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नया रायपुर का कचरा फेंक रहे सरोना में एयरपोर्ट होने से नहीं बना पाए ट्रेचिंग ग्राउंड

आठ हजार हेक्टेयर में फैले नया रायपुर में कचरा प्रबंधन सिस्टम को लागू कर दिया गया है, लेकिन ट्रेचिंग ग्राउंड अब तक...

Danik Bhaskar | Jul 14, 2018, 03:15 AM IST
आठ हजार हेक्टेयर में फैले नया रायपुर में कचरा प्रबंधन सिस्टम को लागू कर दिया गया है, लेकिन ट्रेचिंग ग्राउंड अब तक नहीं बनाया गया है। एयरपोर्ट पास होने से उस दायरे के 15 किमी तक कचरा डंपिंग ग्राउंड नहीं बनाया जा सकता है। इसे लेकर अब तक जगह ही फाइनल नहीं हो पाई है। ऐसे में अब नया रायपुर का कचरा भी सरोना ट्रेचिंग ग्राउंड में फेंक रहे हैं।

नया रायपुर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की जिम्मेदारी एक निजी कंपनी को दी गई है। नए शहर को साफ-सुथरा रखने ऑफिस से लेकर लोगों के घर से कचरा उठाने काम शुरू हो गया है, लेकिन कचरा को डंप करने के लिए नया रायपुर विकास प्राधिकरण (एनआरडीए) के पास अपना ट्रेचिंग ग्राउंड ही नहीं है। कंपनी के साथ एक साल का अनुबंध हुआ है, जिसके लिए एक करोड़ तीन लाख रुपए का भुगतान किया जाएगा। नया रायपुर से कचरा इकट्ठा कर सरोना ट्रेंचिंग ग्राउंड में ही डंप किया जा रहा है। हालांकि कचरा प्रबंधन के लिए नया रायपुर में ही रिसाइकिल प्लांट बनाने की योजना है और इसको स्थापित करने में एक से डेढ़ साल लगेगा। इस दौरान नया रायपुर का कचरा सरोना के ट्रेचिंग ग्राउंड में ही डंप किया जाएगा। नया रायपुर क्षेत्र में कहीं भी ट्रेचिंग ग्राउंड बनाने को लेकर अभी सहमति नहीं बन सकी है।

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डंपिंग ग्राउंड आएंगे पक्षी, एयरपोर्ट अथॉरिटी की हरी झंडी नहीं मिली

ट्रेचिंग ग्राउंड बनाने के लिए एनआरडीए को एयरपोर्ट अथॉरिटी से भी अनुमति लेनी है। मिली जानकारी के मुताबिक एयरपोर्ट के रनवे का विस्तार हो रहा है, लेकिन एयरपोर्ट परिसर के कम से कम 15 किमी के दायरे में ट्रेचिंग ग्राउंड बनाना संभव नहीं है। ट्रेचिंग ग्राउंड की से वहां पक्षियों की संख्या बढ़ेगी और इससे विमान को खतरा हो सकता है। इसे लेकर एयरपोर्ट अथॉरिटी और एनआरडीए के बीच कई बैठक हो चुकी है। लेकिन अभी तक सहमति नहीं बन सकी है। हालांकि एनआरडीए के कुछ अफसरों के मुताबिक ऐसी जगह का चयन जल्द ही किया जाएगा, जहां ट्रेचिंग ग्राउंड बनाने से कोई परेशानी नहीं होगी।


रिसाइकिलिंग प्लांट को लेकर आईआईटी मुंबई से मदद

नया रायपुर को सभी स्तर पर स्मार्ट बनाने की कवायद चल रही है। यहां के कचरा के लिए भी रिसाइकिलिंग प्लांट लगेगा। इसके लिए आईआईटी मुंबई की एक टीम इसके लिए काम कर रही है। वर्तमान के साथ आने वाले 30-40 साल को लेकर नया रायपुर में आईआईटी की टीम ने सर्वे किया है। इस रिपोर्ट के आधार पर यहां कचरा प्रबंधन से संबंधित कई प्लांट लगाए जाएंगे। कचरा से खाद बनाने से लेकर प्लास्टिक को रिसाइकिल करने वाले प्लांट भी लगाने की तैयारी है। हालांकि इस दिशा में अभी काम केवल कागजों पर ही हो सका है।

जिस कंपनी को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का काम दिया गया है, उसके साथ कई शर्तें भी जुड़ी है। शर्त के मुताबिक नया रायपुर में सफाई के लिए जो वाहन उपयोग में लाए जाएंगे, उनसे कचरा रोड पर नहीं गिरना चाहिए। इसके लिए एजेंसी को रिफ्यूज कांपेक्टर वाहन (पूरी तरह से बंद) से ही कचरे की ढुलाई करनी होगी। सड़क पर कचरा फैलने पर कंपनी पर एनआरडीए प्रशासन कार्रवाई करेगा। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में मेडिकल वेस्ट शामिल नहीं है। इसके लिए चिकित्सा संस्थानों को अलग से प्रबंधन करना होगा। सभी अस्पतालों के लिए एनआरडीए ने अलग से कचरा प्रबंधन करने के निर्देश जारी किए हैं।


रहवासियों से कोई शुल्क नहीं लेंगे, रोजाना 28 घनमीटर कचरा

एनआरडीए कचरा उठाने के एवज में रहवासियों से कोई चार्ज नहीं लेगा। नया रायपुर में हर रोज 28 घनमीटर सॉलिड वेस्ट इकट्ठा हो रहा है। इसमें राजधानी परिसर और रिहायशी क्षेत्रों का कचरा भी शामिल है। आने वाले सालों में यह और बढ़ेगा। एनआरडीए अभी से तैयारी कर रहा है। नया रायपुर में अभी तक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए कोई स्थायी इंतजाम नहीं था। अब एजेंसी तय होने के बाद डोर टू डोर घरेलू कचरा उठेगा। हाउसिंग बोर्ड व बिल्डरों की काॅलोनियों में घरों से निकलने वाला कचरा कलेक्शन प्वाइंट से इकट्ठा होगा। ऑफिस व कर्मशियल कॉम्प्लेक्स का कचरा डंपिंग ग्राउंड जाएगा।