़ाए जाने वाले प्रसाद की जांच की गई। जांच में सभी खाद्य वस्तुएं खाने-पीने के लायक और पैकेजिंग एक्ट के तहत पाई गई। उन्होंने कहा कि इस जांच की जानकरी स्वास्थ्य विभाग और पुलिस विभाग को दी जाएगी।