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मनुष्य को भगवान से जोड़ने की डोर संसार में सिर्फ गुरु के पास ही : गोपाल शरण देवाचार्य

रोज पतन की ओर बढ़ते इस संसार के बार-बार जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति चाहिए, तो भगवान श्रीकृष्ण ही उसका एकमात्र सहारा...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 17, 2018, 03:20 AM IST

मनुष्य को भगवान से जोड़ने की डोर संसार में सिर्फ गुरु के पास ही : गोपाल शरण देवाचार्य
रोज पतन की ओर बढ़ते इस संसार के बार-बार जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति चाहिए, तो भगवान श्रीकृष्ण ही उसका एकमात्र सहारा हैं। मनुष्य को भक्ति रूपी डोर के जरिए भगवान से जोड़कर भवसागर से पार लगाने का काम सिर्फ एक गुरू ही कर सकता है। बिन गुरू के मनुष्य का जीवन दिशाहीन होता है, और बिना दिशा के बार-बार संसार में आना जाना सिर्फ अपनी शक्तियों को क्षीण करना ही है। इसलिए अगर हमें जन्म बंधन से मुक्ति पाकर परमसुख को प्राप्त करना है तो भगवान की शरण में जाना ही होगा। यह बातें बुधवार को पुरुषोत्तम मास के मौके पर न्यू चंगोराभाठा के गणपति नगर में परमेश्वरी चौक स्थित गोपाल भवन में चल रही भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास गोपालशरण देवाचार्य ने कही।



आगे उन्होंने बताया कि भगवान की प्राप्ति दुर्लभ है लेकिन उससे भी दुर्लभ जीवन में गुरु का मिल जाना है। जीवन में अगर गुरु की प्राप्ति हो गई तो फिर संसार से विरक्ति निश्चित हो जाएगी।

श्रीकृष्ण के 22 अवतारों का वर्णन किया

कथा में भगवान की महिमा का वर्णन करते हुए कथा व्यास गोपालशरण देवाचार्य ने बताया कि श्रीकृष्ण परिपूर्ण अवतार हैं। उनकी लीलाएं ऐश्वर्य और माधुर्य से युक्त हैं। भक्तों का कल्याण करने के लिए भगवान विविध रूप धारण करते हैं। तभी तो भागवत महापुराण में भगवान श्रीकृष्ण के 22 अवतारों का वर्णन किया गया है। श्रीमद् भागवत श्रवणीय ग्रंथ है। अगर मनुष्य भागवत की कथा श्रवण करें तो निश्चित ही उसका मन भगवान श्रीकृष्ण में लग जाएगा।

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