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विजन और प्लानिंग के साथ करें कंस्ट्रक्शन स्टैंडर्ड फॉलो करने से ही मिलेगी क्वालिटी

कंस्ट्रक्शन की फील्ड में हो रहे बदलावों और मॉडर्न टेक्नोलॉजी से वाकिफ कराने के मकसद से भारतीय मानक संस्थान नई...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 14, 2018, 03:20 AM IST

विजन और प्लानिंग के साथ करें कंस्ट्रक्शन स्टैंडर्ड फॉलो करने से ही मिलेगी क्वालिटी
कंस्ट्रक्शन की फील्ड में हो रहे बदलावों और मॉडर्न टेक्नोलॉजी से वाकिफ कराने के मकसद से भारतीय मानक संस्थान नई दिल्ली और इंडियन बिल्डिंग्स कांग्रेस छत्तीसगढ़ सेंटर की ओर से नेशनल बिल्डिंग कोड पर दो दिवसीय वर्कशॉप आयोजित की गई। पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में रखे गए कार्यक्रम के पहले दिन शुक्रवार को भारतीय मानक संस्थान की प्रमुख आईएएस सुरीना राजन ने कहा कि संस्था का कार्य सभी तरह के आइटम की कवालिटी का स्टैंडर्ड तय करना है। यदि क्वालिटी में किसी भी प्रकार की कोई कमी पाई जाती है तो संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ एक्शन सरकार लेती है।

देशभर में ज्वेलरी के 10 करोड़ पीस बनते हैं। इनमें से लगभग 4 करोड़ पीस में ही हॉल मार्क होते हैं। बाकी बिना हॉल मार्क के मार्केट में बिकते हैं। अब अवेयरनेस बढ़ी है, यही वजह है कि हॉल मार्क वाली ज्वेलरी की मांग लगातार बढ़ रही है। पीडब्ल्यूडी मंत्री राजेश मूणत ने कहा कि विकास के सभी क्षेत्रों में बहुत बड़ा हिस्सा निर्माण से जुड़ा है। इसमें क्वालिटी के सभी मानक और इंडियन बिल्डिंग कोड पूरी तरह फॉलो करना चाहिए। निर्माण के क्षेत्र में बेहतर काम के लिए हमें विजन और प्रॉपर प्लानिंग के साथ काम करने की जरूरत है। इंडियन बिल्डिंग कोड और मानक संस्थान के तय स्टैंडर्ड फॉलो करने से क्वालिटी वर्क होगा। कंस्ट्रक्शन की क्वालिटी के साथ समय सीमा का ध्यान रखा जाना भी बेहद जरूरी है। किसी भी काम को समय पर पूरा करने के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी की मदद ले सकते हैं। इससे समय की बचत होने के साथ ही परफेक्शन भी आता है। इस मौके पर राष्ट्रीय भवन निर्माण की स्मारिका का विमोचन भी किया गया।

नया रायपुर में बनेगी भारतीय मानक संस्थान की बिल्डिंग: नया रायपुर में पीडब्ल्यूडी के सहयोग से भारतीय मानक संस्थान की 6 करोड़ की लागत से बिल्डिंग तैयार की जाएगी। ये दिसंबर 2019 में रेडी हो जाएगी। सुरीना राजन ने बताया कि फिलहाल हेल्थ से जुड़े डिवाइसेस के मानक निर्धारण कर रहे हैं। इसमें दवा शामिल नहीं है। इसके अलावा नैनो टेक्नोलॉजी, साॅफ्टवेयर, इलेक्ट्राॅनिक व्हीकल, टेक्सटाइल्स के साथ ही ऐसे प्रोड्क्ट जिनसे इकोनॉमिकल ग्रोथ हो उसका स्टैंडर्ड तय करने पर फोकस किया जा रहा है।

बिल्डिंग कोड समझना जरूरी: बीआईएस के हेड संजय पंत ने बताया कि प्राकृतिक आपदाओं और नई टेक्नोलॉजी को ध्यान में रखकर नेशनल बिल्डिंग कोड में कई बदलाव किए गए हैं, जिन्हें जानना और समझना जरूरी है। सौर ऊर्जा और ग्रीनरी को भी इसमें जगह दी गई है। इस फील्ड से जुड़े प्रोफेशनल्स को वर्कशॉप और सेमिनार के जरिए नए नियमों की जानकारी दी जा रही है। कार्यक्रम में इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस के संस्थापक अध्यक्ष ओपी गोयल, अध्यक्ष अभय सिन्हा, पूर्व इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस के छग सेंटर के पूर्व अध्यक्ष जीएस सोलंकी, स्वामी विवेकानंद विवि के उपकुलपति डॉ एमके वर्मा व अन्य मौजूद रहे।

नेशनल बिल्डिंग कोड पर रखी गई नेशनल लेवल वर्कशॉप

कार्यक्रम में राष्ट्रीय भवन निर्माण की स्मारिका का विमोचन भी किया गया।

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