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खारुन में फिर से खतरों की सेल्फी, दो साल में हो चुकीं 20 मौतें लेकिन न सुरक्षा, न बोर्ड

पिछले तीन दिन हुई तेज बारिश से खारुन का जलस्तर एकाएक बढ़ गया है। पानी एनीकट से ऊपर से बहने लगा है। नदी पर लक्ष्मणझूला...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 13, 2018, 03:20 AM IST

खारुन में फिर से खतरों की सेल्फी, दो साल में हो चुकीं 20 मौतें लेकिन न सुरक्षा, न बोर्ड
पिछले तीन दिन हुई तेज बारिश से खारुन का जलस्तर एकाएक बढ़ गया है। पानी एनीकट से ऊपर से बहने लगा है। नदी पर लक्ष्मणझूला और किनारे गार्डन डेवलप होने के बाद महादेवघाट में घूमने आने वाले एकाएक बढ़ गए हैं। एनीकट और घाट में हर साल बारिश के सीजन में मौतें होती हैं। पिछले साल यहां 9 लोगों की जान गई थी। फिर भी पुलिस और जिला प्रशासन ने अब तक यहां सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं किया है। न कहीं रेलिंग लगी है, न ही खतरे से आगाह करने वाले बोर्ड। नतीजा, लोग फिर से डेंजर स्पॉट तक पहुंचकर सेल्फी और तस्वीरें ले रहे हैं।

बारिश शुरू होने के बाद रोजाना 500 से अधिक लोग महादेव घाट घूमने पहुुंच रहे हैं। खासतौर पर अम्लेश्वर की ओर बने गार्डन में घूमने और लक्ष्मणझूला देखने वालों की भीड़ लगी रहती है। बारिश और भीड़ के साथ-साथ लापरवाहियां भी बढ़ने लगी हैं। लोग नदी की लहरों में उतरकर सेल्फी ले रहे हैं तो कोई नदी में पैर उतारकर घंटों बैठा मिल जाता है। इन्हें रोकने-टोकने वाला कोई नहीं है। खारुन का जलस्तर बढ़ने के बाद भास्कर टीम ने महादेवघाट, अम्लेश्वर और उससे लगे हुए एनीकट में सुरक्षा के इंतजाम देखे। पता चला कि इस बार हालात पिछले साल से भी खराब हैं। सुरक्षा के नाम पर न कहीं बोर्ड लगा है, न रेलिंग। बारिश और बाढ़ का सीजन आने के बाद भी प्रशासन ने अब तक तैराकों की तैनाती नहीं की है। न ही कोई सुरक्षाकर्मी है, जो लोगों को डेंजर स्पॉट तक जाने से सचेत करे। जबकि प्रशासन ने बारिश शुरू होते ही सुरक्षा इंतजाम करने की बात कही थी। महादेवघाट में खतरा कहां और कितना है, अफसरों ने इसका सर्वे तक नहीं कराया है।

महादेवघाट एनीकट पर रोजाना सेल्फी लेने के लिए पहुंचते है युवा

पर्यटन स्थल बनने से बढ़े सैलानी

खारुन नदी पर आकर्षक लक्ष्मणझूला बनाया गया है। इसे देखने के लिए राजधानी के अलावा आसपास के इलाकों से भी लोग आ रहे हैं। दुर्ग से भी बढ़ी संख्या में लोग आने लगे हैं, क्योंकि अम्लेश्वर की ओर करोड़ों की लागत से गार्डन बनाया जा रहा है। यहां बच्चों के लिए झूले से लेकर मनोरंजन की अन्य सुविधाएं हैं। वीकेंड में शनिवार और रविवार को सैलानियों की संख्या दो हजार से अधिक पहुंच जाती है। गार्डन के किनारे भी रेलिंग नहीं लगाई गई है। नदी वाला हिस्सा खुला छोड़ दिया गया है। यहां भी सिक्युरिटी गार्ड नहीं है।

एनीकट के पास ज्यादा खतरा

खारुन नदी के तट पर एनीकट के आसपास का इलाका सबसे ज्यादा खतरनाक हो गया है। पानी का बहाव रोकने के लिए एनीकट के साथ ही छोटे-छोटे गेट बनाए गए हैं। इन्हीं गेट से पानी तेजी से बहता है और इससे गहरा भंवर बन जाता है। पिछले तीन साल में सबसे ज्यादा मौतें एनीकट के पास ही हुई हैं। यहां तेज बहाव का नजारा देखने के लिए लोग जुटते हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि भाठागांव, काठाडीह, चंदनीडीह के पास एनीकट की गहराई 20 से 30 फीट है। एनीकट के पास भंवर का खतरा सबसे ज्यादा होता है। इसके 10-15 मीटर के दायरे में तैराक भी जाने से कतराते हैं।

बनाई चौकी, लटका है ताला

पुलिस की 24 घंटे मौजूदगी के लिए महादेवघाट में डीडी नगर थाने की चौकी खोली गई है, लेकिन यहां भी हमेशा ताला लटका रहता है। गुरुवार को भी चौकी बंद मिली। आसपास कोई पुलिसकर्मी भी नहीं दिखा। युवकों के ग्रुप यहां पार्टी करने पहुंचे थे। इनमें से कुछ युवक नदी की लहरों में जाकर फोटो शूट कर रहे थे।

प्रशासन की ओर से खारुन नदी और महादेव घाट में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए जा रहे हैं। गोताखोर लगातार वहां तैनात रहेंगे। ओपी चौधरी, कलेक्टर

पिछले साल 9 लोगों ने जान गंवाई

खारुन के तेज बहाव में पिछले साल 9 लोगों की जान गई थी। इससे पहले 2016 में 11 लोगों की मौत हो गई थी। लापरवाही से ऐसे हादसे हर साल होते हैं। नहाते या सेल्फी लेते वक्त लोग नदी के तेज बहाव में बह जाते हैं। लगातार हादसों के बाद भी लोगों की लापरवाही जारी है, प्रशासन ने भी कोई सबक नहीं लिया।

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