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आयुक्त के निर्देश के दो माह बाद भी तय नहीं किसने फूंका ज्यादा डीजल

रायपुर

Danik Bhaskar

Apr 17, 2018, 03:20 AM IST
रायपुर
डीबी स्टार ने आरटीआई में हुए खुलासे के बाद 27 फरवरी के अंक में बिना पात्रता जांचे इंजीनियरों को बांटी 37 गाड़ियां,हर महीने 80 की जगह 500 लीटर से ज्यादा डीजल फूंक रहे अधिकारी शीर्षक से खबर प्रकाशित किया था। इसमें बताया था कि अखिल भारतीय सेवा के वरिष्ठ वेतनमान एवं उससे ऊपर के अधिकारियों को ही वाहन देने की पात्रता है। इसके अलावा राज्य सेवा के संयुक्त संचालक व ऊपर श्रेणी के अधिकारी को भी वाहन देने का नियम हैं। इनके अलावा मैदानी अधिकारी जिन्हें शासकीय विभाग वित्त की सहमति से दिए गए हो,उन्हें ही गाड़ियां दी जा सकती हैं। मगर निगम के जिम्मेदारों ने मनमाने तरीके से अपात्र अधिकारियों को भी गाड़ियां बांट दी है।

वित्त से नहीं हुई जांच

खबर छपने के बाद निगम के जिम्मेदारों ने जांच करवाने का दावा तो किया मगर निगम के वित्त विभाग से मामले की जांच नहीं कराई। यह भी पता नहीं करवाया गया कि किसके निर्देश पर इंजीनियरों और जोन कमिश्नरों को गाड़ियां दी गई। जबकि जिन्हें गाड़ियां बांटी गई,उन्होंने मानक से तिगुना डीजल और पेट्रोल की खपत करके निगम को हर महीने लाखों रूपए की चपत लगाई।

जानकारी आई कि नहीं, पता करवाता हूं

 आयुक्त की ओर से गाड़ियों में ज्यादा डीजल खपाने के संदर्भ में जानकारी देने निर्देश जारी किए गए थे। अब इसमें कितने अधिकारियों ने जवाब दिया है, इसके बारे में पता करना पड़ेगा। नियम से जुड़े पक्ष की भी जानकारी जुटाई जा रही है। आशीष टिकरिहा, उपायुक्त, नगर निगम, रायपुर

follow-up

नगरीय प्रशासन से मंजूरी नहीं मिली

निगम या नगर पालिका परिषद की ओर से जिन्हंे भी सरकारी गाड़ियां दी जाती हैं। उसे आबंटित करने से पहले नगरीय प्रशासन छत्तीसगढ़ शासन से स्वीकृति लेनी होती है। इसमें भी भारी गड़बड़ी की गई है। निगम के जिम्मेदारों ने इंजीनियरों को गाड़ियां देने के संबंध में शासन को भी इसकी जानकारी नहीं दी है। इतना ही नहीं इसके लिए मंजूरी भी नहीं ली है।

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