• Hindi News
  • Chhatisgarh
  • Raipur
  • News
  • चौथे वेतनमान से ग्रेड पे में गड़बड़ी, कई बार अर्जी दी पर सातवें तक नहीं सुधरी
--Advertisement--

चौथे वेतनमान से ग्रेड-पे में गड़बड़ी, कई बार अर्जी दी पर सातवें तक नहीं सुधरी

News - रायपुर

Dainik Bhaskar

Jul 14, 2018, 03:20 AM IST
चौथे वेतनमान से ग्रेड-पे में गड़बड़ी, कई बार अर्जी दी पर सातवें तक नहीं सुधरी
रायपुर
महिला बाल विकास विभाग में पदस्थ पर्यवेक्षकों की वेतन विसंगति को लेकर लगातार जानकारी मिल रही थी। पर्यवेक्षक के पद पर पदस्थ महिलाओं को वेतन आयोग की रिपोर्ट में 5 हजार से 8 हजार रुपए तक पे ग्रेड देने की बात कही जा रही है, जबकि विभाग से उनको 4 हजार से 6 हजार रुपए ग्रेड-पे तक का वेतन ही दिया जा रहा है। वहीं अन्य विभागों में उनके समकक्ष अधिकारियों को उनसे ज्यादा ग्रेड-पे का वेतनमान दिया जा रहा है, जबकि तीसरे वेतनमान तक उनका वेतन समकक्ष लोगों से ज्यादा था। जिसे देखते हुए चौथे वेतनमान में अन्य विभागों के उनके समकक्ष कर्मचारियांे के वेतन को उनके बराबर कर दिया गया। वहीं पांचवे वेतनमान में उनके समकक्ष अधिकारियों का वेतन उनसे ज्यादा कर दिया गया। छठवें और सातवें में भी यही हुआ। इनका वेतनमान नहीं बढ़ाया गया।

चौथे वेतनमान में किया गया बराबर

पशु चिकित्सा अधिकारी, पंचायत निरीक्षक और महिला बाल विकास विभाग के पर्यवेक्षक का पद समकक्ष है। दूसरे और तीसरे वेतन आयोग में पर्यवेक्षक का इन लोगों से ज्यादा ग्रेड पे था। चौथे वेतन आयोग में शासन ने इन सभी का पे ग्रेड 1320 से 2040 कर दिया। वहीं इसके बाद पाचंवे वेतन आयोग में पशु चिकित्सक और पंचायत निरीक्षकों का 5000 से 8000 ग्रेड पे कर दिया गया जबकि पर्यवेक्षकों को 4000 से 6000 हजार ही किया गया । वहीं छठवें वेतन आयोग में पशु चिकित्सकों और पंचायत निरीक्षक के वेतन में बढ़ोत्तरी करते हुए 9300 से 34800 और पर्यवेक्षकों का 5200 से 20200 ही किया गया। पर्यवेक्षकों का कहना है कि उनके वेतन में सामांतर बढ़ोत्तरी नहीं की गई।

शासन को पत्र लिखा है, अब तक कोई जवाब नहीं आया

 मैंने पर्यवेक्षकों की वेतन विसंगति को लेकर शासन को पत्र लिखा है। लेकिन अभी तक वहां से किसी प्रकार का जवाब नहीं आया है। प्रतीक खरे,संयुक्त संचालक, महिला बाल विकास, रायपुर

फैक्ट फाइल

प्रदेश में पर्यवेक्षकों की संख्या

1750

प्रदेश में 1750, रायपुर में 72 पर्यवेक्षक

प्रदेश में महिला बाल विकास विभाग में वर्तमान में 1750 महिला पर्यवेक्षक पदस्थ हैं। जिसमें से रायपुर जिले में 72 पदस्थ हैं। इनको महिला बाल विकास से संबंधित योजनाओं का क्रियान्वयन अपने- अपने क्षेत्रों में करना होता है। इसकी रिपोर्ट भी संबंधित जिला मुख्यालय में इन्हें ही भेजनी होती है।

8 पंचायत की जिम्मेदारी

एक पर्यवेक्षक को 8 पंचायत की जिम्मेदारी दी गई है। प्रदेश के सभी जिलों की ब्लॉकों को आठ- आठ पंचायतों के सेक्टर में बांटा गया। जिससे पर्यवेक्षकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

पदनाम बदलने की भी उठी मांग

पर्यवेक्षक का नाम पूर्व में बाल विकास विस्तार अधिकारी था। जिसे बदलकर पर्यवेक्षक कर दिया गया था। अब वहीं इसे पर्यवेक्षकों का कहना है कि इसे बदलकर दोबारा बाल विकास विस्तार किया जाए।

समकक्ष का वेतन पहले था कम

प्रदेश के अन्य विभागों में इनके समकक्ष के पदों पर नियुक्त लोगों का वेतन पहले कम था। जिसे चौथे वेतनमान में बराबर कर दिया गया। वहीं पांचवे वेतनमान में समकक्ष कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि हुई। लेकिन इनके वेतन में वृद्धि नहीं की गई। वही हाल पाचंवे,छठवें और सातवें वेतनमान में भी हुआ। इनके समकक्ष आधिकारियों के वेतन में तीनों वेतन आयोग में बढ़ोत्तरी की गई। इन तीनों वेतनमान में इनकी वेतन वृद्धि नहीं की गई। इनको अभी भी चौथे वेतनमान के अनुसार ही 25 हजार 2 सौ 51 रुपए सैलरी दी जा रही है।

रायपुर जिले में

72

व्यापमं करवाता है यह परीक्षा

पर्यवेक्षक पद के लिए व्यापमं परीक्षा को आयोजित करवाता है। जहां से चयनित होने के बाद इस पद पर नियुक्ति की जाती है। बिना परीक्षा पास किए इस पद पर नियुक्ति नहीं हो सकती है।

अन्य प्रदेशों में है ज्यादा वेतन

पर्यवेक्षकों को अन्य प्रदेशों में छत्तीसगढ़ की तुलना में ज्यादा वेतन दिया जाता है। कर्नाटक में 14550 से 26700, झारखंड व उत्तर प्रदेश में 9300 से 34800 राजस्थान में 33800 से 106700 रुपए तक दिया जा रहा है।

X
चौथे वेतनमान से ग्रेड-पे में गड़बड़ी, कई बार अर्जी दी पर सातवें तक नहीं सुधरी
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..