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सरकारी नर्सरी में कोकोपिड से तैयार सब्जियों के पलहे को लेकर किसानों का बढ़ा रुझान साल भर में 150 किसानों ने लिया लाभ सरकारी योजना का

जिले में रहने वाले करीब पौने तीन लाख परिवारों को साल भर ताजी सब्जियां मिल सके इसलिए क्षेत्र के किसान अब विभिन्न...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 02:55 AM IST

सरकारी नर्सरी में कोकोपिड से तैयार सब्जियों के पलहे को लेकर किसानों का बढ़ा रुझान साल भर में 150 किसानों ने लिया लाभ सरकारी योजना का
जिले में रहने वाले करीब पौने तीन लाख परिवारों को साल भर ताजी सब्जियां मिल सके इसलिए क्षेत्र के किसान अब विभिन्न प्रकार की सब्जियों के हाइब्रिड पौधे तैयार करवाने लगे हैं। इस काम के लिए डोंगाघाट स्थित उद्यानिकी विभाग की नर्सरी में पिछले साल 150 किसानों ने पौधे तैयार करवाए थे। सरकारी नर्सरी में मिलने वाली सुविधा का लाभ लेने वाले किसानों में बस्तर और दंतेवाड़ा जिले के किसान शामिल हैं।

किसानों को दिए जा रहे सब्जी के पलहे में कोई खामी न हो इसके लिए इन लाखों पौधों की रोपाई विशेष आटो सीड प्लांटेशन मशीन से की जाती है। नर्सरी प्रभारी करण सोनकर ने बताया कि बस्तर जिले में सरकारी स्तर पर नर्सरी के जरिए मिट्‌टी का उपयोग किए बिना ही नारियल चूरे में पौधे उगाकर किसानों को दिया जा रहा है। किसान हर मौसम में इस विधि से पलहे तैयार कर अासनी से सब्जी की खेती 12 महीने कर सकते हैं। इसके लिए बस नर्सरी में सीड के साथ 50 पैसे प्रति पौधेे के हिसाब से पैसा लिया जा रहा है। इसका फायदा विभाग के साथ ही किसानों को बड़े पैमाने पर मिल रहा है। उन्होंने बताया कि इस नर्सरी में लौकी, करैला, मिर्च, टमाटर, खीरा, बैगन, तोरई के पौधे तैयार किए जा रहे हैं।

किसानों को पसंद आ रहे सरकारी नर्सरी में मिलने वाले सब्जियों के पलहे बीज देने के बाद एक पौधे का 50 पैसा दे रहे और कमा रहे लाखों रुपए

21 दिनों में तैयार होते हैं पाैधे, बंगलुरू से आया कोकोपिड

किसानों द्वारा लाए गए हाइब्रिड बीजों से पौधों को तैयार करने के लिए मिट्टी की जगह कोकोपीट का उपयोग किया जा रहा है। कोकोपिड में सब्जियों के बीज को डालने के बाद इसमें आटो सीड प्लांटेशन मशीन में डाला जाता है। जहां पर ये 21 दिनों में पौधा तैयार किया जाता है। पौधे में किसी प्रकार की बीमारी न हो इसके लिए समय-समय पर इसका वेरीफिकेशन कर दवा का छिड़काव भी किया जाता है। किसानों को सब्जियों के पलहे काे तैयार करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है, लेकिन जब से सरकारी तौर पर यह सुविधा मिलने लगी है उन्होंने यह काम छोड़ दिया है। नर्सरी प्रभारी ने बताया कि किसानों की बढ़ती मांग को देखते हुए कोकोपिड बंगलुरू से बड़े पैमाने पर मंगवाई गई है।

जगदलपुर. डोंगाघाट नर्सरी में तैयार सब्जियों के पलहा।

1 : नुकसान की आशंंका और देखरेख की झंझट से मिलती है निजात

2 : कम लागत में तैयार होते हैं पौधे

3 : बीज का जर्मीनेशन अच्छा होता है

4 : पौधे अच्छे होने से फसल का उत्पादन बड़े पैमाने पर हो रहा है।

5 : मिट्टी की तुलना में कोकोपिड में एक हफ्ते पहले तैयार होता है पलहा

यह फायदा हो रहा है किसानों को

क्या कहते हैं किसान

तितिरगांव के किसान किशोर कुमार ने बतााय कि उन्होंने इस साल तीन एकड़ में करैले की खेती के लिए सरकारी नर्सरी में बीज तैयार करवाया था। िजसमें बीज देने के बाद उन्हें केवल 10 हजार और देने पड़े। किसान ने बताया कि नर्सरी से मिलने वाले पौधों में से एक भी पौधा खराब नहीं था। पौधे अच्छे होने से फसल अच्छी हुई और काफी मुनाफा कमाया।

दंतेवाडा़ के किसान राजू बघेल ने बताया कि उन्होंने 4 एकड़ में मिर्च की खेती के लिए डोंगाघाट में चल रही उद्यानिकी विभाग की नर्सरी में 30 हजार पौधे तैयार करवाए थे। उन्होंने कहा कि खुद पौधे लगाने में काफी परेशानी होती है और नुकसान की भी आशंका हमेशा बनी रहती है। जबकि सरकारी नर्सरी से हमें सीधे उच्च क्वालिटी के अच्छे पौधे मिल रहे हैं।

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