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सड्डू-उरकुरा शाॅर्टकट रोड: आधी बनी, आधी अटकी, क्योंकि रेलवे ने नहीं दी एनओसी

राजधानी के आउटर में हजारों लोग रेलवे आैर पीडब्ल्यूडी के बीच खींचतान से परेशान हो गए हैं। रोजाना मोवा-सड्डू और...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 03:20 AM IST

राजधानी के आउटर में हजारों लोग रेलवे आैर पीडब्ल्यूडी के बीच खींचतान से परेशान हो गए हैं। रोजाना मोवा-सड्डू और आसपास के ढाई हजार से ज्यादा लोग भिलाई जाने के लिए सड्डू से उरकुरा के बीच 4 किमी लंबी सड़क का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें 2 किमी सड़क तो बनी है लेकिन बाकी दो किमी का काम तीन साल से चालू नहीं हो पाया है। दो किमी का यह पैच गड्ढों और धूल से इस तरह सराबोर है कि परेशानी की वजह से लोगों ने करीब आठ से दस किलोमीटर घूमकर रिंग रोड से भिलाई जाना शुरू कर दिया है। इस सड़क के दो किमी के हिस्से को पीडब्ल्यूडी ने तीन साल पहले बनाया था। जिस दो किमी का काम अटका है, वह रेलवे की जमीन पर है। दिक्कत ये है कि इसे रेलवे न खुद बना रहा है, और न ही पीडब्ल्यूडी को इसे बनाने की एनओसी दे रहा है। हैरतअंगेज यह है कि रेलवे के सीनियर डीसीएम तन्मय मुखोपाध्याय से इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि ऐसी किसी सड़क का मामला जानकारी में नहीं है।

शहर के दक्षिण दिशा में जाने पर मोवा, सड्‌डू, साइंस सेंटर, परसुलीडीह जैसे कई इलाके मिलते हैं। यहां रहने वाले अधिकांश लोग भिलाई के लिए सड्‌डू से उरकुरा मार्ग का उपयोग करते हैं। इस मार्ग से लगभग दो से ढाई हजार लोग रोजाना गुजरते हैं। लेकिन पिछले तीन साल से इस सड़क से गुजरना लोगों के लिए मुश्किल हो गया है। भास्कर ने जब मामले की पड़ताल की तो पाया कि सड्‌डू से उरकुरा की कुल लंबाई लगभग चार किलोमीटर है। इनमें से दो किलोमीटर सड़क का निर्माण पीडब्ल्यूडी द्वारा किया गया है, लेकिन इसके बाद की दो किलोमीटर सड़क पर काम बंद कर दिया गया है। क्योंकि दो किलोमीटर लंबी यह सड़क रेलवे के अधीन है। इस सड़क को या तो रेलवे बनाएगा या फिर पीडब्ल्यूडी उसी शर्त पर बना सकता है जब उसे रेलवे एनआेसी दे दे।

पीडब्ल्यूडी अफसरों का तर्क : या तो रेलवे बनाए या फिर हमें एनओसी दें

रेलवे अफसरों को पता ही नहीं कि उनकी वजह से कौन सी सड़क अटकी

कुछ ने रूट बदल दिया तो कुछ की जाना मजबूरी

खतरनाक हो चुके इस सड़क पर हादसे के कारण कुछ लोगांे ने तो अपना रूट ही बदल दिया है, भले ही उन्हें लगभग 10 से 12 किलोमीटर घूमकर भिलाई की सड़क तक पहुंचना पड़े लेकिन वे इस सड़क से जाना मुनासिब नहीं समझते। तो कुछ कामकाजी लोग जिनकी फैक्ट्री या दफ्तर इस मार्ग से पास हैं उनको इसी सड़क से जाना पड़ता है, क्योंकि घूमकर जाने पर अक्सर वे देरी से आफिस पहुंचते हैं। लोगों का कहना है कि यदि रेलवे की आेर से पहल की जाती है तो हजारों लोगों की तकलीफ दूर हो जाएगी।

बारिश में परेशानी ज्यादा

दो किलोमीटर में 400 से ज्यादा छोटे-बड़े गड्‌ढे

सड़क को देखने से यकीन नहीं होता कि इस तरह की सड़क रायपुर से आसपास कहीं हो सकती है। क्योंकि छत्तीसगढ़ में जिस तरह से सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है उसके बाद प्रदेश के किसी ग्रामीण इलाके में भी ऐसी खतरनाक सड़क नहीं बची होगी। लेकिन शहर से लगे इलाके के लोगों को ही ऐसी सड़क से होकर गुजरना पड़ रहा है। सड़क की हालत ऐसी है कि यहां पर दो किलोमीटर में लगभग 400 से ज्यादा गड्‌ढे हैं। गड्‌ढों की साइज इतनी बड़ी कि इसमें ट्रक भी घुसे तो न निकल पाए।

सड़क पर गड्‌ढों के कारण इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों को गर्मी या दूसरे मौसम में उतनी समस्या नहीं होती वे किसी तरह गड्‌ढों से हिचकोले खाते हुए निकल जाते हैं। लेकिन बारिश के समय इस सड़क पर चलना जान जोखिम में डालने से कम नहीं है, क्योंकि पानी भरे होने के कारण पूरी सड़क सपाट दिखती है आैर यदि बिना सावधानी के इस सड़क से गुजरे तो किस गड्‌ढे पर कब कौन गिर जाएगा यह कह पाना मुश्किल है।

अक्सर फंस जाते हैं ट्रक

इस मार्ग पर गड्‌ढों पर छोटी गाड़ियां तो किसी तरह निकल जाती हैं लेकिन भारी वाहन अक्सर इस मार्ग पर फंस जाते हैं। कई बार शिकायत की जा चुकी है लेकिन इस आेर ध्यान देने वाला कोई नहीं है। कई बार तो भारी वाहनों को गड्‌ढों से निकालने के लिए मंगाए गए क्रेन भी इन्ही गड्‌ढों में फंस जाते हैं। इससे सड़क पर लंबा जाम भी लग जाता है।

इनको होगा फायदा

इस सड़क के बन जाने से मोवा, सड्‌डू, दलदलसिवनी, साइंस सेंटर के अलावा लगभग आधा दर्जन से ज्यादा निजी काॅलोनियों में रहने वाले हजारों लोगों को इसका लाभ मिलेगा। कई बार लोग इसे बनाने की मांग कर चुके हैं। लेकिन सड़क नहीं होने के कारण लोगों को लगभग दस से 12 किलोमीटर तक घूमकर जाना पड़ता है।

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