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रोड की हो रही जांच, फेल होने पर फिर से बनानी होगी

News - राजधानी में बनी सभी नई कंक्रीट सड़कों की गुणवत्ता की जांच की जा रही है। निर्माण में किसी तरह की कमी होने या...

Dainik Bhaskar

Jul 14, 2018, 03:15 AM IST
रोड की हो रही जांच, फेल होने पर फिर से बनानी होगी
राजधानी में बनी सभी नई कंक्रीट सड़कों की गुणवत्ता की जांच की जा रही है। निर्माण में किसी तरह की कमी होने या मापदंडों के अनुरूप नहीं बनने पर दोबारा सड़क बनाई जाएगी। इसका पूरा खर्च निर्माण एजेंसी संबंधित ठेकेदार से वसूलेगी। जब तक सड़क फिर से नहीं बन जाती तब तक ठेकेदार का भुगतान भी नहीं होगा।

सड़कों के निर्माण में भ्रष्टाचार की शिकायतें आम हैं। सीसी रोड निर्माण में सबसे ज्यादा शिकायत मिक्सिंग को लेकर होती है। सड़क निर्माण के दौरान तय मापदंडों के अनुरूप रेत, गिट्टी और सीमेंट का मिश्रण होना चाहिए। आमतौर पर यह शिकायत रहती है कि भ्रष्टाचार या पैसे बचाने के लिए ठेकेदार मिश्रण में गड़बड़ी करता है। सड़क की ऊंचाई भी कम कर दी जाती है। इसी की जांच के लिए नगरीय प्रशासन विभाग अब शहर की नई बनी कंक्रीट सड़कों की क्रसिंग स्टंट की जांच कर रहा है। टेस्ट में यदि सड़क की गुणवत्ता खराब निकली तो ठेकेदार को सड़क तोड़कर फिर से बनानी होगी। दोबारा सड़क बनने के बाद उसकी फिर से जांच होगी। इस जांच में पास होने पर ही भुगतान किया जाएगा। दूसरी बार भी सड़क की गुणवत्ता घटिया रही तो ठेकेदार को ब्लेक लिस्टेड किया जा सकता है।

जोन सात की तीन सड़क : नगरीय प्रशासन विभाग के अफसरों ने जोन सात की तीन सड़कों में से दो की जांच के लिए चुना है। इसमें करीब डेढ़ महीना पहले बनी लाखे नगर चौक तथा मोमिनपारा से ललिता चौक को चुना है। एक अन्य सड़क हांडी तालाब के ऊपर बनाई गई है। हर सड़क के तीन सेंपल लिए जाएंगे। इस तरह दो सड़कों से छह सेंपल लेकर उसकी जांच की जाएगी। इसी तरह जोन-2 की भी कुछ सड़कों के सेंपल लिए जाएंगे।

कंक्रीट की एक वर्ग सेंटीमीटर सड़क जब 200 किलो का वजन सहकर भी नहीं टूटी तो गुणवत्ता सौ फीसदी

इस तरह हो रही है जांच

नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारी जिस सड़क की जांच करेंगे सबसे पहले उसकी कोर कटिंग की जाती है। कोर कंटिंग यानी ड्रील मशीन से सड़क को काटकर निकाला जाता है। प्रयोगशाला में काटकर निकाली गई सड़क को कंप्रेसिव स्ट्रेंथनिंग के जरिए उसपर दबाव डाला जाता है। अफसरों के अनुसार 200 किलो प्रति वर्ग सेंटीमीटर का भार डाला जाता है। इतना भार सहने के बाद भी यदि सड़क से काटकर निकाला गया सेंपल नहीं टूटता तो समझा जाएगा कि सड़क की गुणवत्ता सही है। इससे कम भार में ही सेंपल टूट गया तो समझो कि सड़क की गुणवत्ता अच्छी नहीं है।



ऐसी सड़क दोबारा बनाई जाएगी।

इस तरह लिया जा रहा सैंपल।

तीन एजेंसियां कर रही हैं काम

राजधानी रायपुर में इस समय सड़कों पर तीन एजेंसियां काम कर रही हैं। नगर निगम अपने वार्डों में कंक्रीट सड़क बनाता है। इसके अलावा लोक निर्माण विभाग और नगरीय प्रशासन विभाग की इंजीनियरिंग सेल भी सड़क बना रही है। बताया जा रहा है कि लोक निर्माण विभाग अपने सड़कों की टेस्टिंग खुद करता है। नगरीय प्रशासन विभाग भी अब अपनी सड़कों की टेस्टिंग कर रहा है। निगम की सड़कों की अब तक जांच की कोई व्यवस्था नहीं थी।


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