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कोर्ट में केस लड़ें पर सुलह का रास्ता भी बुरा नहीं, समझौते में वे शर्तें भी रखी जा सकती हैं जिनका जिक्र मामले में नहीं

कम्युनिटी रिपोर्टर | रायपुर किसी भी तरह के विवाद में मध्यस्थता महत्वपूर्ण है। इसमें दोनों पक्षों के बीच आपसी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 14, 2018, 03:20 AM IST

कोर्ट में केस लड़ें पर सुलह का रास्ता भी बुरा नहीं, समझौते 
में वे शर्तें भी रखी जा सकती हैं जिनका जिक्र मामले में नहीं
कम्युनिटी रिपोर्टर | रायपुर

किसी भी तरह के विवाद में मध्यस्थता महत्वपूर्ण है। इसमें दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति बन जाती है और विवाद का समाधान हो जाता है। विवाद के अंत में जो फैसला आता है, वह भी दोनों पक्षों की इच्छा के अनुरूप होता है। ऐसे में जरूरी है कि लोग मध्यस्थता का रास्ता अपनाने के लिए जागरूक हों। यह बातें जिला न्यायालय में आयोजित मध्यस्थता जागरूकता कार्यक्रम में जिला न्यायाधीश नीलमचंद सांखला ने कही।

उन्होंने आगे कहा कि विवाद के बीज से सुलह का अंकुरण कराना ही मध्यस्थता की प्रक्रिया का कमाल है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और हाईकोर्ट के आदेश पर रायपुर जिला न्यायालय में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। मुख्य वक्ता के तौर पर कांकेर कुटुंब न्यायालय की मध्यस्थ न्यायाधीश कांता मार्टिन मौजूद थीं। उन्होंने अलग-अलग उदाहरणों के जरिए विभागीय न्यायाधीश की भूमिका और मध्यस्थता के फायदों को बताया। उन्होंने कहा कि आपको कोई समस्या है तो आपको कानून की मदद लेनी ही चाहिए। आप इसके लिए स्वतंत्र हैं और यह आपका अधिकार भी है। कोर्ट में कोई केस चल रहा है और पक्षकार चाहे तो आपसी समझौते से विवाद सुलझा सकता है। अपने स्तर पर मामले का निराकरण करने का फायदा यह भी है कि इसमें दोनों पक्षों की सहमति होती है। मध्यस्थता के लिए समझौतानामा तैयार करवाया जा सकता है। इसमें ऐसे बिंदुओं को भी शामिल किया जा सकता है जिनका कोर्ट में दायर किए गए मामले में जिक्र न हो। यह पक्षकार के लिए बंधनकारी होता है। पारिवारिक विवाद, विवाह से जुड़े विवाद, आपसी लेनदेन और चेक बाउंस जैसे मामलों का निपटारा समझौते के जरिए किया जा सकता है। जागरूकता कार्यक्रम में न्यायाधीशों के अलावा राज्य अधिवक्ता परिषद के सदस्य कोषराम साहू, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र महापात्र, प्रशिक्षित मध्यस्थ अधिवक्ता, पेनल लॉयर, पैरालीगल वॉलंटियर समेत विधि महाविद्यालयों के छात्र-छात्राएं विशेष रूप से मौजूद रहे।

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Web Title: कोर्ट में केस लड़ें पर सुलह का रास्ता भी बुरा नहीं, समझौते में वे शर्तें भी रखी जा सकती हैं जिनका जिक्र मामले में नहीं
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