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मदरसों में 9वीं से रेगुलर पढ़ाई अगले सत्र में होगी मुमकिन / मदरसों में 9वीं से रेगुलर पढ़ाई अगले सत्र में होगी मुमकिन

Bhaskar News Network

Jul 14, 2018, 03:10 AM IST

News - पश्चिम बंगाल के बाद छत्तीसगढ़ देश का ऐसा दूसरा राज्य बन सकता है, जहां स्टूडेंट्स मदरसों में 9 वीं से रेगुलर पढ़ाई कर...

मदरसों में 9वीं से रेगुलर पढ़ाई अगले सत्र में होगी मुमकिन
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पश्चिम बंगाल के बाद छत्तीसगढ़ देश का ऐसा दूसरा राज्य बन सकता है, जहां स्टूडेंट्स मदरसों में 9 वीं से रेगुलर पढ़ाई कर सकेंगे। इसको लेकर प्रशासन और मदरसा बोर्ड दोनों की ओर से तेज कवायद की जा रही है। दरअसल, प्रदेश के मदरसों में रिलीजियस यानी धार्मिक शिक्षा के साथ छात्र-छात्राओं को आधुनिक शिक्षा भी दी जाती है।

राज्य के पाठ्य पुस्तक निगम के किताबें और स्कूली शिक्षा का पाठ्यक्रम के आधार पर ही मदरसों में एजुकेशन दिया जाता है। छग में फिलहाल प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर नियमित पढ़ाई करवाई जा रही है। पिछले शैक्षणिक सत्र के मुताबिक सूबे में 216 मदरसों में पहली से पांचवीं यानी प्रायमरी लेवल तक की पढ़ाई की सुविधा है। जबकि 88 मदरसों में माध्यमिक यानी छठवीं से आठवीं तक छात्र शिक्षा ग्रहण करते हैं। वहीं धार्मिक शिक्षा के लिए 4 नाजरे हैं। हर साल करीब 800 से ज्यादा छात्र छात्राएं आठवीं तक की पढ़ाई पूरी करके इनसे निकलते हैं। इतना ही नहीं मदरसों में हिंदी और उर्दू दोनों मीडियम में पढ़ाई करवाई जाती है। जबकि धार्मिक शिक्षा अरबी में दी जाती है। इंग्लिश मीडियम में भी तालीम देने की कोशिश की जा रही है। जानकारी के मुताबिक प्रदेश में ऐसे 55 से ज्यादा मदरसे हैं जहां 9वीं की पढ़ाई शुरू करवाई जा सकती है। आठवीं से आगे पढ़ाई के लिए शासन और मदरसा बोर्ड की ओर से एक मसौदा तैयार किया गया है। मदरसा बोर्ड छग के अध्यक्ष मिर्जा एजाज बेग का कना है कि उम्मीद है नई विधानसभा में यह विधेयक पारित हो और अगले शिक्षा सत्र से प्रदेश के पचास से ज्यादा मदरसों में नौवीं से नियमित तालीम शुरू हो जाएगी।





((बॉक्स मेटर))

हिंदू छात्र भी करते हैं पढ़ाई

दूरदराज के ऐसे इलाके जहां स्कूल नहीं हैं लेकिन मदरसे हैं वहां हिंदू छात्र भी मदरसों में ही पढ़ाई करते हैं। पूरे देश में इस तरह का मॉडल केवल यहीं पर है। हिंदू छात्रों को हिंदी में पढ़ाई करने की छूट होती है। वहीं धार्मिक शिक्षा को लेकर कोई बाध्यता भी नहीं होती है। एक भाषा के तौर पर उर्दू को पढ़ना या नहीं पढ़ना भी छात्र पर निर्भर रहता है।

मदरसों की तादाद

प्राथमिक - 216

माध्यमिक - 88

नाजरा (धार्मिक शिक्षा) - 04

(इस सत्र में कुछ और नए मदरसों का पंजीयन किया गया है। इस लिहाज से इनकी तादाद और ज्यादा हो सकती है))

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